भारतीयों की बदलती मानसिकता का प्रतीक है साक्षी मलिक-जानें उनकी सफलता का मंत्र

By:Gayatree Verma , Onlymyhealth Editorial Team,Date:Aug 26, 2016
महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बन चुकी ओलंपिक मेडलिस्ट साक्षी मलिक की सफलता के पीछे उनकी 12 साल की मेहनत छुपी है। आइए इस स्लाइडशो में जानें उनकी सफलता का मंत्र।
  • 1

    ओलंपिक मेडलिस्ट साक्षी मालिक

    भारत के घर-घर में महिलाओं की बदलती तस्वीर का प्रतीक बन चुकी साक्षी मलिक अब किसी भी परिचय की मोहताज नहीं रही। आज देश का हर एक बच्चे से लेकर बूढ़ा तक साक्षी का नाम जानता है। रियो ओलंपिक में भारत की जीत का खाता खुलवाने वाली फ्रीस्टाइल महिला पहलवान साक्षी मलिक की सफलता के पीछे 12 सालों की मेहनत छुपी है। आइए इस स्लाइडशो में विस्तार से जानें साक्षी मालिक की सफलता का मंत्र और 12 सालों की मेहनत का राज।

    ओलंपिक मेडलिस्ट साक्षी मालिक
    Loading...
  • 2

    मां को नहीं पसंद था लड़कियों का कुश्ती खेलना

    3 सितंबर 1992 को जब साक्षी का जन्म हुआ तो उनकी मां को महिला एवं बाल विकास विभाग में सुपरवाइजर की नौकरी मिली। बेटी के आने और नौकरी मिलने की खुशी के कारण साक्षी की मां की खुशी का ठिकाना ना रहा। साक्षी की शुरुआती परवरिश उनके गांव में उनके दादा और दादी ने की। दादा खुद पहलवान थे तो साक्षी का खेल में जाना तय था। लेकिन कौन सा खेल साक्षी खेलेगी ये साक्षी को ही निश्चित करना था। जब साक्षी की मां उसे 12 वर्ष की उम्र में स्टेडियम में लेकर गई तो साक्षी को वहां कुश्ती की ड्रेस पसंद आई। हालांकि साक्षी की मां को लड़कियों का कुश्ती खेलना पसंद नहीं था, लेकिन उन्हें अपनी बेटी की जिद के आगे झुकना पड़ा।

    मां को नहीं पसंद था लड़कियों का कुश्ती खेलना
  • 3

    रिश्तेदारों ने भी की थी आपत्ति

    साक्षी की ट्रेनिंग के कारण उनकी मां को स्टेडियम के नजदीक किराये पर घर लेना पड़ा। जहां से साक्षी ने सुबह-शाम पांच घंटे की प्रैक्टिस शुरू की। लेकिन असली मुश्किलें यहीं से शुरू हुईं। क्योंकि अब रिश्तेदार बेटी के कुश्ती खेलने पर आपत्ति जताने लगे। यहां से साक्षी की मां ने कुश्ती और अपनी बेटी पर पूरा ध्यान देना शुरू किया। उसे सुबह चार बजे उठाकर प्रैक्टिस के लिए ले जातीं और शाम को फिर जॉब से आने के बाद प्रैक्टिस पर ले जातीं। इस बीच स्टेडियम जा-जाकर साक्षी के खानपान का भी ख्याल रखतीं। साक्षी के साथ उसकी मां ने भी काफी मेहनत की है।

    रिश्तेदारों ने भी की थी आपत्ति
  • 4

    नहीं खाती आलू के पराठें

    साक्षी खुद को फिट रखने के लिए आलू के पराठें और अपनी फेवरेट कड़ी-चावल नहीं खाती। मेडल जीतकर आने के बाद साक्षी ने कहा, लग रहा है कि मैंने बरसों से आलू-पराठे और कढ़ी-चावल नहीं खाए। साक्षी अपनी ट्रेनिंग के दौरान केवल तरल और काबरेहाइड्रेट रहित खाना खा रही थीं। लेकिन साक्षी अब घर लौटने पर खूब सारे कढ़ी-चावल खाने वाली है। वैसे साक्षी को फिल्मों या दोस्तों के साथ घूमने का कोई शौक नहीं है लेकिन उन्हें सोना खूब पसंद है। अब वो घर जाकर सबसे पहले खूब सोने वाली है और परिवार के साथ समय बिताने वाली हैं।

    नहीं खाती आलू के पराठें
  • 5

    सुबह की शुरुआत 500 उठक-बैठक के साथ

    साक्षी सुबह की शुरुआत 500 उठक-बैठक कर के करती हैं। उसके बाद वो स्टेडियम में कड़ा अभ्‍यास करती हैं। इसके अलावा खुद को फिट रखने के लिए वे रोजाना दूध-बादाम, अंकुरित अनाज, फल, सब्जियां, मुनक्का, सोयाबीन, दालें, अनार व मौसमी का जूस, नॉन वेजिटेरियन समेत हर चीज खाती है। साक्षी के लिए रोजाना घर पर तोरई की सब्जी बनती है।

    सुबह की शुरुआत 500 उठक-बैठक के साथ
Load More
X
संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK