जलवायु परिवर्तन के चलते हम खो देंगे ये पेय और आहार

By:Meera Roy, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Dec 14, 2015
जलवायु परिवर्तन सिर्फ मौसम को ही क्षति पहुंचा रहे हों, ऐसा नहीं है। पर्यावरण भी इससे अछूता नहीं है। पर्यावरण में हुए परिवर्तन के चलते हम कई आहार विशेष और पेय भी खो रहे हैं। यहां हम कुछ ऐसे ही आहार विशेष पर चर्चा करेंगे।
  • 1

    मक्का

    पानी की कमी और बढ़ते तापमान के चलते मक्के की खेती में कमी आ रही है। इससे भी बुरी बात यह है कि तापमान में जरा भी वृद्धि से मक्के का उत्पादन प्रभावित होता है। यदि तापमान मौजूदा अनुपात में बढ़ता रहा तो इससे मक्के का उत्पाद कम होगा। नतीजन मांस इत्यादि की कीमत में आमूलचूल बढ़ोत्तरी देखी जाएगी।  मक्के की कमी न सिर्फ खाने में दिखेगी बल्कि बाजार को भी पूरी तरह हिलाकर रख सकता है। इन सबके इतर यह भी सच है कि मक्के की दिन पर दिन कमी हमें इसके स्वाद से भी वंचित कर सकती है।

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    मक्का
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  • 2

    मूंगफली

    मूंगफली के उत्पादन में कमी आ रही है जिससे इनकी कीमत में उछाल आ सकता है। दरअसल मूंगफली के उत्पादन को सही अनुपात में बरसात और सूरज की रोशनी की आवश्यकता होती है। लेकिन बदलते तापमान के चलते मूंगफली को अब यह सब नहीं मिल पाता। नतीजनत मूंगफली के पैदावर, खपत से ज्यादा है जो इसकी कीमत को बढ़ाने के लिए काफी है।
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    मूंगफली
  • 3

    मैपल सिरप

    नमीयुक्त ठंड और सूखी गर्मी के चलते शुगर मैपल पर भारी असर पड़ रहा है। तापमान में हुए बढ़ोत्तरी के चलते मैपल या चिनार के पेड़ प्राकृतिक प्रक्रिया को सही ढंग से अंजाम नहीं दे पाते। परिणामस्वरूप उनका उत्पादन कम होने लगता है। विशेषज्ञों की मानें तो तापमान मौजूदा समय अनुकूल बदलता रहा तो मैपल का बाजार जैसे पेनसिलवेनिया जैसे क्षेत्रों से खिसकने की भय बढ़ सकता है।
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    मैपल सिरप
  • 4

    चाकलेट

    इंटरनेटशनल सेंटर फार ट्रापिकल एग्रीकल्चर द्वारा 2011 में किये गए अध्ययन से यह बात सामने आयी थी कि अगले कुछ दशकों में कोको बीन्स के उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है। परिणामस्वरूप बाजार में चाकलेट दिखने कम हो सकते हैं। असल में चाकलेट कोको बीन्स से ही बनते हैं। यदि जलवायु परिवर्तन के चलते कोको बीन्स का उत्पादन में कमी आयी तो निश्चित रूप से चाकलेट का टेस्ट हमारे लिए स्वप्न बनकर रह जाएगा।
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    चाकलेट
  • 5

    सीफूड


    जलवायु में हो रहे परिवर्तन का असर समुद्रों के बढ़ते स्तर में भी देखा जा सकता है। दरअसल जलवायु परिवर्तन के चलते समुद्र में कार्बडाइआक्साइड की मात्रा बढ़ रही है। नतीजनत समुद्र तेजाबी होती जा रही है। यह न सिर्फ इन्सानों के लिए खतरे की बात है बल्कि समुद्र में रह रहे तमाम जीव के लिए जानलेवा है। मसलन समुद्र में रह रहे जीव मसलन आयस्टर आदि कम पैदा होंगे जिससे समुद्री दुनिया प्रभावित होगी। इसके अलावा एक अध्ययन यह भी खुलासा करता है कि समुद्री जीव समुद्र में बढ़ते एसिड के मुताबिक खुद को एड्जेस्ट नहीं कर पाएंगे। नतीजनत समुद्री जीवों मंे भारी कम आ सकती है। मतलब साफ है कि आने वाले कुछ दशकों में ही हम सीफूड से वंचित हो सकते हैं।
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    सीफूड
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