इन कारणों से कारगर नहीं है पारंपरिक डेटिंग की सलाह

परंपरायें समाज को जोड़कर रिश्‍तों को मजबूत बनाती हैं, लेकिन डेटिंग की बात आते ही कुछ पारं‍परिक सलाह वर्तमान परिदृष्‍य में सही नहीं है, इस स्‍लाइडशो में इसे विस्‍तार से जानने की कोशिश करते हैं।

Gayatree Verma
Written by: Gayatree Verma Published at: Nov 27, 2015

क्‍लासिक डेटिंग की सलाह

क्‍लासिक डेटिंग की सलाह
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परंपरायें समाज को जोड़ती हैं और रिश्‍तों को मजबूत बनाती हैं, लेकिन बदलते समय के साथ समाज में खुलापन आने लगा और लोगों की सोच बदलने लगी। समय के साथ लोग खुलने लगे और डेटिंग को लेकर पहले जो पर्दे में था वो अब खुल्‍लम-खुल्‍ला होने लगा। ऐसे में अगर आप डेटिंग कर रहे हैं और कोई आपसे कहे कि क्‍लासिक अंदाज में डेटिंग करो, तो शायद ये आपके लिए लाजमी नहीं होगा। क्‍योंकि उन पुराने ख्‍यालों के साथ शायद आप किसी के साथ डेट न कर पायें। आखिर ऐसा क्‍यों है, इस स्‍लाइडशो में इसे जानने की कोशिश करते हैं।

संदेशे चिट्ठी से नहीं मोबाइल से आते हैं

संदेशे चिट्ठी से नहीं मोबाइल से आते हैं
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पहले चोरी-छिपे प्रेमी-प्रेमिका एक-दूसरे से चिट्ठी के जरिये अपने प्‍यार का इजहार करते थे। उस समय न तो फोन था और न ही तकनीक भी इतनी एडवांस थी, इसलिए दूर रहने वाले प्रेमी जोड़े अपनी विरह वेदनायें चिट्ठी के जरिये एक-दूजे से बयां करते थे। लेकिन वर्तमान में अगर कोई अगर आपसे कहे कि आप अपनी प्रेमी-प्रेमिका को महीने में केवल एक या दो चिट्ठी लिखोगे और किसी दूसरे माध्‍यम से एक-दूसरे के संपर्क में रहोगे तो शायद ये आपके बस की बात नहीं होगी।

सार्वजनिक मेले का इंतजार करना

सार्वजनिक मेले का इंतजार करना
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पहले शहरों का विकास इतना नहीं हुआ था और न ही मॉल-मल्‍टीप्‍लेक्‍स थे। घर से बाहर जाने पर पाबंदी थी। ऐसे में मिलने के लिए केवल एक ही जगह मुफीद होती थी वो थे मेले। अगर इस दौर में कोई आपसे इस तरह की डेटिंग करने का आइडिया दे तो आप इसे बिलकुल भी नहीं मानेंगे।

मंदिर में भी होती थी मुलाकात

मंदिर में भी होती थी मुलाकात
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'तू मुझसे मिलने आयी मंदिर जाने के बहाने' ये गाना अगर आप आज सुनते हैं तो आप उस दौर के प्‍यार पर हंसते हैं। क्‍योंकि उस वक्‍त प्रेमी-प्रेमिका मिलने के लिए मंदिर जाने का बहाना बनाते थे। अगर आज के दौर में कोई ऐसी बात करे तो क्‍या होगा।

रोमांस के फूल मन में खिलते थे

रोमांस के फूल मन में खिलते थे
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जी हां, पारंपरिक डेटिंग में रोमांस रेस्‍टोरेंट, होटेल, लॉग ड्राइव, पार्टीज में न होकर एक-दूसरे के मन में होते थे। अगर इस दौर में कोई आपसे कहे कि आपको अपनी प्रेमी-प्रेमिका से मिलना नहीं है तो शायद आप खून-खराबे पर उतर आयेंगे। लेकिन एक दौर वो भी था जब लोगों का प्‍यार मन में जवां होता था। इसलिए भी आज के दौर में इस तरह की डेटिंग की सलाह आपको पसंद नहीं आयेगी।

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