30 के बाद शरीर को कैसे रखें स्‍वस्‍थ

कुछ तरीको को अपनाकर 30 के बाद भी शरीर को स्‍वस्‍थ रखा जा सकता है। आइए जानें ऐसे ही कुछ उपायों के बारे में हमारे स्‍लाइड शो में।

Pooja Sinha
Written by: Pooja SinhaPublished at: Apr 02, 2014

30 की उम्र के बाद

30 की उम्र के बाद
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30 की उम्र के बाद का तीसरा दशक किसी भी व्‍यक्ति के जीवन का अहम हिस्‍सा होता है। यही उम्र होती है जब व्‍यक्ति की परिवारिक और व्‍यावसायिक जिम्‍मेद‍ारियां भी बढ़ती है। लेकिन इस सबके साथ ही इस दौरान उसे स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं होने का भी खतरा काफी बढ़ जाता है। जिससे आपका शरीर अस्‍वस्‍थ होने लगता है। इसके पीछे कई कारण हो सकते है, लेकिन फिर भी कुछ तरीको को अपनाकर 30 के बाद भी शरीर को स्‍वस्‍थ रखा जा सकता है।

30 के बाद शरीर की देखभाल

30 के बाद शरीर की देखभाल
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उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्य को अधिक देखभाल की जरूरत होती है। अच्छे स्वास्थ्य के लिए सबसे जरूरी है नियमित व्यायाम और सही भोजन। इसलिए 30 वर्ष के बाद अपने भोजन के प्रति अधिक सचेत हो जाना चाहिए और शरीर को चुस्‍त रखने के लिए नियमित व्‍यायाम भी करना चाहिए।

तनाव रहित रहिए

तनाव रहित रहिए
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तनाव व्‍यक्ति के स्‍वास्‍थ्‍य का सबसे बड़ा दुश्‍मन है। लेकिन न चाहते हुए भी हम अक्‍सर तनाव से घिरे रहते हैं। और उम्र बढने के साथ-साथ जीवन में आती परेशानियों में तनाव होना तो बहुत आम हो जाता है। तनाव अन्‍य प्रकार की समस्‍याओं जैसे उच्‍च रक्‍तचाप, निराशा व उदासी को जन्‍म देता है। इसलिए 30 के बाद अपने शरीर को स्‍वस्‍थ रखने के लिए तनावरहित रहने की कोशिश करें। इसके लिए तनावों के बारे में न सोचें, अपने मन को शांत रखने के लिए ऐसे रचनात्‍मक कार्य करें जो आपको पसन्‍द हो।

वजन नियंत्रित रखें

वजन नियंत्रित रखें
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तीस की उम्र के बाद महिलाओं और पुरुषों दोनों में वजन बढ़ने की समस्‍या देखी जाती है। जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती है आप काम और पारिवारिक जिम्‍मेदारियों में काफी व्‍यस्‍त हो जाते है। इसके चलते स्‍वस्‍थ भोजन और व्‍यायाम के लिए पर्याप्‍त समय ही नहीं निकाल पाते। इसलिए जरूरी है कि आप अपने खान-पान का ध्‍यान रखें, सुबह थोड़ा जल्‍दी उठें और व्‍यायाम करें इससे आप स्‍वयं को फिट रख पाएंगें।

चुस्‍त रहें

चुस्‍त रहें
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30 की उम्र के बाद अधिकांश लोगों की शारीरिक सक्रियता में कमी आने लगती है क्‍योंकि इस उम्र में आने पर ज्‍यादातर लोग सोचने लगते हैं कि ज्‍यादा श्रम नहीं कर पायेगें। और वह अपने दिमाग और शरीर को प्रयोग करना कम कर देते हैं। इस कारण से उन्‍हें अनेक प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं जैसे हृदयरोग, डायबिटीज, उच्‍च रक्तचाप आदि से गुजरना पड़ता है। इसलिए यह जरूरी है कि व्‍यक्ति 30 के बाद भी अपने शरीर व दिमाग से सक्रियता से काम लें त‍ाकि वह सदैव चुस्‍त नजर आये।

वसायुक्त आहार न लें

वसायुक्त आहार न लें
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30 के बाद स्‍वस्‍थ रहने के लिए तैलीय भोजन, मिठाई, घी, मक्खन और अन्य वसायुक्त पदार्थों का सेवन कम से कम करें। एक बार में अधिक आहार लेने की बजाय थोड़ा-थोड़ा कई बार खा सकते हैं। चाय कॉफी, कोल्ड ड्रिंक्स की बजाय पानी की भरपूर मात्रा लें। रात को बहुत अधिक भोजन न लें, क्योंकि सोते समय सबसे कम कैलोरी खर्च होती है।

संतुलित आहार

संतुलित आहार
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30 की उम्र के बाद अपने स्‍वास्‍थ्‍य को ठीक रखने के लिए सही भोजन करना अति आवश्‍यक होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, जो व्‍यक्ति नियमित रूप से संतुलित आहार लेता हैं वे अपनी उम्र से कम और आकर्षक तो दिखता ही हैं, साथ ही उसका स्‍वास्‍थ्‍य भी ठीक रहता हैं। इसलिए अपने आहार में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन व मिनरल की सही मात्रा लें। अपने भोजन में फलों व सब्जियों की मात्रा बढ़ाएं।

नियमित रूप से एक्‍सरसाइज करें

नियमित रूप से एक्‍सरसाइज करें
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एक्‍सरसाइज को नियमित रूप से अपने दिनचर्या में शामिल करें, ताकि पूरे दिन चुस्‍त-दुरुस्‍त रहने के लिए आपको एनर्जी मिल सकें। एक्‍सरसाइज आप पैदल चलकर, दौड़कर, रस्सी कूदकर भी कर सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित रूप से 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि करने से हड्डियां मजबूत होती हैं और तनाव से मुक्ति मिलती है।

अपना पोश्चर ठीक रखें

अपना पोश्चर ठीक रखें
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वैसे तो हर उम्र में आपको अपने बैठने का पोश्चर ठीक रखना चाहिए। लेकिन 30 की उम्र के बाद शरीर को शेप में रखना जरूरी होता है। ताकि इस उम्र में गलत पोश्चर के कारण पीठ दर्द और अन्‍य दर्द से बचा जा सकें। इसके आपको अपनी आदतें सुधारनी होगी। इस‍के लिए चलने-फिरने, बैठने और लेटने के पोश्चर को ठीक रखना होगा।

नियमित जांच कराये

नियमित जांच कराये
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तीस की उम्र के बाद जिम्‍मेदारियों के बढ़ जाने से, स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याये होने का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। ऐसे में नियमित रूप से अपनी जांच कराना, 30 की उम्र के बाद अपने आपको स्‍वस्‍थ रखने के लिए सबसे जरूरी होता है। नियमित जांच कराने से आप संभावित स्‍वास्‍थ्‍य खतरों के प्रति सचेत हो जाते हैं और स्‍वयं को इन खतरों से बचाकर रख सकते हैं।

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