विपरीत परिस्थितियों में भी कैसे न खोयें अपना धैर्य

विपरीत परिस्थितियों में धैर्यवान होना सबके बस की बात नहीं है, लेकिन हर जगह आपा खो देना भी सही नहीं है, विपरीत परि‍स्थिति में भी कैसे धैर्यवान बने रहें, इसके बारे में इस स्‍लाडशो में हम आपको बता रहे हैं।

Nachiketa Sharma
Written by: Nachiketa SharmaPublished at: Dec 23, 2015

विपरीत परिस्थिति और आपका धैर्य

विपरीत परिस्थिति और आपका धैर्य
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विश्‍व सुंदरी का ताज पाने की चाहत सभी की होती है। इसके लिए जब चयन होता है तब पूरी दुनिया की नजर विजेता पर होती हैं, लेकिन अगर किसी और की गलती से विश्‍व सुंदरी का खिताब आपको मिले और कुछ पल बाद आपसे छीन भी लिया जाये तो इस परिस्थिति में शायद आप खुद पर काबू नहीं रख पायेंगी। लेकिन इस गलती का शिकार मिस कोलंबिया के चेहरे पर इसके लिए किंचित मात्र भी दुख नहीं था। यहां पर रखा गया धैर्य पूरी दुनिया के पटल पर था और सबने मिस कोलंबिया की इसके लिए सराहना भी की। लेकिन सामान्‍य जीवनयापन करने वाला इंसान जीवन की भागदौड़ में इतना उलझ गया है कि छोटी-छोटी बात पर अपना धैय खो रहा है। आज इस स्‍लाइडशो में चर्चा करते हैं कि अगर विपरीत परिस्थिति हो तो कैसे अपना धैर्य बनाये रखें।

क्‍यों खो देते हैं हम अपना धैय

क्‍यों खो देते हैं हम अपना धैय
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हमारा दिमाग, हमारा अवचेतन, हमारी इच्‍छायें, आदि सब इंद्रियों के वशीभूत हो जाती हैं। जब हमारी महात्‍वाकांक्षायें प्रबल होने लगती हैं तब हम अपना संयम खोने लगते हैं। दूसरों से आगे बढ़ने की चाहत और अधिक पाने की चाहत हमें असहनशील बना देती है। तनाव और हमारे आसपास के गलत माहौल का असर भी इसपर पड़ता है।

तुलना करने से बचें

तुलना करने से बचें
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हम अपना धैर्य तब खो देते हैं जब हम खुद की तुलना किसी और से करते हैं। अगर आपका कोई साथी सफलता के नित नये कीर्तिमान बना रहा है तो उससे कैसी तुलना और कैसा द्वेष। इसके पीछे की परिस्थिति को भी जानने की कोशिश कीजिए, इसके पीछे उसकी मेहनत को देखिये। ऐसी स्थिति में उससे तुलना न करें बल्कि उसके जितनी मेहनत करके दिखायें, कुछ दिनों बाद आप भी सफलता के नये आयाम स्‍थापित करेंगे।

असफल भी हो सकते हैं

असफल भी हो सकते हैं
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धैर्य न खोने का दूसरा तरीका यह भी है कि अप्रत्याशित एवं अघोषित घटनाओं के लिए आप हमेशा तैयार रहें। अपने काम को अंजाम देने के लिए योजना बनाते हैं, किन्तु सफलता आपके हिसाब से नहीं मिलती है तो आपका विचलित होना स्‍वाभाविक है। लेकिन असफलता ही आपके सफलता को बढ़ाती है। इसलिए असफल होने पर विचलित न हों बल्कि इसे एक पाठ के रूप में स्‍वीकार कर आगे बढ़ें।

योग और ध्‍यान

योग और ध्‍यान
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मन की इंद्रियों पर काबू रखना है तो योग और मेडिटेशन को अपनी दिनचर्या बनायें। योग करने से मन की इंद्रियां न केवल सक्रिय रहती हैं बल्कि आपके वश में भी रहती हैं। ध्‍यान लगाने से आपका मन शांत होता है और मन में नकारात्‍मक विचार नहीं आते हैं। योग आपको संयम भी सिखाता है। इसलिए अगर आप र्धयवान बनना चाहते हैं तो योग और ध्‍यान जरूरी है। Image Source : Getty

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