आज भी इन मशहूर प्रेम कहानियों की दी जाती है मिसाल

इतिहास की कई कभी न भुलाई जा सकने वाली प्रेमकथाओं का गवाह रहा है, हम ऐसी ही प्रेमकहानियों के बारे में आपको बता रहे हैं जिनकी मिसाल आज भी दी जाती है।

Rahul Sharma
Written by: Rahul SharmaPublished at: Sep 18, 2015

अमर प्रेमकहानियां

अमर प्रेमकहानियां
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इतिहास में सिर्फ वीरगाथायें और महान युद्ध ही वर्णित नहीं हैं बल्कि अमर प्रेम कहानियों का भी वर्णन हैं। हीर-रांझा, लैला-मजनू, शीरी-फरहाद, पारो-देवदास, आदि। ये ऐसी प्रेमकहानियां हैं जो समय के बंधनों को तोड़कर हमेशा के लिए अमर हो गईं, और इनकी मिसाल आज भी दी जाती है। ये उन लोगों के लिए प्रेरणास्रोत हैं जो रिश्‍ते को खिलवाड़ समझते हैं और लंबे समय तक किसी रिश्‍ते में बंधना नहीं चाहते। तो आइए आज हम आपको उन अमर प्रेमकहानियों के बारे में बताते हैं।Images source : huffingtonpost

राधा और कृष्ण

राधा और कृष्ण
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राधा-कृष्ण का प्रेम अमर है। कला की लगभग हर विधा में राधा और कृष्ण के प्रेम का चित्रण मिलता है। असंख्य गोपियों के साथ रास रचाने वाले, कृष्ण, आयु में खुद से बड़ी राधा के साथ प्रेम में थे। कमाल की बात है कि समाज से उन दोनों के इस प्रेम को मान्यता भी मिली, यहां तक कि उनका नाम ही राधा के साथ लिया गया। राधा और कृष्ण के इस प्रेम ने कई मायनों में परंपराओं को तोड़ा था। Images source : adorabletab

सलीम और अनारकली

सलीम और अनारकली
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मुगले-आजम फिल्म को इस प्रेम कथा को भारत और बाकी दुनिया में अमर करने का काफी श्रेय जाता है। मशहूर मुगल सम्राट अकबर के चहेते और बाबा फरीद के आशीर्वाद से जन्मे बेटे सलीम की अनरकली के साथ से प्रेमकथा मशहूर है। अनारकली एक मूर्तिकार की बेटी थी और बला की खूबसूरत थी। अकबर इस प्रेम के खिलाफ थे, लेकिन अनारकली के प्रेम में पागल सलीम ने अपने पिता के खिलाफ बगावत तक कर दी। ऐसा कहा जाता है कि अपनी दरियादिली के लिये जाने वाले मुगल सम्राट अकबर ने अनारकली को जिंदा दीवार में चिनवा दिया था। Images source : wonderslist

बाजीराव और मस्तानी

बाजीराव और मस्तानी
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भारत के मराठा इतिहास की सबसे दिलचस्प प्रेम कहानी बाजीराव और मस्तानी आजकल काफी चर्चा में भी है। फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली रणवीर सिंह, दीपिका पादुकोण और प्रियंका चोपड़ा को लेकर इस पर फिल्म बना रहे हैं। मराठा पेशवा बाजीराव की दूसरी पत्नी का नाम मस्तानी था। मस्तानी का धर्म मुस्लिम था। वे इतनी खूबसूरत थी कि उन्हें सौन्दर्य सम्राज्ञी भी कहा जाता था। 28 अप्रैल 1740 को मराठा पेशवा बाजीराव का रावेर में बीमारी की वजह से मौत हो गई। मस्तानी भी पेशवा की चिता पर सती हो गई थी। हालांकि, मस्तानी के जीवन और मृत्यु को लेकर कई तर्क दिए जाते हैं, लेकिन सभी कहानियों में एक बात समान है और वो है इन दोनों के बीच की बेपनाह मोहब्बत। Images source : shakuntela.blogspot

रानी रूपमती और बाज बहादुर

रानी रूपमती और बाज बहादुर
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इस प्रेमकथा में युद्ध, प्रेम, संगीत और कविता का अद्भुत सम्मिश्रण है। रूपमती मालवा की मशहूर गायिका थीं और सुल्तान बाज बहादुर उनसे बेइंतहां मौहब्बत करते थे, यह एक अंतर्धार्मिक प्रेम था। बाज बहादुर मांडु के अंतिम स्वतंत्र शासक थे, जबकि रूपमती किसान पुत्री और गायिका थीं। उनकी आवाज के मुरीद बाज बहादुर उन्हें दरबार में ले गए। दोनों परिणय सूत्र में बंध गए, लेकिन यह प्रेम कहानी जल्दी ही खत्म भी हो गई, जब मुगल सम्राट अकबर ने मांडु पर चढाई करने के लिए अधम खान को भेजा। बाज बहादुर की सेना युद्ध हार गई। अधम खान भी रानी रूपमती के सौंदर्य पर मर-मिटा, लेकिन  इससे पहले कि वह मांडु के साथ रूपमती को भी कब्जे में लेता, रानी रूपमती ने ज़हर खा मौत को गले लगा लिया।Images source : anuradhawarrier.blogspot

पृथ्वीराज चौहान और संयोगिता

पृथ्वीराज चौहान और संयोगिता
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पृथ्वीराज चौहान और संयोगिता की प्रेमकथा राजस्थान के इतिहास में सबसे ऊपर है। वीर पृथ्वीराज को कन्नौज के महाराज जयचंद की पुत्री संयोगिता भा गई। संयोगिता को भी चौहान पहली ही नजर में पसंद आ गए थे। परन्तु दोनों का मिलन इतना आसान नहीं था। संयोगिता के पिता महाराज जयचंद और पृथ्वीराज में कट्टर दुश्मनी थी। इसलिये ही राजकुमारी संयोगिता के स्वयंवर में पृथ्वीराज चौहान को नहीं बुलाया गया लेकिन ठीक वक्त पर वहां पहुंचकर संयोगिता की सहमति से महाराज पृथ्वीराज ने उसका अपहरण कर लिया और मीलों का सफर एक ही घोड़े पर तय कर अपनी राजधानी पहुंचकर उनसे विवाह कर लिया। जयचंद के सिपाही उसका बाल भी बांका नहीं कर पाए। कुछ सालों बाद मौहम्मद गौरी द्वारा चौहान को मारे जाने के बाद संयोगिता भी वीरांगना की तरह सती हो गई। पृथ्वीराज चौहान और संयोगिता की प्रेमकथा की दास्तान प्रेमग्रंथ में अमिट अक्षरों से लिखी गई।Images source : anu-lal.blogspot

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