दिल को बीमारियों से बचाने के लिए अपनाएं ये टिप्स!

दिल स्‍वस्‍थ तो पूरा शरीर स्‍वस्‍थ, इसलिए इसका विशेष ध्‍यान रखना जरूरी है, लेकिन आप अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ छोटी-छोटी गलतियां करते हैं जिससे दिल की बड़ी बीमारियां हो सकती हैं।

Pooja Sinha
Written by: Pooja SinhaPublished at: Sep 12, 2014

रखें दिल का खयाल

रखें दिल का खयाल
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दिल स्‍वस्‍थ तो पूरा शरीर स्‍वस्‍थ, इसलिए इसका विशेष ध्‍यान रखना जरूरी है, लेकिन आप अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ छोटी-छोटी गलतियां करते हैं जिससे दिल की बड़ी बीमारियां हो सकती हैं। दिल की धड़कन अगर सही रहे तो आपका स्‍वास्‍थ्‍य भी सही रहता है। और अगर आप चाहते हैं कि आपका दिल सही से धड़कता रहे तो आपको कई जरूरी बातों का खयाल रखना चाहिये। विस्‍तार से जानिये उन छोटी-छोटी गलतियों के बारे में।  image courtesy : getty images

चेकअप नहीं करवाना

चेकअप नहीं करवाना
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हृदय रोग से पीडि़त कई लोगों को सामान्‍य लक्षणों के बारे में ही जानकारी नहीं होती। तो अच्‍छा है कि 20 की उम्र तक पहुंचते ही आप हर पांच वर्षों में कोलेस्‍ट्रॉल की पूरी जांच करवायें। हर दो वर्ष में बीपी और डॉक्‍टर के पास जाते समय अपना बीएमआई जरूर जांचें। और 45 का होने के बाद हर तीन वर्ष में रक्‍त शर्करा की जांच करवायें। image courtesy : getty images

पारिवारिक इतिहास का ध्‍यान रखना

पारिवारिक इतिहास का ध्‍यान रखना
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अगर आपके परिवार में हृदय रोग का इतिहास है तो आपको अतिरिक्‍त सावधान रहने की जरूरत है। आपको मालूम होना चाहिये कि आपके माता-पिता को किस प्रकार की बीमारी रही है। और साथ ही अगर संभव हो तो दादा-दादी के चिकित्‍सीय इतिहास के बारे में जानकारी इकट्ठा करें। कहीं उनकी मृत्‍यु किसी बीमारी के कारण तो नहीं हुई थी। उनकी जीवनशैली के बारे में जानकारी हासिल करें। अगर आपके सहोदर को भी हृदय रोग के लक्षण हैं, अगर खासकर कम उम्र में, तो आपको भी यह बीमारी होने की आशंका अधिक है। image courtesy : getty images

फ्लॉसिंग न करना

फ्लॉसिंग न करना
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दांतों का दिल की सेहत से सीधा संबंध होता है। दरअसल, शोध में यह बात हुआ है कि दांतों का खराब स्‍वास्‍थ्‍य और जिंजिविटस के कारण हृदय रोग हो सकता है। मसूड़ों और मुंह में सूजन होने पर पूरे शरीर में उसके बैक्‍टीरिया फैलने का खतरा होता है। और बैक्‍टीरिया के ये अंश रक्‍त प्रवाह का भी हिस्‍सा बन सकते हैं। जो लोग नियमित रूप से ब्रश और फ्लॉस करते हैं, न केवल उनके दांत साफ रहते हैं, बल्कि उन्‍हें दिल का दौरा पड़ने का खतरा भी कम होता है। image courtesy : getty images

डेयरी उत्‍पादों का कम सेवन

डेयरी उत्‍पादों का कम सेवन
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एक हालिया शोध में डॉक्‍टरों ने 82 हजार मेनोपॉज प्राप्‍त कर चुकीं महिलाओं पर आठ साल तक अध्‍ययन किया। शोध में यह बात सामने आयी कि जिन महिलाओं ने डेयरी उत्‍पादों का अधिक सेवन किया उन्‍हें टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा, डेयरी उत्‍पादों का सेवन कम करने वाली महिलाओं की अपेक्षा 50 फीसदी कम था। तो अगर आप कैलोरी का उपभोग कम करने के मकसद से डेयरी उत्‍पादों का सेवन कम करन रही हैं, तो आपको एक बार फिर इस पर सोचने की जरूरत है। image courtesy : getty images

विटामिन डी का स्‍तर

विटामिन डी का स्‍तर
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हम आपको सनबर्न करवाने के लिए नहीं कह रहे हैं। लेकिन आपके शरीर को सूरज की रोशनी की जरूरत होती है। इससे आपके शरीर को जरूरी मात्रा में विटामिन डी मिलता है। एक हालिया शोध में यह बात साबित हुई है कि जिन लोगों में विटामिन डी का स्‍तर कम होता है, उनकी रक्‍तवाहिनियों में प्‍लॉर्क जमने की आशंका अधिक होती है। डॉक्‍टरों की सलाह है कि आपको रोजाना पांच से तीस मिनट तक बिना सनस्‍क्रीन लगाये सूरज की रोशनी में जरूर रहना चाहिये। और अगर आप सुबह दस से दोपहर तीन बजे तक यह समय निकाल पायें, तो और अच्‍छा। इससे आपके शरीर को पर्याप्‍त मात्रा में विटामिन डी का निर्माण करने में मदद मिलती है। image courtesy : getty images

बीन्‍स का सेवन न करना

बीन्‍स का सेवन न करना
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बीन्‍स काफी पौष्टिक होते हैं। फिर चाहे आप उन्‍हें किसी भी रूप में खायें। राजमा, ब्‍लैक और अन्‍य प्रकार के बीन्‍स आपको सेचुरेटेड फैट के बिना पर्याप्‍त मात्रा में प्रोटीन मुहैया कराते हैं। इसके साथ ही ये सॉल्‍युबल फाइबर के भी उच्‍च स्रोत होते हैं। इससे आपके शरीर में कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। ओटमील यानी जई और जौ भी फाइबर के अच्‍छे स्रोत माने जाते हैं। यह रक्‍तवाहिनियों से कोलेस्‍ट्रॉल को बाहर निकालने में मदद मिलती है। image courtesy : getty images

एनर्जी ड्रिंक्‍स का अधिक सेवन

एनर्जी ड्रिंक्‍स का अधिक सेवन
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एनर्जी और अधिक चीनी वाले पेय पदार्थों से रक्‍त में ट्राइग्लिसराइड का स्‍तर बढ़ जाता है। ट्राइग्लिसराइड एक प्रकार की वसा होती है, जो रक्‍त को गाढ़ा बनाती है। तो, अगर आपकी रक्‍तवाहिनियों में कोलेस्‍ट्रॉल जमा हुआ है और यहां से गाढ़ा रक्‍त प्रवाहित होगा, तो इससे समस्‍या में इजाफा ही होगा। ऐसे में आपके लिए जरूरी है कि आप एनर्जी ड्रिंक्‍स के बदले पानी का सेवन करें। आप नींबू  पानी या किसी अन्‍य प्राकृतिक जूस का भी सेवन कर सकते हैं। गन्‍ने का रस भी ऊर्जा बढ़ाने के लिए अच्‍छा पेय पदार्थ हो सकता है। image courtesy : getty images

भरपूर नींद न लेना

भरपूर नींद न लेना
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आप रात को देर से सोने जाते हैं और सुबह जल्‍दी उठ जाते हैं। सारी रात भी आपकी करवटें बदलते हुए गुजरती हैं, तो यकीन जानिये आप अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। अच्‍छी नींद न लेने से आपके दिल पर बुरा असर पड़ता है। अच्‍छी नींद से रक्‍तचाप सही रहता है, और दिल की धड़कन भी नियंत्रित रहती है। जो लोग अच्‍छी नींद लेते हैं उन्‍हें दिल का दौरा पड़ने और हार्ट फैल्‍योर की आशंका कम होती है। अगर आप रात को छह से आठ घंटे की नींद नहीं ले पा रहे हैं, तो इस बारे में डॉक्‍टर से संपर्क करें। हो सकता है कि इसके पीछे रेस्‍टलैग लेग सिंड्रोम अथवा स्‍लीप एपनिया जैसे चिकित्‍सीय कारण हों। image courtesy : getty images

रंगीन आहार न करना

रंगीन आहार न करना
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फाइबर, प्रोटीन, मिनरल और एंटीऑक्‍सीडेंट्स के साथ ही फलों और सब्जियों में पोटेशियम भी होता है। बात जब रक्‍तचाप को नियंत्रित करने की होती है, तो आहार में पो‍टेशियम की मात्रा बढ़ाना उतना ही जरूरी होता है,‍जितना कि सोडियम की मात्रा कम करना। पोटेशियम सोडियम के असर को कम करने में भी मदद करता है, जिससे रक्‍तचाप को कम किया जा सकता है। खट्टे फल, केला, आलू, टमाटर और बीन्‍स पोटेशियम के उच्‍च स्रोत होते हैं। इसके साथ ही सेब, नाशपाती, खीरा और फूल गोभी आदि का सेवन स्‍ट्रोक के खतरे को 52 फीसदी कम कर देता है। image courtesy : getty images

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