स्वस्थ हृदय के लिये जरूर कराएं ये 7 टेस्ट

शरीर को स्‍वस्‍थ रहने के लिए दिल को स्‍वस्‍थ रखना बहुत जरूरी है, लेकिन पता कैसे लगाया जाये कि हमारा दिल सही तरीके से काम कर रहा है और बीमार नहीं है, इसके लिए हम आपको कुछ टेस्‍ट बता रहे हैं जिनको समय पर जरूर करायें।

Rahul Sharma
Written by: Rahul SharmaPublished at: Jul 09, 2015

स्वस्थ हृदय के लिये जांच

स्वस्थ हृदय के लिये जांच
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दिल धड़कता है तो हम जीते हैं, और अगर स्वस्थ जीवन जीना है तो दिल का सही से धड़कते रहना जरूरी है। लेकिन पता कैसे लगाया जाए कि हमारा दिल ठीक से काम कर रहा है और इसे किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं होने वाली है? कुछ टेस्ट करा कर पता लगाया जा सकता है। चलिये जानें कि स्वस्थ हृदय के लिये कौन से टेस्ट कराएं जाएं।Images source : © Getty Images

ईकोकार्डियोग्राफी

ईकोकार्डियोग्राफी
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ईकोकार्डियोग्राफी दिल के काम-काज को समझता है और उसके बारे में जरूरी जानकारी प्रदान करता है। इस जांच की मदद से पता लगाया जाता है कि हृदय की मांसपेशियों को कितना खून मिल रहा है। इसके लिए हृदय की डॉपलर इमेजिंग होती है। Images source : © Getty Images

ईसीजी/स्ट्रेस टीएमटी

ईसीजी/स्ट्रेस टीएमटी
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इससे हृदय के संचालन में किसी गड़बड़ी के शुरुआती संकेत मिलते हैं और यह हृदय की देखभाल का प्रारंभिक टेस्ट होता है। जिसके बाद अन्य टेस्ट कराए जा सकते हैं। स्ट्रेस टीएमटी से शरीर को पहले थकाया जाता है और फिर ईसीजी लेकर देखा जाता है कि तनाव से हृदय की गतिविधि में कोई बदलाव तो नहीं आया है। Images source : © Getty Images

ईकेजी/ईसीजी

ईकेजी/ईसीजी
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ईकेजी का अर्थ होता है इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम। इसे ईसीजी भी कहते हैं। ईकेजी कम समय में होने वाला, सुरक्षित, दर्दरहित व कम खर्च वाला टेस्ट होता है, जिसे हृदय की किसी समस्या की आशंका होने पर किया जाता है। इस टेस्ट में मरीज की छाती, भुजाओं और पैरों की त्वचा पर छोटे इलेक्ट्रोड पैच लगाकर इनकी मदद से हृदय की इलेक्ट्रिक एक्टिविटी को रिकॉर्ड किया जाता है। इसे जांच को एक नियमित स्वास्थ्य जांच की तरह किया जा सकता है और हृदय की बीमारी का पता लगाने के लिए भी। आमतौर पर ईकेजी का खर्च 150 से 200 रुपये तक आता है। Images source : © Getty Images

सीटी हार्ट स्कैन

सीटी हार्ट स्कैन
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कार्डिएक सीटी एक हार्ट-इमेजिंग टेस्ट होता है। इसे सीटी तकनीक से दिल की संरेचना, कोरोनरी सर्कुलेशन और रक्त नलिकाओं (इनमें एओट्रा, पल्मनरी वेंस और आर्टरी शामिल हैं) की स्थिति का पता लगाने के लिए किया जाता है।Images source : © Getty Images

ग्लाइकोसाइलेटेड हिमोग्लोबिन (एचबीए1सी)

ग्लाइकोसाइलेटेड हिमोग्लोबिन (एचबीए1सी)
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ग्लाइकोसाइलेटेड हिमोग्लोबिन (एचबीए1सी) टेस्ट खून में शुगर या शर्करा की मात्रा को नापता है और डायबिटीज (मधुमेह) की पहचान करता है। एचबीए1सी 3 से 6 महीने की अवधि में ग्लाइसेमिक कंट्रोल (खून में शर्करा के स्तर) का संकेत देता है और खासतौर पर डायबिटीज के रोगियों के लिए एक जरूरी टेस्ट है। Images source : © Getty Images

कोरोनरी सीटी एंजियोग्राफी

कोरोनरी सीटी एंजियोग्राफी
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कोरोनरी सीटी एंजियोग्राफी टेस्ट हाइस्पीड 128 स्लाइस सीटी स्कैनर रक्त प्रवाह में किसी प्रकार की रुकावट की पहचान के साथ धमनियों की दीवारों पर कैल्शियम जमा होने का पता लगाता है। इसमें कोई चीरा नहीं लगता और निदान की पूरी प्रक्रिया में 30 मिनट लगते हैं। वहीं पारंपरिक एंजियोग्राफी में एक डाई शरीर में डाली जाती है और कैथेटर भी लगाना पड़ सकता है। Images source : © Getty Images

कॉलेस्ट्रॉल की जांच

कॉलेस्ट्रॉल की जांच
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कॉलेस्ट्राल की जांच रिपोर्ट कॉलेस्ट्रॉल को मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर (एमजी/डीएल) में दिखाती है। डॉक्टर कॉलेस्ट्रॉल स्तर को दूसरे रिस्क फैक्टर जैसे पारिवारिक इतिहास, स्मोकिंग और हाई बीपी आदि को भी ध्यान में रखते हुए आंकते हैं। यदि आपका कुल कॉलेस्ट्रॉल 200 एमजी/डीएल या इससे ज्यादा है या एचडीएल कॉलेस्ट्रॉल 40 एमजी/डीएल से कम है, तो आपके इलाज की लाइन तय करने के लिए आपके एलडीएल अर्थात बैड कॉलेस्ट्रॉल की जांच भी आवश्य हो जाती है। अगर आप पहला टेस्ट फास्टिंग में नहीं कराते हैं तो डॉक्टर आपको दोबारा कॉलेस्ट्रॉल टेस्ट कराने की सलाह दे सकता है। Images source : © Getty Images

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