ओलपिंक विजेता पीवी सिंधु की सफलता की कहानी

रियो ओलंपिक में रजत पदक जीत कर देश का नाम रोशन करने वाली सिंधु की ये सालों की मेहनत का नतीजा था। आज के युवा जो मोबाइल फोन के बिना रह नहीं पाते हैं, उन्हें ये जानकर हैरानी होगी की सिंधु पिछले तीन महीनों से मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं कर रही थी।

Gayatree Verma
Written by: Gayatree Verma Published at: Sep 02, 2016

देश की रजत राजकुमारी - पीवी सिंधु

देश की रजत राजकुमारी - पीवी सिंधु
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2 करोड़, 3 करोड़, प्लॉट, बीएमडब्ल्यू... देश लौटते ही ओलंपिक रजत पदक विजेता सिंधु पर इनामों की बारिश होने लगी है। अब तो बैडमिंटन असोसिएशन ऑफ इंडिया (बीएआई) ने भी सिंधु को 50 लाख रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा कर दी है। इन सब घोषणाओं और तोहफों की बारिश के बीच उन्हें सीआरपीएफ में कमांडेंट का पद देने की घोषणा भी हो गई है। साथ ही उन्हें सीआरपीएफ का ब्रांड एम्बैसेडर भी बनाया जाएगा औऱ ये पहला मौका है जब किसी खिलाड़ी को सीआरपीएफ का ब्रांड एम्बैसेडर बनाया गया है। पीवी सिंधु पर तोहफों और घोषणाओं की ये बारिश अचानक नहीं हुई है। इसके पीछे उनकी कड़ी मेहनत है।

पिछले 3 महीने से नहीं था कोई मोबाइल

पिछले 3 महीने से नहीं था कोई मोबाइल
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सिल्वर मेडल जीतने के बाद सिंधु ने सबसे पहले आइस्क्रीम खाने की इच्छा जताई। क्यों? क्योंकि उनके कोच ने उनकी प्रेक्टिस कै दौरान हर तरह का फास्ट फुड व कार्बोहाइड्रेट वाला खाना जैसे चॉकलेट और हैदराबादी बिरयानी खाने पर पाबंदी लगा रखी थी। उनको फिट रखने के लिए और उनका वजन ना बढ़े इसलिए वे उनकी प्लेट में से खाना निकाल लिया करते थे। सिंधु के कोच पुलेला गोपीचंद ने बताया कि पिछले तीन महीने से सिंधु के पास कोई मोबाइल फोन नहीं था। ओलिंपिक में सिल्वर जीतने पर सिंधु को बधाई देते हुए पुलेला ने कहा कि अब वे सबसे पहले उन्हें मोबाइल देंगे।

एग्रेसिव बनने को कहा

एग्रेसिव बनने को कहा
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सिंधु के कोच बताते हैं कि सिंधु बहुत ही इमोशनल और शांत लड़की है। इसलिए उसे खेल से पहले किसी से भी मिलने या बात करने की मनाही थी। उनके शांत व्यवहार के कारण गोपीचंद ने उन्हें थोड़ा एग्रेसिव और आक्रामक बनने को कहा। जिसके लिए गोपीचंद ने सिंधु को एक बड़े कमरे में अकेले घंटों चिल्लाने के लिए कहा।

सुबह 3.30 बजे से शुरू हो जाती थी प्रेक्टिस

सुबह 3.30 बजे से शुरू हो जाती थी प्रेक्टिस
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पिछले कुछ सालों से सिंधु की रोजाना सुबह की शुरुआत सुबह 3.30 बजे से शुरू हो रही थी। जिसके बाद वो घंटो प्रैक्टिस किया करती थीं। सिंधु रोज सुबह गोपीचंद से एक्सक्लुसिव सेशन अटेंड करने के लिए 4.30 बजे स्टेडियम पहुंच जाती थी। वर्कआउट के बाद सिंधु के प्रेक्टिस सेशन दो भागों में बंटे थे। पहला सेशन सुबह 7 बजे से 8.30 बजे तक चलता था और दूसरा सेशन 11 बजे शुरू होकर दिन में 1 बजे खत्म होता था। फिर दो घंटे आऱाम करके 3 से 4 बजे तक सिंधु की फिटनेस और वेट ट्रेनिंग शुरू होती थी। यही ट्रेनिंग फिर से शाम को 5 से 6.30 बजे तक होती थी।

ट्रेनिंग शेड्युल

ट्रेनिंग शेड्युल
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सुबह 4.15 से 6.30 : ये सुबह का सेशन है। इस सेशन के वर्कआउट सिंधु की लोअर बॉडी की स्ट्रेंथ, मसल्स बिल्डिंग और गले व कंधों की ताकत बढ़ाने के लिए की जाती थी। 7 बजे : दूध और अंडों का ब्रेकफास्ट सुबह 9 से दोपहर 1 बजे तक : सकेंड सेशन। कोर्ट में स्पीड बढ़ाने के लिए प्रैक्टिस की जाती थी। 2 बजे: लंच टाइम। लंच में हमेशा नॉनवेज खाती थी। शाम 5 से 7 बजे तक : शाम में दिन का लास्ट सेशन होता था। रविवार : छुट्टी।

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