हार्ट अटैक के प्रमुख जोखिम कारक व इनसे बचाव

आधुनिक जीवनशैली और छोटी उम्र में काम के तनाव के कारण युवाओं में हृदयरोग की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है, जिस कारण हृदय रोगियों की संख्या भी बढ़ रही है।

Rahul Sharma
Written by:Rahul SharmaPublished at: Nov 19, 2014

हार्ट अटैक के जोखिम कारक

हार्ट अटैक के जोखिम कारक
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आधुनिक जीवनशैली और छोटी उम्र में काम के तनाव के कारण युवाओं में हृदयरोग की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है। जहां एक ओर फास्ट फूड और कोला संस्कृति के बढ़ते जोर से मधुमेह के रोगियों की संख्या बढ़ी हैं वहीं उच्च रक्तचाप, रक्त में अधिक कोलेस्ट्रोल, मोटापा आदि की समस्या भी बढ़ी है। वहीं सुस्त जीवन शैली, असंतुलित आहार, धूम्रपान व शराब का सेवन भी दिल के रोगों के लिए जिम्मेदार रिस्क फैक्टर हैं। तो चलिये जानें ऐसे ही कुछ हार्ट अटैक के प्रमुख जोखिम कारक व इनसे बचाव के तरीके। Images courtesy: © Getty Images

आनुवांशिक जोखिम

आनुवांशिक जोखिम
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आनुवांशिक तौर पर भारतीयों में हमेशा से ही दिल के रोग होने का जोखिम अधिक होता है। यही काराण है कि अमेरिकियों के मुकाबले भारतीयों को दिल के रोग होने का जोखिम लगभग 3 से 4 गुना तक ज्यादा होता है। यह आंकडा चीन के लोगों की तुलना में 6 गुना व जापानियों की तुलना में 20 गुना तक अधिक होता है। Images courtesy: © Getty Images

शहरी युवाओं को अधिक जोखिम

शहरी युवाओं को अधिक जोखिम
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कई अध्ययनों से पता चला है कि 45 वर्ष से कम आयु के भारतीयों में एक्यूट मायोकार्डियल इंफ्राक्शन (एएमआई) के 25 से 40 प्रतिशत मामले दर्ज किए जाते हैं। हृदय संबंधी रोगों के मामले शहरी युवाओं में ग्रामीण युवाओं की तुलना में अधिक होते हैं। इस अंतर का कारण अधिक जोखिम भरी जीवनशैली, दूषित पर्यावरण और आधुनिक खानपान हैं। Images courtesy: © Getty Images

उच्च रक्तचाप

उच्च रक्तचाप
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उच्च रक्तचाप भी हृदय रोग की संभावनाएं बढ़ा देता है। हालांकि नियमित व्‍यायाम से रक्‍तचाप को नियंत्रित किया जा सकता है। किसी काम या मेहनत वाली गतिविधि के दौरान हृदय की मांसपेशियां शरीर की ऑक्सीजन की जरूरत के हिसाब से तेजी से धड़कने लगती हैं। रक्त वाहिकाओं, जो दिल को ऑक्सीजन से लबरेज रक्त की आपूर्ति करती हैं, भी लचीली हो जाती हैं और बेहतर तरीके से फैल पाती  हैं, और रक्त वाहिका बेहतर ढ़ंग से काम कर पाती हैं और उच्च रक्तचाप की संभावना भी कम हो जाती है। Images courtesy: © Getty Images

मोटापा

मोटापा
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मोटापे से ग्रस्त होने का सीधा संबंध हृतद रोगों के साथ है। जिन लोगों के पेट पर चर्बी ज्यादा होती है, उन्हें इसका जोखिम अधिक होता है। व्यायाम अतिरिक्त कैलोरी को कम करने में मदद करता है और नियमित व्यायाम करने से पूरे शरीर की वसा कम होती है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। पेट पर चर्बी कम होने से सीएचडी, डायस्लिपिडेमिया, टाईप 2 डीएम और उच्च रक्तचाप के जोखिम कारकों को कम करने में भी मदद मिलती है। Images courtesy: © Getty Images

हृदय रोग पर रोकथाम के लिए क्या करें

हृदय रोग पर रोकथाम के लिए क्या करें
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हृदय रोग के जोखिम कारक को नियंत्रित या कम किया जा सकता है। जोखिम कारकों जैसे नमक के सेवन, धूम्रपान, हाई एलडीएल (बुरा) कोलेस्ट्रॉल के स्तर या कम एचडीएल (अच्छा) स्तर, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, अनियंत्रित मधुमेह, विटामिन सी और बी काम्प्लेक्स की कमी और उच्च तनाव के स्तर को नियंत्रित आदि को नियंत्रित कर जोखिम कम किया जा सकता है।Images courtesy: © Getty Images

स्वस्थ डाइट अपनाएं

स्वस्थ डाइट अपनाएं
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स्वस्थ डाइट एक स्वस्थ जीवनशैली का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। एक दिन की डाइट में 25 से 35 प्रतिशत से अधिक कैलोरी न लें। फाइबर लें, फाइबर पाचन तंत्र को कोलेस्ट्रॉल सोखने से रोकता है। ओटमील, जई का चोकर, सेब, केले, संतरे, नाशपाती, आलू बुखारे, काबुली चने, राजमा, दाल, लोबिया आदि में प्रचुर मात्रा में फाइबर पाया जाता है। इसके अलावा खाने में नमक की मात्रा को संतुलित करें। Images courtesy: © Getty Images

शारीरिक तौर पर सक्रिय रहें

शारीरिक तौर पर सक्रिय रहें
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नियमित रूप से शारीरिक श्रम हृदय से जुड़ी कई बीमारियों (जैसे उच्च रक्तचाप, अत्यधिक वजन) के जोखिम को काफी हद तक कम कर देता है। यही नहीं, इससे मधुमेह का खतरा भी कम होता है। लिफ्ट के बजाए रोज तेज-तेज चलें, सीढियां चढ़ें या कोई आउटडोर खेल खेलें। जॉगिंग, स्विमिंग, बाइकिंग, वॉकिंग आदि एरोबिक व्यायाम भी हृदय को स्वस्थ बनाते हैं। एक सप्ताह में 150 मिनट अर्थात तकरीबन ढाई घंटे के हल्के व्यायाम या 75 मिनट अर्थात सवा घंटे के कड़े व्यायाम की सलाह दी जाती है। साथ ही तनाव से दूर रहें, क्योंकि शओध बताते हैं की तनाव हार्ट अटैक होने के मुख्य कारणों में से एक होता है।  Images courtesy: © Getty Images

धूम्रपान व शराब आदि के सेवन से बचें

धूम्रपान व शराब आदि के सेवन से बचें
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धूम्रपान दिल का दौरा पड़ने का एक बहुत बड़ा कारण है। प्राप्त आंकड़े के मुताबिक 65 साल से कम उम्र के एक तिहाई लोगों में क्रोनिक हर्ट डिजीज का मुख्य कारण धूम्रपान होता है। वहीं शराब का सेवन भी हृदय रोगों का एक बड़ा कारण होता है। Images courtesy: © Getty Images

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