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इन मंदिरों में महिलाओं नहीं पुरुषों के जाने पर है पाबंदी!

By:Gayatree Verma , Onlymyhealth Editorial Team,Date:Dec 13, 2016
उन मंदिरों की चर्चा तो आप आए दिन सुनते होंगे जहां महिलाओं का जाना मना है। लेकिन क्या आपको मालूम है, भारत में ऐसे भी मंदिर हैं जहां महिलाओं का नहीं पुरुषों का जाना मना है। नहीं मालूम... तो ये स्लाइडशो पढ़ें और जानें।
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    संतोषी माता का मंदिर, जोधपुर, राजस्थान

    50 के दशक से हर घर में पूजी जाने वाली संतोषी माता के मंदिर में आज भी शुक्रवार को पुरुषों के जाने पर पाबंदी है। ये पाबंदी भले ही केवल एक दिन की है, लेकिन ये किसी सजा से कम भी नहीं है। ये पाबंदी शुक्रवार के दिन होती है और आपको पता होगा कि शुक्रवार के ही दिन ही संतोषी मां की पूजा होती है। मतलब की पुरुषों के लिए संतोषी मां की पूजा करने की मनाही है और अन्य दिनों में वे केवल माता के दर्शन ही कर पाते हैं।

    संतोषी माता का मंदिर, जोधपुर, राजस्थान
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    माता का मंदिर, मुजफ्फरपुर, बिहार

    इस मंदिर की प्रसिद्धि देश में ही नहीं विदेशों में भी है। लेकिन इस मंदिर में भी कुछ दिनों के दौरान पुरुषों के जाने पर पाबंदी होती है। इस मंदिर में माता के महीना होने के दौरान पुरुषों के जाने की मनाही है। यहां तक की पुजारी भी इन दिनों माता के दर्शन नहीं करते। अन्य दिनों में पुरुष माता के दर्शन कर सकते हैं।

    माता का मंदिर, मुजफ्फरपुर, बिहार
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    सावित्री का मंदिर, पुष्कर, राजस्थान

    तीसरा मंदिर भी राजस्थान के पुष्कर में है। यहां दुनिया का इकलौता ब्रहमा का मंदिर है। दुनिया में आपको कहीं भी ब्रहमा जी का मंदिर नहीं मिलेगा। इस कारण इसे हिंदू तीर्थ के रूप में मानते हैं। इस मंदिर से कुछ ही दूरी पर रत्नगिरी पर्वत है, जहां ब्रह्मा जी की पत्नी सावित्री का मंदिर स्थित है, जिसको सावित्री मंदिर कहा जाता है। इस मंदिर में केवल महिलाएं ही जा सकती हैं।

    सावित्री का मंदिर, पुष्कर, राजस्थान
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    सकलडीहा का मंदिर, चंदौली जिला, बनारस की सीमा पर

    यह मंदिर बनारस की सीमा पर स्थित चंदौली जिले के सकलडीहा नामक गांव में है। इस मंदिर में पुरुषों का प्रवेश वर्जित है। इस मंदिर को “सकलडीहा का मंदिर” के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर में केवल महिलाएं ही पूजा-पाठ करती हैं। इस मंदिर से जुड़ी मान्यता है कि अगर कोई पुरुष यहां जबरन प्रवेश करता है तो उसकी किस्मत पलट जाती है। इसलिए कोई पुरुष मंदिर के अंदर नहीं घुसता। केवल बाहर द्वार से ही माता को नमन कर लौट आते हैं।

    सकलडीहा का मंदिर, चंदौली जिला, बनारस की सीमा पर
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    कामाख्या मंदिर, विशाखापत्तनम

    अंत में बात करते हैं विशाखापत्तनम स्थित कामाख्या मंदिर की। माना जाता है कि इस मंदिर में मांगी गई मुराद कभी खाली नहीं जाती। लेकिन इस मंदिर में पुरुषों का जाना मना है। यह मंदिर तंत्र साधना के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इस मंदिर की खासियत है कि यहां पुजारी भी एक स्त्री ही है।

    कामाख्या मंदिर, विशाखापत्तनम
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