जानलेवा रोग है मेनिंजाइटिस, जानें लक्षण और बचाव

वायरल मैनीजाइटिस इतना हल्का होता है कि अक्सर इसकी पहचान नहीं हो पाती, लेकिन क्‍या आप जानते हैं इसका प्रभाव आपके शरीर पर कितना पड़ता है, जानने के लिए ये स्‍लाइडशो पढ़ें।

Atul Modi
Written by: Atul ModiPublished at: Oct 05, 2018

मैनीजाइटिस का शरीर पर असर

मैनीजाइटिस का शरीर पर असर
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वायरल मैनीजाइटिस यानि मस्तिष्क ज्वर बहुत ही गम्भीर रोग है। जिन कारणों से मैनीजाइटिस होता है वे अक्सर अन्य प्रकार के रोगों से जुडे होते हैं, जैसे त्वचा, मूत्रीय और जीआई सिस्टम अथवा श्वांस नलिका संक्रमण। कान अथवा नासिका साइनस का अत्यधिक संक्रमण रीढ़ के द्रव्य और मस्तिष्क में फैल कर मैनीजाइटिस (मस्तिष्क ज्वर) रोग का कारण बन सकता है।

खोपड़ी की नसें

खोपड़ी की नसें
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मेनिन्जाइटिस की सूजन खोपड़ी की नसों में असामान्यता का कारण बन सकते हैं, ये नसों का वह समूह हैं जो मस्तिष्क स्टेम से निकलती हैं, सिर तथा ग्रीवा भागों को आपूर्ति करती हैं तथा जो अन्य कार्यों के साथ ही आँखों की गतिविधि, चेहरे की मांसपेशियों तथा श्रवण को नियंत्रित करती हैं। दृश्य लक्षण तथा श्रवण हानि मेनिन्जाइटिस के प्रकरण के बाद भी बने रह सकते हैं।

सिस्टमिक इन्फ्लैमैटरी रेस्पोंस सिंड्रोम

सिस्टमिक इन्फ्लैमैटरी रेस्पोंस सिंड्रोम
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मेनिन्जाइटिस सेप्सिस को ट्रिगर कर सकता है, जो कि घटते हुए रक्तचाप का एक सिस्टमिक इन्फ्लैमैटरी रेस्पोंस सिंड्रोम है, तीव्र ह्रदय गति, उच्च या असामान्य रूप से कम तापमान, तथा उच्च श्वांसदर. विशिष्टतः परन्तु मेनिन्गोकोकल मेनिन्जाइटिस में अनिवार्य रूप से नहीं, रक्तचाप अति निम्न हो सकता है; इसके कारण अन्य अंगों को रक्त की आपूर्ति अपर्याप्त रूप से हो सकती है।

जानलेवा होता है दिमागी बुखार

जानलेवा होता है दिमागी बुखार
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मस्तिष्क ज्वर एक जानलेवा रोग है जिसका कारण ग्रुप बी अरबो वायरस होता है। वायरल व बैक्टीरियल मैनीजाइटिस तब फैलता है जब कोई असंक्रमित व्यक्ति किसी संक्रमित व्यक्ति की द्रव्य बूंदों के संपर्क में आता है । आमतौर पर यह बूंदे खांसने अथवा छींकने से फैल जाती हैं। आमतौर पर संक्रमण उन लोगों में ज्यादा फैलता है जो आस पास रहते हैं और नियमित रूप पर एक दूसरे के संपर्क में आते हैं। इससे मौत होने का भी खतरा रहता है।

गैंगरीन की समस्या

गैंगरीन की समस्या
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मेनिन्गोकोकल व्याधि में हाथ-पैरों का गैंगरीन हो सकता है। गंभीर मेनिन्गोकोकल तथा न्यूमोकोकल संक्रमण के परिणामस्वरूप एड्रीनल ग्रंथियों में हैमरेज (रक्तस्राव) हो सकता है, जिसके कारण वाटरहाउस-फ्रेडरिक्सन सिंड्रोम हो सकता है जो कि अधिकांशतः घातक होता है।

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