ये सात टिप्‍स आजमायें और रिश्‍ते से गुस्‍सा दूर भगायें

गुस्‍सा आपके विवेक को खा जाता है और विवेक के अभाव आपके रिश्‍ते को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। तो इन टिप्‍स को आजमाकर आप अपने रिश्‍ते से गुस्‍से को हमेशा के लिए बाहर कर सकते हैं।

Bharat Malhotra
Written by: Bharat MalhotraPublished at: Nov 07, 2014

गुस्‍सा खाये प्रेम को

गुस्‍सा खाये प्रेम को
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प्रेम दो अतिरेक लोगों के बीच हुआ कोई समझौता नहीं है। यह उससे काफी ज्‍यादा है। यह वास्‍तव में दो लोगों को पूर्ण बनाने वाला माध्‍यम है। और प्‍यार जीवनभर कायम रहे इसके लिए जरूरी है कि आप निरंतर स्‍वयं की खोज करते रहें। लेकिन, आखिर प्रेम के बीच गुस्‍सा कैसे आ जाता है। कैसे आप एक दूसरे की बातों पर आपा खो बैठते हैं। हालांकि बाद में आपको अहसास होता है कि शायद आपने सही नहीं किया, लेकिन तब तक देर हो चुकी होती है। बेहतर है कि हम उन उपायों के बारे में जानें जो आपके रिश्‍ते को खराब कर रही हैं। Image Courtesy- Getty Images

आप नहीं मैं कहें

आप नहीं मैं कहें
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आप क्‍या कहते हैं इस पर ही निर्भर करता है कि आपका रिश्‍ता। आपकी बात कुछ इस तरह कही जानी चाहिये कि यह किसी पर आरोप न लगे। उदाहरण के लिए अगर आप कहते हैं, 'फ्रिज की गंदगी मुझे बहुत बुरी लगती है, मुझे बहुत खुशी होगी अगर मैं इस काम में तुम्‍हारी मदद कर सकूं। जब तक यह साफ नहीं होगा, मुझे आराम नहीं आएगा।' Image Courtesy- Getty Images

बोलने से पहले दस तक गिनें

बोलने से पहले दस तक गिनें
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गुस्‍सा कम करने का यह बहुत पुराना और कारगर तरीका माना जाता है। असल में यह अपने आप को मौका देने का एक तरीका है। जब आप गुस्‍से में होते हैं, तो बिना सोचे-समझे कुछ भी बोले जाते हैं। इसलिए जरूरी है कि आप गुस्‍से में कुछ भी बोलने से पहले एक बार शांतचित्‍त से सोचें। और दस तक गिनना उसी प्रक्रिया का हिस्‍सा है। Image Courtesy- Getty Images

दूसरे को समझें

दूसरे को समझें
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इस बात को जानने का प्रयास करें कि आखिर आपका साथी इस दौरान कैसा महसूस कर रहा है। उस परिस्थिति में खुद को रखकर देखें और महसूस करें कि इस दौरान आपका व्‍यवहार कैसा होता। और जब आप खुद का अपने साथी की जगह रखकर देखते हैं, तो आपको अहसास होता है कि आपका रूखा व्‍यवहार कितना नाजायज था। यह एक कारगर और शक्तिशाली तरीका है, इससे आपको एक दूसरे को बेहतर तरीके से समझने और दूसरे की भावनाओं का सम्‍मान करने की प्रवृत्ति विकसित होती है। Image Courtesy- Getty Images

ध्‍यान से सुनें

ध्‍यान से सुनें
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कई बार हम अपने साथी की बात को पूरा सुने बगैर ही उत्‍तर दे देते हैं। या कई बार कहा कुछ और जाता है और समझा कुछ और जाता है। इसलिए जरूरी है कि जब कभी भी ऐसी दुविधात्‍मक परिस्थिति आए तो अपने साथी की बात को दोहरा लें। इससे यह पता चल जाएगा कि आखिर उसने क्‍या कहा है और किस लहजे से कहा है। कहने के तरीके से बात का अर्थ बदल जाता है। और अगर आप अपने साथी की बात को दोहरा लेंगे तो यह परिस्थिति उत्‍पन्‍न नहीं होगी और आप उसकी भावनाओं को अच्‍छी तरह समझ जाएंगे। Image Courtesy- Getty Images

शारीरिक जुड़ाव

शारीरिक जुड़ाव
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अपने साथी को गले लगाने और छूने में शरम कैसी। किसी भी अच्‍छे प्रेम-संबंध के लिए शारीरिक संबंधों का अच्‍छा होना जरूरी माना जाता है। इससे आप दोनों के भावनात्‍मक संबंध भी मजबूत होते हैं। इससे तनाव भी दूर होता है और आप दोनों एक दूसरे के अधिक करीब आते हैं। Image Courtesy- Getty Images

दूरियां पाटें

दूरियां पाटें
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रिश्‍तों में असहमति होना लाजमी है। और आपको इसका सामना करना ही पड़ेगा। लेकिन, आप इन असहमतियों का सामना कैसे करते हैं, इसी बात पर निर्भर करता है कि आपका रिश्‍ता किस दिशा में आएगा। तो, बात कीजिये। जानने की कोशिश कीजिये कि आपकी किस बात या किस आदत से आपके साथी को परेशानी होती है। ऐसी कौन सी चीजें हैं जो आपको एक दूसरे से दूर ले जा रही हैं। या कौन सी ऐसी बातें हैं जिनके कारण आप दोनों के रिश्‍ते के बीच गुस्‍सा आ जाता है। Image Courtesy- Getty Images

सहानुभूति

सहानुभूति
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सहानुभूति व्‍यावहारिक भावना नहीं है। इसके लिए आपको खुद को प्रशिक्षित करना पड़ता है। आपको अपने साथी से इस बाबत रोज बात करनी चाहिये कि आखिर वह कैसा महसूस कर रहा है। एक दूसरे की बातों को सुनना और समझना काफी महत्‍वपूर्ण है। साथ बैठिये, एक दूसरे के दिल की बात सुनिये। जानने की कोशिश कीजिये कि आखिर आपका साथी किस मनोदशा से गुजर रहा है। आंखों में आंखें डालकर बैठिये और एक दूसरे को समझने और जानने का प्रयास कीजिये। Image Courtesy- Getty Images

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