प्रजनन दवाओं के हो सकते हैं 7 प्रतिकूल प्रभाव

बांझपन की समस्या को दूर करने के लिए अक्सर महिलाएं फर्टीलिटी ट्रीटमेंट लेती हैं, लेकिन क्या आप इस ट्रीटमेंट के दुष्प्रभावों के बारे में जानती है, इसके बारे में विस्तार से जानने के लिए ये स्लाइडशो पढ़ें।

Aditi Singh
Written by: Aditi Singh Published at: Jul 10, 2015

फर्टीलिटी ट्रीटमेंट

फर्टीलिटी ट्रीटमेंट
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गर्भवती होने के लिए तकरीबन 20 फीसदी महिलाए फर्टीलिटी ट्रीटमेंट लेती हैं। इस ट्रीटमेंट को लेकर महिलाओं का सबसे पहले सवाल यही होता है कि इसके दुष्प्रभाव क्या हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस ट्रीटमेंट से पहले महिलाओं को इसके साइड-इफेक्ट और दुष्प्रभावों के बारे में जरूर जान लेना चाहिए। इससे पहले ये समझना भी जरूरी है कि साइड-इफेक्ट और दुष्प्रभाव अलग-अलग होते हैं। साइड-इफेक्ट कम नुकसान पहुचाते हैं जबकि दुष्प्रभावों का असर लंबे समय तक के लिए रहता है।Image Source: Getty

फर्टीलिटी ट्रीटमेंट के दुष्प्रभाव

फर्टीलिटी ट्रीटमेंट के दुष्प्रभाव
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फर्टीलिटी ट्रीटमेंट के दुष्प्रभाव निश्चित नहीं होते है। ये प्रत्येक शरीर की क्रियायों के अनुसार रिएक्ट करते है। ब्रेन स्ट्रोक, हार्ट अटैक या ओएचएस जैसे गंभीर समस्या भी फर्टीलिटी ट्रीटमेंट  का नतीजा हो सकती है। अगर ज्यादा लोगों ने इस समस्या की शिकायत ना की होती तो शायद अभी तक इस बात का पता हीं चल पाता। ज्यादातर फर्टीलिटी से संबधित दवाएं सुरक्षित होती है। साइड-इफेक्ट भी कम होते है। Image Source: Getty

क्‍लोमिफीन (Clomiphene)

क्‍लोमिफीन (Clomiphene)
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बांझपन की समस्या के लिए क्लोमिफीन साइट्रेट गोली को बार-बार खाना खतरनाक है। कई साइड इफैक्ट के अलावा इससे ओवरी के कैंसर का खतरा रहता है। इसके सामान्य साइड इफेक्ट मे हॉट फ्लेशज, रात मे पसीना आना, थकान और मूड स्विंग आदि शामिल होता है। इससे व्लोटिंग की समस्या भी हो सकती है।Image Source: Getty

जीएनआरएच एगोनिस्‍ट्स (GnRH agonists)

जीएनआरएच एगोनिस्‍ट्स (GnRH agonists)
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एग फ्रीजिंग के लिए माहवारी के 21वें दिन से जीएनआरएच एनालॉग के साथ यह प्रक्रिया शुरू होती है और माहवारी आने तक जारी रहती है। उसके बाद महिला को गोनेडोट्रॉफीन हॉर्मोन की तेज खुराक दी जाती है, जो उसकी ओवरी को इस तरह सक्रिय कर देती है, ताकि वह ज्यादा संख्या में अंडाणु पैदा करे।  इससे ट्यूमर, स्ट्रोक आदि का समस्या होने का खतरा रहता है। Image Source: Getty

गोनाडोट्रोपिंस (Gonadotropins)

गोनाडोट्रोपिंस (Gonadotropins)
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एफडीए ने गोनाडोट्रोपिंस को कई एग को प्राप्त करने के लिए सहमति दी है। इसके सामान्य साइड इफेक्ट थकान, दर्द, इंजेक्शन की जगह पर लाल हो जाना आदि होता है। इससे ब्लोटिंग , एबडोमिनल मे दर्द आदि की भी समस्या भी हो जाती है। गोनाडोट्रोपिंस के मरीजो को मूड स्विंग की समस्या नहीं होती है। इससे ओवरियन हाईपरस्टीमुलेशन और मल्टीपल प्रेगनेंसी आदि जैसे दुष्प्रभाव होते है।Image Source: Getty

जीएनआरएच एंटागोनिस्‍ट्स (GnRH Antagonists)

जीएनआरएच एंटागोनिस्‍ट्स (GnRH Antagonists)
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आईवीएफ मे प्रीमेच्योर अंडाशय की सुरक्षा के लिए इस दवाई का प्रयोग किया जाता है। इसके कोई विशेष  साइड इफेक्ट नहीं पाये गए है। इससे एलर्जी होने की संभावना होती है।  Image Source: Getty

एचसीजी (hCG)

एचसीजी (hCG)
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अंडाशय के इंडक्सन मे इस दवा का प्रयोग किया जाता है। इसका प्रयोग केवल एग को प्रत्यारोपित औऱ निकालने के लिए किया जाता है। एचसीजी न पाए जाने तक सावधानीपूर्वक लंबे समय तक फॉलोअप की जरूरत पड़ती है। कुछ मामलों में लेप्रोस्कोपी के दौरान छोटा-सा चीरा लगाकर गर्भ को निकाला जा सकता है।इसेस हाइपरस्टीमुलेशन का खतरा रहता है। Image Source: Getty

प्रोजेस्‍टेरॉन (Progesterone)

प्रोजेस्‍टेरॉन (Progesterone)
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प्रोजेस्‍टेरॉन एक प्रकार का हार्मोन है जो महिलाओं में पाया जाता है। इसे गर्भावस्‍था हार्मोन भी कहा जाता है। गर्भधारण करने से पहले से लेकर डिलीवरी होने तक इस हार्मोन का बहुत महत्‍व होता है। बांझपन से पीडित महिलाओं को इसके इंजेक्शन लगाए जाते है। इससे योनि मे खुजली और जलन आदि की समस्या हो जाती है। Image Source: Getty

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