व्‍यंग्‍य इन तरीकों से आपको बनाते हैं बेहतर

आलोचना आपके उस बेस्ट फ्रेंड के समान है जो आपको सफल होने में मदद करता है और आपकी हर एक त्रुटियों को सुधारता है। सफलता के बाद यही एक साथी होता है जो आप पर घमंड हावी नहीं होने देता।

Meera Roy
Written by: Meera RoyPublished at: Dec 14, 2015

कटाक्ष करना

कटाक्ष करना
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निःसंदेह किसी के मुंह से कटाक्ष सुनना या किसी को कटाक्ष करना कतई अच्छी बात नहीं है। इससे दूसरों के साथ न सिर्फ रिश्ते खराब होने की आशंका बनी रहती है वरन दोस्तों की लिस्ट भी छोटी होती नजर आती है। मगर क्या आपको पता है कि कटाक्ष उतने भी बुरे नहीं होते जितना कि हम सोचते हैं? जी, हां! तमाम अध्ययन इस बात की पुष्टि कर चुके हैं। असल में कटाक्ष अपना आंकलन करने में भी मदद करता है। यही कारण है कि कुछ लोगों के लिए कटाक्ष दूसरी भाषा के रूप में विकसित हो चुका है।

होता है मानसिक विकास

होता है मानसिक विकास
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शोध एवं अध्ययनों का दावा है कि कुछ हद तक कटाक्ष करना अच्छे संकेत देता है। बशर्ते यह किसी को मानसिक रूप से प्रताड़ित न करे। दरअसल कटाक्ष से हम अप्रत्यक्ष तौर पर अपनी बातें बोल पाते हैं। हम अपनी कई बातें जो कहना चाहते हैं मगर कह नहीं पाते, उन्हें कटाक्ष या व्यंग्य के जरिये आसानी से कह जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जो कटाक्ष का पलटवार न कर सकें, वास्तव में उनमें मानसिक समझ की कमी होती है। यही कारण है कि कटाक्ष को हमेशा नकारात्मक रूप से लेना सही नहीं है। इसे कभी कभी सकारात्मक जामे में भी देखना चाहिए।

होती है अच्छे दोस्तों की पहचान

होती है अच्छे दोस्तों की पहचान
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निश्चित रूप कटाक्ष से दोस्त कम और दुश्मन ज्यादा होते हैं। लेकिन यदि आप कटाक्ष की भाषा पर गौर करें तो इससे पता चलेगा कि कौन आपको कैसे व्यंग्य करता है। व्यंग्य की भाषा से यह जाना जा सकता है कि कौन आपकी खूबियों पर व्यंग्य कर रहा है या कौन आपकी नकारात्मकता को उजागर करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे ही आपको अच्छे और बुरे दोस्तों की आसानी से पहचान हो जाती है।

भावनाएं होती हैं व्यक्त

भावनाएं होती हैं व्यक्त
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जरूरी नहीं है कि कटाक्ष के जरिये सिर्फ मन के क्लेश ही व्यक्त किये जाएं। कभी भी प्रेमी जोड़े पर गौर करें तो पाएंगे कि वे अकसर अपने मन की बात व्यंग्यात्मक ढंग से कहते हैं ताकि सामने वाला पार्टनर खुद दूसरे की बात समझ जाए। इसका मतलब यही है कि जब हम अपनी भावनाएं सीधे सीधे शब्दों में न कह सकें तो व्यंग्यात्मक व्यवहार का इस्तेमाल कर सकते हैं।

व्यंग्यात्मक है क्रियेटिव

व्यंग्यात्मक है क्रियेटिव
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अब भला ये क्या बात हई? आप सोच सकते हैं कि हम ख्वामखाह व्यंग्यात्मक होने को सकारात्मकता में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन जरा ध्यान दें। जो लोग व्यंग्य करने में माहिर होते हैं, उनके पास सही समय में सही शब्द चयन की कला होती है। वे अपनी बातों को घुमा फिराकर कह सकते हैं। सो, यह कहना कतई गलत नहीं है कि व्यंग्यात्मक होना कलात्मक होने का भी द्योतक है।

खराब स्थिति बनती है बेहतर

खराब स्थिति बनती है बेहतर
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व्यंग्य करने वाले लोग निःसंदेह शब्दों के अर्थ को तोड़ने-मरोड़ने में माहिर होते हैं। यही कारण है कि जब उनके सामने कोई स्थिति गंभीर रूप इख्तियार करने लगे तो वे आसानी से इससे निपट सकते हैं। वे बेहतरीन तरीके से गहमागहमी को खशीनुमान माहौल में परिवर्तित कर सकते हैं।

करवाती है आपका दबदबा कायम

करवाती है आपका दबदबा कायम
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व्यंग्य करने वालों में यह बात भी नोटिस की गई है कि वे आत्मविश्वास से भरे रहते हैं। उनमें दूसरों पर दबदबा कायम करने की काबिलियत भी होती है। यही नहीं वे अपनी इस काबिलियत के जरिये अनजानों को भी पछाड़ने की क्षमता रखते हैं। वास्तव में कहना यह इस खूबी के चलते हम एक पूरी दुनिया को अपनी मुट्ठी में कैद रखते हैं।

बदलता है सोचने का स्तर

बदलता है सोचने का स्तर
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आम लोगों जैसा सोचना कोई बड़ी बात नहीं है। आम लोगों के बीच खास होकर सोचना, यही खासियत है। व्यंग्य वही कर सकता है, जिसमें दूसरों से अलग होकर सोचने की खूबी मौजूद हो। जो व्यक्ति अलग तरह से नहीं सोचता, जो अलग शब्दों में खुद बयां नहीं कर सकता, उसे खास होने का तमगा भी नहीं दिया जाता सकता। विशेषज्ञ भी व्यंग्यात्मक लोगों के सोचने को स्तर को अन्य से बेहतर मानते हैं।

जिंदगी तुलनात्मक रूप से होती है आसान

जिंदगी तुलनात्मक रूप से होती है आसान
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हालांकि ऐसा लगता है जो व्यंग्य करने में माहिर होते हैं, उनके दोस्त जरा कम होते हैं। लेकिन जैसा कि पहले ही बताया गया है कि व्यंग्यात्मक व्यवहार अच्छे दोस्तों के चयन में मदद करता है। ...और दोस्तों के बीच जिंदगी तुलनात्मक रूप से सहज और आसान होती है। दरअसल दोस्तों के बीच अकेलापन जैसी कोई चीज नहीं रहती। दोस्तों के साथ दिल खोलकर बातें साझा की जा सकती है। सो, हो गई न जिंदगी आसान!

आपके सम्बंध हैं कहां

आपके सम्बंध हैं कहां
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व्यंग्यात्मक होने के चलते यह भी पता लगाया जा सकता है कि आखिर आप किस क्षेत्र विशेष से ताल्लुक रखते हैं। साथ ही लोग आपके पारिवारिक पृष्ठभूमि पर भी पैनी नजर रखते हैं। असल में व्यंग्य वही कर सकता है, जिसमें दूसरों से भिड़ने की ताकत और क्षमता हो। यही कारण है कि व्यंग्य के जरिये आपके पारिवारिक पृष्ठभूमि का भी पता चलता है।

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