बुखार के लक्षणों से आराम दिला सकते हैं ये 7 योगासन

By:Aditi Singh , Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jun 19, 2018
बुखार एक सामान्‍य समस्‍या है जो किसी भी वक्‍त हो सकती है, इससे आराम पाने के लिए जरूरी नहीं दवाओं का सेवन किया जाये, बल्कि योग के कुछ आसन ऐसे भी हैं जो इसके लक्षणों से आराम पहुंचाते हैं।
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    योग और बुखार

    बदलते मौसम में बुखार हो जाना आम बीमारी होती है। आमतौर पर बुखार बैक्टीरियल इंफेक्शन या वातावरण में बदलाव के कारण होता है। जब हमारा प्रतिरक्षा तंत्र (इम्यून सिस्टम) ठीक से काम नहीं करता तब बैक्‍टीरिया हमारे शरीर पर हावी होकर इसे बीमार बना देते हैं। इससे शरीर का तापमान बढ़ जाने के साथ ही गला खराब होना, शरीर में दर्द, सरदर्द आदि समस्याएं होती हैं। ऐसे में जरूरी नहीं आप दवाओं का सेवन करें, बल्कि दवाओं की जगह आप योग के आसन आजमायें, इससे शरीर का तापमान सामान्‍य होगा और बुखार के लक्षणों के आराम भी मिलेगा।

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    योग और बुखार
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    कपालभाति प्राणायाम

    ये नाक के रास्ते को साफ करे वाला योगासन है। नियमित इसका अभ्‍यास करने से कई बीमारियों के होने की संभावना कम होती है। रोज नियम से 3 से 5 मिनट कपालभाति प्राणायाम करने से नींद भी अच्छी आती है। इसे करने के लिए सुखासन या पद्मासन की मुद्रा में बैठ जाएं, फिर लंबी सांस लें। अब सांस को छोड़ें जिससे पेट पर जोर पड़े। इसे करने से आपके शरीर के 80 फीसदी विषाक्‍त पदार्थ बाहर निकल जाते है।

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    कपालभाति प्राणायाम
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    अनुलोम-विलोम प्राणायाम

    अनुलोम-विलोम से शरीर की सफाई होती है और पूरा शरीर शुद्ध हो जाता है। ये सर्दी से बचाता है। इस आसन के लिए सुखासन में बैठ जाएं। फिर दाएं हाथ के अंगूठे से नाक का दाया छिद्र बंद करें और सांस भीतर की ओर खींचे। फिर उसी हाथ की दो उंगलियों से बाईं ओर का छिद्र बंद कर दें और अंगूठा हटाकर दाईं ओर से सांस छोड़ें। इसी प्रक्रिया को फिर नाक के दूसरे छिद्र से दोहराएं।
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    अनुलोम-विलोम प्राणायाम
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    नाड़ी शोधन प्राणायाम

    शोधन प्राणायाम नर्वस सिस्टम को बहुत राहत देता है, जिससे हमारे शरीर का तापमान सामान्य बना रहता है। किसी भी सुखासन में बैठकर कमर को सीधा करें और आंखें बंद कर लें। दाएं हाथ के अँगूठे से दायीं नासिका बंद कर पूरा श्वांस बाहर निकालें। अब बायीं नासिका से श्वांस अंदर लें, तीसरी अंगुली से बायीं नासिका को भी बंद कर आंतरिक कुंभक करें। जितनी देर स्वाभाविक स्थिति में रोक सकते हैं, इसको रोकें। फिर दायां अंगूठा हटाकर श्वांस को धीरे-धीरे बाहर छोड़ें। फिर दायीं नासिका से गर्दन उठाकर श्वांस को रोकें और इसे फिर बायीं नासिका से धीरे से निकाल दें।
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    नाड़ी शोधन प्राणायाम
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    शीतली प्राणायाम

    शीतली का अर्थ होता है ठंडक और प्रणायाम का मतलब जो पूरे शरीर को ठंडा करे। शीतली प्राणायाम से गर्मी से निजात पाई जा सकती है। इसके अलावा यह मन को शांति और शारीरिक शीतलता प्रदान करता है। इसके करने के लिए सबसे पहले रीढ़ को सीधा रखते हुए किसी भी सुखासन में बैठ जाएं। फिर जीभ को बाहर निकालकर उसे इस प्रकार मोड़ें कि वह एक ट्यूब या नली के आकार जैसी बन जाए। फिर इस नली के माध्यम से ही धीर-धीरे मुंह से सांस लें। हवा नलीनुमा इस ट्यूब से गुजरकर मुंह, तालु और कंठ को ठंडक प्रदान करेगी।
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    शीतली प्राणायाम
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    मत्स्यासन प्राणायाम

    मत्स्य का अर्थ है- मछली। इस आसन में शरीर का आकार मछली जैसा बनता है, अत: यह मत्स्यासन कहलाता है। यह आसन छाती को चौड़कर उसे स्वस्थ बनाए रखने में सक्षम है। पहले पद्मासन लगाकर बैठ जाएँ। फिर पद्मासन की स्थिति में ही सावधानीपूर्वक पीछे की ओर च‍ित होकर लेट जाएँ। ध्यान रहे क‍ि लेटते समय दोनों घुटने जमीन से ही सटे रहें। फिर दोनों हाथों की सहायता से शिखास्थान को भूमि पर टिकाएँ। तत्पश्चात बाएँ पैर के अँगूठे और दोनों कोहनियों को भूमि से लगाए रखें।एक मिनट से प्रारम्भ करके पाँच मिनट तक अभ्यास बढ़ाएँ। फिर हाथ खोलकर हाथों की सहायता से सिर को सीधा कर कमर, पीठ को भूमि से लगाएँ। पुन: हाथों की सहायता से उठकर बैठ जाएँ। आसन करते वक्त श्वास-प्रश्वास की गति सामान्य बनाए रखें।
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    मत्स्यासन प्राणायाम
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    सर्वांगासन

    इस आसन से आपका रक्त संचार सही रहता है और ऊर्जा का स्तर भी बनाए रखता है। इस आसन में शरीर के सारे अंगों का व्यायाम एक साथ हो जाता है इसलिए इसे सर्वांगासन का नाम दिया गया है।सपाट जमीन पर पीठ के बल लेट जाएं और अपने दोनों हाथों को शरीर के साइड में रखें। दोनों पैरो को धीरे-धीरे ऊपर उठाइए। पूरा शरीर गर्दन से समकोण बनाते हुए सीधा लगाएं और ठोड़ी को सीने से लगाएं। इस पोजीशन में 10 बार गहरी सांस लें और फिर धीरे-धीरे नीचे आएं।
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    सर्वांगासन
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    विपरीत करणी मुद्रा की अभ्यास विधि

    पीठ के बल जमीन पर लेट जाएं। दोनों हाथों को शरीर के बगल में जमीन पर रखें। अब सजगता के साथ एक गहरी श्वास-प्रश्वास लें। इसके बाद दोनों पैरों को जमीन से ऊपर उठाएं। पैरों को उठाते ही नितम्ब को एक हल्के झटके के साथ जमीन से ऊपर उठाएं। पैरों को उठाते ही नितम्ब को एक हल्के झटके के साथ जमीन से ऊपर उठाकर हाथों को कमर पर रख दें। हाथों के सहारे, पैर तथा कमर को जमीन से ऊपर उठाकर रखें। शरीर का भार गर्दन तथा हाथों पर रखें। इस स्थिति में धड़ जमीन से 45 डिग्री के कोण पर स्थित रहता है। इस स्थिति में आरामदायक अवधि तक (1 से 5 मिनट) रुककर वापस पूर्व स्थिति में आएं।
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    विपरीत करणी मुद्रा की अभ्यास विधि
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