कैंसर के मरीजों के लिए नयी आशा है इम्‍यूनोथेरेपी

By:Nachiketa Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Nov 11, 2014
कैंसर के मरीजों के लिए इम्‍यूनोथेरेपी आशा की नयी किरण की तरह है, क्‍योंकि इसके जरिये कैंसर के आखिरी स्‍टेज में भी रोगी के उपचार में सफलता मिल जाती है।
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    कैंसर का उपचार

    कैंसर एक प्रकार की जानलेवा बीमारी है जिससे हर साल हजारो मौंते दुनियाभर में होती हैं। कैंसर के उपचार में सफलता इसलिए भी नहीं मिल पाती है क्‍योंकि इसका निदान देर से होता है। लेकिन इम्‍यूनोथेरेपी का आविष्‍कार कैंसर के उपचार में वरदान की तरह है, यह कैंसर के मरीजों के लिए कए नई आशा की तरह है। कैंसर के चौथे स्‍टेज को सबसे घातक और जानलेवा माना जाता है, इस स्‍टेज में उपचार संभव नहीं होता, लेकिन इम्‍यूनोथेरेपी से इस स्‍टेज में कैंसर के मरीजों को बचाया जा सकता है।

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    कैंसर का उपचार
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    क्‍या है इम्‍यूनोथेरेपी

    इम्‍यूनोथेरेपी के जरिये कैंसर के मरीजों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जाती है। इस थेरेपी के जरिये मानव शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को इस हद तक बढ़ा दिया जाता है कि ताकि वह ट्यूमर से मुकाबला करने में सक्षम हो जाए।

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    क्‍या है इम्‍यूनोथेरेपी
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    कैसे करती है असर

    सामान्य कोशिकाओं की तुलना में कैंसर सेस की बाहरी सतह पर एक विशिष्ट प्रोटीन होता है जिसे एंटीजन कहते हैं। यह ऐसा प्रोटीन है जो इम्यून सिस्टम द्वारा निर्मित किए जाते हैं। वे कैंसर कोशिकाओं के एंटीजन से जुड़ जाते हैं और उन्हें असामान्य कोशिकाओं के रूप में चिन्हित करते हैं। इम्यूनोथेरेपी में प्रयोग किये जाने वाले केमिकल जिनको प्राय: बॉयोलॉजिकल रिस्पांस मॉडीफायर कहा जाता है क्योंकि वे शरीर के सामान्य प्रतिरोधी तंत्र (इम्यून सिस्टम) को कैंसर के खतरे से निपटने लायक बनाते हैं।

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    कैसे करती है असर
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    चौथे स्‍टेज में भी फायदेमंद

    चौथे स्‍टेज तक पहुंचने के बाद कैंसर का उपचार करना असंभव माना जाता था, क्‍योंकि इस स्‍टेज पर कैंसर पूरे शरीर में फैल जाता है। लेकिन इम्‍यूनोथेरेपी के जरिये वैज्ञानिकों ने कैंसर के ट्यूमर से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज का आविष्कार कर लिया जो शरीर के भीतर टी सेल्स से लड़ने में कामयाब हुई।

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    चौथे स्‍टेज में भी फायदेमंद
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    सभी कैंसर के लिए प्रभावी

    इम्यूनोथेरेपी में प्रयोग की जाने वाली दवायें सभी तरह के कैंसर के लिए फायदेमंद होती हैं। जिसमें ब्लैडर कैंसर, स्तन कैंसर, किडनी कैंसर, लंग कैंसर व प्रोस्टेट कैंसर के साथ-साथ ल्यूकीमिया, मल्टीपल मायलोमा व मैलोनोमा आदि का उपचार शामिल है। इम्यूनोथेरेपी का मुख्य कार्य उन अंगों को लक्ष्‍य बनाना हेता है जिनमें कैंसर की कोशिकाएं पाई जाती हैं।

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    सभी कैंसर के लिए प्रभावी
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    इम्‍यूनोथेरेपी से पहले

    कैंसर के उपचार के लिए किये जाने वाली इस प्रक्रिया से पहले चिकित्‍सक कुछ जांच कराने की सलाह भी देते हैं। यदि आपका उपचार इन्टरफेरॉन अल्फा-2ए से होना है तो आपका डॉक्टर आपसे किसी हृदय सम्बन्धी बीमारी या कुछ दवाओं के प्रति एलर्जी के इतिहास के बारे में जानकारी करेगा। उपचार से पहले यकृत की कार्यप्रणाली जांचने और विभिन्न रक्त कोशिकाओं का स्तर जांचने के लिए ब्लड टेस्ट भी कराने की सलाह चिकित्‍सक दे सकता है।

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    इम्‍यूनोथेरेपी से पहले
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    उपचार के दौरान

    कैंसर के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली कोशिका काम नहीं करती है। इन कोशिकाओं को कैंसर से लड़ने योग्य बनाने के लिए ही कैंसर मरीज से 120 एमएल खून लिया जाता है। जिसे लैब में दवा का रूप दिया जाता है। यह दवा छह बार में शरीर में दी जाती है। 15 से 20 दिनों में एक एमएल की डोज दी जाती है।

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    उपचार के दौरान
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    डेनवैक्स थेरेपी

    यह एक प्रकार की इम्यूनोथेरेपी है जिसमें शरीर के खून में प्रवाहित होने वाली सफेद रक्‍त कोशिकाओं को कैंसर प्रतिरोधी सेल- डेन्ड्रिटिक सेल में बदल दिया जाता है और यही कैंसर से लड़ने में मदद करती है। इस थेरेपी का प्रयोग कैंसर के उपचार के दौरान होने वाली दूसरी अन्‍य थेरेपी जैसे - कीमोथेरेपी आदि के साथ करने में किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा इसलिए इसे प्रारंभिक चरण से शुरू किया जा सकता है।

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    डेनवैक्स थेरेपी
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