ये 5 हस्‍त मुद्राएं जो कई रोगों का है काल, इन्‍हें करना है आसान

हाथों की मुद्राओं से कई खतरनाक और सामान्‍य बीमारियों का उपचार किया जा सकता है, ऐसा माना गया है की हाथ की अंगुलियों में पंच तत्व मौजूद होते हैं जो पूरे शरीर को स्‍वस्‍थ रखते हैं।

Atul Modi
Written by: Atul ModiPublished at: Jan 25, 2015

हाथों के लिए मुद्रायें

हाथों के लिए मुद्रायें
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हाथों की मुद्राओं से कई खतरनाक और सामान्‍य बीमारियों का उपचार किया जा सकता है, ऐसा माना गया है की हाथ की अंगुलियों में पंच तत्व मौजूद होते हैं जो पूरे शरीर को स्‍वस्‍थ रखते हैं। हस्त-मुद्राएं तुरंत असर करना शुरू कर देती हैं। जिस हाथ में ये मुद्राएं बनाते हैं, शरीर के विपरीत भाग में उनका तुरंत असर होना शुरू हो जाता है। इन मुद्राओं का प्रयोग करते समय वज्रासन, पद्मासन और सुखासन का प्रयोग करना चाहिये। इन मुद्राओं को नियमित रूप से 30-40 मिनट तक कर सकते हैं। अगर आप इसे एक बार में न कर सकें तो दो-तीन बार में भी किया जा सकता है। किसी भी मुद्रा को करते समय जिन अंगुलियों का कोई काम न हो उन्हें सीधी रखें। image source - getty images

ज्ञान-मुद्रा

ज्ञान-मुद्रा
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इसे करने के लिए अंगूठे को तर्जनी (पहली) अंगुली के सिरे पर लगा दें। शेष तीनों अंगुलियां सीधी रहेंगी। इसका अभ्‍यास स्मरण-शक्ति का विकास होता है और व्‍यक्ति का दिमाग भी स्‍वस्‍थ रहता है। इसके अलावा सिरदर्द दूर होता है तथा अनिद्रा की समस्‍या दूर होती है। नकारात्‍मक विचार भी नहीं आते हैं गलत आदतें दूर होती हैं। image source - getty images

वायु-मुद्रा

वायु-मुद्रा
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इस मुद्रा को करने के लिए तर्जनी (पहली) अंगुली को मोड़कर अंगूठे के मूल में लगाकर हलका सा दबायें, बाकी तीन उंगलियों को एकदम सीधा रखें। इसका अभ्‍यास करने से पेट में गैस की समस्‍या नहीं होती है। लकवा, साइटिका, गठिया, संधिवात, घुटने के दर्द की समस्‍या दूर होती है। गर्दन का दर्द, रीढ़ की हड्डी का दर्द, तथा पारकिंसन्स रोग में फायदा होता है। image source - speakingtree.in

आकाश-मुद्रा

आकाश-मुद्रा
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इसे करने के लिए मध्यमा अंगुली को अंगूठे के अगले हिस्‍से से मिलायें, बाकी तीनों उंगलियों को सीधा रखें। इसे करने से कान सभी प्रकार के रोग जैसे बहरापन आदि दूर हो जाता है साथ ही यह हड्डियों की कमजोरी तथा दिल की बीमारियों को भी दूर करता है। भोजन करते समय एवं चलते-फिरते यह मुद्रा न करें। image source - getty images

शून्य-मुद्रा

शून्य-मुद्रा
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इस मुद्रा को करने के लिए मध्यमा अंगुली को मोड़कर अंगूठे के मूल में लगायें एवं अंगूठे से इस उंगली को हल्‍का दबायें। इससे सभी प्रकार के कान के रोग दूर होते हैं, किसी को सुनने में समस्‍या हो रही है तो इस मुद्रा का अभ्‍यास करने के साफ सुनाई पड़ने लगता है। इसके अलावा यह मुद्रा मसूढ़े की पकड़ मजबूत करता है तथा गले के रोग एवं थायरायड रोग में भी फायदा होता है। image source - speakingtree.in

पृथ्वी-मुद्रा

पृथ्वी-मुद्रा
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इस मुद्रा को करने के लिए अनामिका (तीसरी) अंगुली को अंगूठे से लगाकर रखें। इसका नियमित अभ्‍यास करने से शरीर को ऊर्जा मिलती है, और आप एनर्जेटिक रहते हैं। यह मुद्रा पाचन-क्रिया ठीक करती है, दिमाग को शांत करती है, तथा यह शरीर में विटामिन की कमी को दूर करती है। image source - speakingtree.in

सूर्य-मुद्रा

सूर्य-मुद्रा
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इसे करने के लिए अनामिका (तीसरी) अंगुली को अंगूठे के मूल पर लगाकर दबायें। इस मुद्रा का अभ्‍यास करने से शरीर संतुलित होता है, वजन घटता है। इसके अलावा तनाव में कमी होती है, खून में कोलेस्ट्रॉल का स्‍तर कम होता है। यह मुद्रा मधुमेह और दिल की बीमारियों को भी दूर करता है। इसे गर्मी में ज्यादा समय तक न करें। image source - speakingtree.in

वरूण मुद्रा

वरूण मुद्रा
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इस मुद्रा का अभ्‍यास करने के लिए कनिष्ठा (छोटी) अंगुली को अंगूठे से लगाकर मिलायें। यह मुद्रा शरीर में रूखापन दूर करके चिकनाई बढ़ाती है, इससे त्‍वचा की खोई रंगत वापिस आती है त्‍वचा मुलायम हो जाती है। चर्मरोग, रक्त विकार एवं शरीर में पानी की कमी से उत्‍पन्‍न बीमारियों केा दूर करने के लिए इस अभ्‍यास को करें। इससे मुहांसे भी दूर होते हैं। image source - speakingtree.in

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