विज्ञान की समझ से भी परे हैं मौत को धोखा देकर बचने वाले ये जांबाज

आज आपको ऐसी ही कुछ मौत को धोखा देकर बच निकलने वाले कुछ अद्भुत लोगों की सच्ची कहानियों से रूबरू कराते हैं, जहां लोगों ने जिंदा बचे रहने के लिये दुनियां की सबसे बड़ी चुनौतियों को भी पार किया।

Rahul Sharma
Written by:Rahul SharmaPublished at: Feb 12, 2016

मौत को धोखा देकर बचने वाले जांबाज

मौत को धोखा देकर बचने वाले जांबाज
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ज़िंदा रहने की सहजवृत्ति (Survival instinct) मानव मस्तिष्क के सबसे अद्भुत गुणों में से एक है। हम ऐसे हज़ारों उदाहरण देख सकते हैं जहां, मनुष्यों ने सारी संभावनाओं के परे मुश्किल से भी मुश्किल या कहिये असंभव हालातों में विज्ञान की समझ से भी आगे जीवित बचे रह कर चमत्कार कर दिखाया। उनमें से कुछ तो इतने मुश्किल हालातों से बाहर बच निकले, जहां मौत ने भी इनको गले लगाने से इनकार कर दिया। उन पर यकीन करना भी मुश्किल है। चलिये आज आपको ऐसी ही कुछ मौत को धोखा देकर बच निकलने वाले कुछ अद्भुत लोगों की सच्ची कहानियों से रूबरू कराते हैं, जहां लोगों ने जिंदा बचे रहने के लिये दुनियां की सबसे बड़ी चुनौतियों को भी पार किया।  Images source : © Getty

एरन राल्स्टोन (Aron Ralston)

एरन राल्स्टोन (Aron Ralston)
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हॉलिवुड की मशहूर फिल्म “127 hours” की प्रेरणा के पीछे के असली पुरुष और पेशे से इंजीनियर एरन राल्स्टोन ने एक कैन्यनियरिंग (canyoneering) दुर्घटना में अपने ही हाथ को काट कर अपनी चान बचाई। 26 अप्रैल 2003 में एरन पूर्वी यूटा (एक अमेरिकी राज्य) में ब्लू जॉन घाटी पर हाइकिंग कर रहे थे, तभी एक संकरी घटी को पर करते वक्त एक पत्थर उनके दाहिने हाथ पर आ गिरा और उसे घाची की दीवार के बीच कुचल दिया। एरन वहां 5 दिन और 7 घंटे के लिए फंसे रहे। अपना हाथ निकाल पाने की अथाह नाकाम कोशिश के बाद एरन ने बचने के लिये आखिरकार एरन ने अपने हाथ को काटने का डरावना फैंसला लिया। एरन के पास एक छोटे से ट्रेकिंग नाइफ के अलावा हड्डी काटने के लिये कोई उपकरण भी नहीं था। इस लिये एरन ने अपने हाथ की हड्डी को तोड़ा और फिर उसे काट कर खुद को आज़ाद किया। इसके बाद वे बाहर तक आए, जहां एक परिवार ने उन्हें देखा और मदद के लिये सूचना भेजी। 5 दिन और 7 घंटे के तक हुई मौत के खिलाफ एरन की इस जंग में उन्होंने 18 किलो वजन और रक्त की मात्रा का 25 प्रतिशत खो दिया था। Images source : © telegraph

एंडीज में फंसी उरुग्वे रग्बी टीम की ज़िदा बचने की कहानी

 एंडीज में फंसी उरुग्वे रग्बी टीम की ज़िदा बचने की कहानी
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उरुग्वे की रग्बी टीम को ले जा रहा विमान जब एंडीज में दुर्घटनाग्रस्त हुआ तो विमान में सवार 45 यात्रियों से से 29 की मौत हो गई। कॉम्पाड्रेस नान्डो पराडो और रोबेर्टो कनेसा न सिर्फ इस क्रेश में ज़िंदा बचे रहे बल्कि अलार्म (बचाव संकेत और सूचना) देने के लिये उन्होंने पहाड़ों में एक ट्रेक भी बनाया।  इस घटना पर बाद में एक फिल्म भी बनायी गई। Images source : © wired

सेलर डेबोरा स्केलिंग किले (Sailor Deborah Scaling Kiley)

सेलर डेबोरा स्केलिंग किले (Sailor Deborah Scaling Kiley)
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नाविक डेबोरा स्केलिंग किले जब रोज़ाना की तरह फ्लोरिडा के तट से रेकी के लिये निकलीं तो वे एक समुद्री तुफान में फंस गईं। इस भयंकर तूफान में उनका जहाज़ पानी में डूब गया और उसमें मौजूद लोग भी डूब गए। जैसे-तेसे उनमें से पांच लोग किसी तरह एक 11 फुट लंबे शिप के टूटे टुकड़े को पकड़ कर बचे रहे। लेकिन दुर्भाग्यवश उनमें से दो अपनी पकड़ को ज्यादा देर तक नहीं बनाए रख पाए और पानी में डूब गये, और शार्कों ने उन्हें खा लिया। तीसरा व्यक्ति अपने गंभीर घावों के कारण मौत का शिकार बना। लेकिन किसी तरह पांच दिन तक डेबोरा और उनके एक साथी ने मौत को धोखा दिये रखा और एक जहाज ने अन्हें देखा और बचाया।     Images source : © oceannavigator

मैराथन धावक जो सहारा में खो गया

मैराथन धावक जो सहारा में खो गया
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धावक मौरो प्रोस्पेरा (Mauro Prosperi), ने 1994 में मोरक्को में होने वाली मैराथन देस सबलेस (Marathon des Sables), जोकि रेत में होने वाली मेराथन होती है, में भाग लिया। 6 दिन और 233 किलोमीटर की इस मेराथन के दौरान एक रेत के तूफ़ान की वजह से मौरो प्रोस्पेरा अपने चचेरे भाई जेम्स डर्किन रास्ते से भटक गए। 36 घंटो के बाद उनका खाना और पानी खतम हो गया। जिंदा रहने के लिये उन्होंने अपना मूत्र भी पिया। पेट भरने के लिये उन्होंने चमगादड़ खाए। प्रोस्पेरा ने तंग आकर अपनी कलाई काट कर अत्महत्या की भी कोशिश की, लेकिन पानी की कमी से खून गाढ़ा हो गया और बहना बंद हो गया। दोबारा मानसिक संतुलन लौटने पर उन्होंने सुबह बादलों के साथ चलने का फैसला किया, उन्हें ज़िंदा रहने के लिये सरीसृप और कीड़े खाने पड़े। रेगिस्तान में अकेले नौ दिनों के बाद उन्हें अल्जीरियाई सेना ने देखा और अस्पताल ले गई। वो सही रास्ते से 186 मील (299 किलोमीटर) दूर थे और अपना 18 किलो वजन खो दिया था। Images source : © storypick

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