माइग्रेन को जन्म देते हैं ये 10 कारण, इन उपायों से संभव है इलाज

By:Rashmi Upadhyay, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Aug 17, 2018
बदलते लाइफ स्टाइल, स्ट्रेस, अनियमित जीवन शैली और गलत खान-पान के कारण पिछले कुछ सालों से माइग्रेन के मरीजों की संख्या में तेजी से इज़ाफा हुआ है। इस समस्या को कुछ कारक भी ट्रिगर कर सकते हैं।
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    माइग्रन ट्रिगर

    बदलते लाइफस्टाइल, स्ट्रेस, अनियमित जीवन शैली और गलत खान-पान के कारण पिछले कुछ सालों से माइग्रेन के मरीजों की संख्या में तेजी से इज़ाफा हुआ है। स्ट्रेस, नींद पूरी न होना, अनियमित दिनचर्या, पॉल्यूशन, धूप, आग की गर्मी, तेज आवाज, कोई एलर्जी, परफ्यूम, तेज रोशनी, वेस्कुलर, सर्वाइकल स्पोंडलाइटिस, हॉरमोनिकल डिसार्डर अल्कोहल, फिजिकल और इमोशनल स्ट्रेस और अनियमित जीवन शैली ऐसे कारण हैं, जिनकी वजह से माइग्रेन अधिक होता है। लेकिन इस समस्या को कुछ अन्य कारक भी ट्रिगर कर सकते हैं।

    माइग्रन ट्रिगर
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    ज्यादा तनाव

    वैसे तो माइग्रेन के लिए किसी एक कारण को जिम्मेदार नहीं ठहरा जा सकता लेकिन यह ज्यादातर आधुनिक जीवन शैली से पैदा होता है। शहरों में प्रदूषण और अनियमित खान-पान, पूरी नींद न होना, गर्मी और धूप से भी माइग्रेन की शिकायतें बढ़ती हैं। सबसे अधिक मानसिक तनाव बढ़ने से माइग्रेन होता है।

    ज्यादा तनाव
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    मौसम में बदलाव

    माइग्रेन का दर्द, तापमान बढ़ने, अधिक नमी वाले स्‍थानों पर ज्‍यादा जल्‍दी होता है, इसलिये मौसम में बदलाव भी माइग्रेन का कारण हो सकता है। इसलिए मौसम में होने वाले बदलाव से आपको अपनी हिफाजत करनी चाहिए। घर से निकलते वक्त छाता लेकर निकलें, सूरज की सीधी रोशनी से बचें।

    मौसम में बदलाव
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    कैफीन की अधिक मात्रा

    हाल में हुए कुछ अध्‍ययनों से पता चला कि जो लोग कैफीन ज्‍यादा मात्रा में लेते है उन्‍हे भी माइग्रेन की समस्‍या हो सकती है। हर दिन दो कप से ज्‍यादा चाय या कॉफ पीने वाले लोगों को ये समस्‍या हो सकती है। इसलिए, विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि दिन में कम से कम कैफीन का सेवन करें।

    कैफीन की अधिक मात्रा
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    तेज आवाज में संगीत

    लम्‍बे समय तक तेज आवाज में संगीत सुनने से भी माइग्रेन का अटैक पड़ सकता है, और इससे उठने वाला दर्द 72 घंटे तक रहता है। इसलिए म्‍यूजिक को धीमी आवाज में सुनें और बीच बीच में कानों औक दिमाग को थोड़ा आराम भी दें।
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    तेज आवाज में संगीत
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    रिएक्टिव हाइपोग्लाइसीमिया

    कभी-कभी कुछ चीजों के बहुत अधिक सेवन जैसे, शुगर आदि से भी माइग्रेन की समस्‍या हो सकती है। इन चीज़ों के अधिक सेवन से शरीर में इंसुलिन की मात्रा टूटने लगती है और शुगर का स्‍तर गिर जाता है, जिस कराण ब्‍लड़ शुगर कम हो जाता है और सिर में तेज दर्द होने लगता है।
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    रिएक्टिव हाइपोग्लाइसीमिया
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    बहुत ज्‍यादा सोने से

    एक दिन में 9 घंटों से अधिक सोने पर भी माइग्रेन की समस्‍या हो सकती है। कई बार लोग वीकेंड में सारा-सारा दिन सोते रहते हैं, जिससे उनके शरीर में भारीपन रहता है और उनका डेली रूटीन बिगड़ जाता है। इसी कारण काफी सो लेने के बाद भी थकान महसूस होती है और सिर दुखने लगता है।
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    बहुत ज्‍यादा सोने से
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    खाली पेट रहने पर

    कई बार घंटो तक खाली पेट रहने के कारण गैस की समस्‍या और सिर दर्द होने लगता है। इसलिए अगर आप नाश्‍ता न करने की आदत रखते हैं तो उसे छोड़ दें और समय पर नाश्‍ता, लंच और डिनर करें। दिन की शुरूआत फलों को खाकर और पानी पीकर करें, तो सेहत अच्छी रहेगी।
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    खाली पेट रहने पर
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