आर्टिफिशल स्‍वीटनर : ये दिल मांगे मोर

लोग कृत्रिम मीठा खाते हैं, उनका दिल हमेशा मोर मांगता है। सवाल ऐसा क्यों है? आइये जानने के लिए आगे पढ़ते हैं।

Meera Roy
Written by: Meera RoyPublished at: Aug 29, 2016

आर्टिफिशल स्‍वीटनर की लालसा

आर्टिफिशल स्‍वीटनर की लालसा
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सूरज अपने साथ लंच बाक्स के साथ साथ एक डिब्बा मीठा भी ले जाता है। यह उसकी रोज की दिनचर्या है। वह तमाम कोशिशों के बावजूद इससे खुद को रोक नहीं पाता। यही कारण है कि जिस दिन वह मिठाई जो कि कृत्रिम मीठे से बनी होती है, नहीं ले जा पाता, वह दुकान कुछ न कुछ खरीदकर खा लेता है। अकेले सूरज ही नहीं तमाम ऐसे लोग हैं जो अपनी इस तरह की आदत से परेशान है। इसके कारण उन्हें मोटापा आदि समस्याओं का भी समाना करना पड़ता है। बावजूद इसके जो लोग कृत्रिम मीठा खाते हैं, उनका दिल हमेशा मोर मांगता है। सवाल ऐसा क्यों है? आइये जानने के लिए आगे पढ़ते हैं।

मस्तिष्क पर प्रभाव

मस्तिष्क पर प्रभाव
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कृत्रिम मीठा खाने से यह सीधे हमारे मस्तिष्क को प्रभावित करता है। नतीजतन न चाहते हुए भी हम मीठे की ओर लालायित हो जाते हैं। ऐसे में जरूरी यह हो जाता है कि कृत्रिम मिठाई को अपनी जीवनशैली का हिस्सा न बनाए। असल में कृत्रिम मिठाई में यूं तो कहा जाता है कि इसमें शुगर का स्तर बेहद कम होता है। यह डायबिटीज के मरीजों के बेहतर होता है। लेकिन सच्चाई इससे इतर है। चूंकि यह कृत्रिम मीठा है तो आपको बताते चलें कि इसके अपने नुकसान हैं। खासकर यदि मोटे लोग इसका सेवन करते हैं तो वे इससे दूर नहीं रह सकते। बहरहाल कृत्रिम मीठे का सबसे गहरा असर हमारे मस्तिष्क पर पड़ता है जिससे हम मीठे से भाग नहीं पाते।

जी ललचाना

जी ललचाना
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मीठा एक ऐसी चीज है जिसे एक बार खाओ तो दूसरी बार बिन खाए नहीं रह सकते। कृत्रिम मिठाई भी अपने अंदर इस गुण को समेटे हुए हैं। असल में जब हम कोई कृत्रिम मिठाई खाते हैं तो वह हमारे जीभ को बहुत पसंद आता है। जीभ को पसंद आने का मतलब है कि उसे दोबारा खाने का लालच पैदा हो रहा है। जब कोई चीज दोबारा खाने का लालच बने तो ऐसे में जरूरी यह होता है कि उससे दूरी बनाए रखें। असल में जैसे कि हर चीज की अति बुरी होती है, ठीक इसी तरह कृत्रिम मीठा भी हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

मस्तिष्क में घोटाला

मस्तिष्क में घोटाला
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असल में जब हम कृत्रिम मीठा खा लेते हैं तो मस्तिष्क में घोटाला होने लगता है। ऊर्जा और चाह में कंफ्यूशन बढ़ जाती है। यह नहीं समझ आता कि अपनी ऊर्जा किस चीज में खर्च की जाए। होता ये है कि हम खाने पीने की चीजें ढूंढ़ने में अपनी ऊर्जा नष्ट करने लगते हैं। असल में मस्ष्कि ज्यादा कैलोरी की डिमांग करने लगता है जिससे कि यदि कोई खाद्य पदार्थ न मिले तो मस्तिष्क को आराम नहीं मिलता।

नींद में खलल

नींद में खलल
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कृत्रिम मीठा सिर्फ हमारे मोटापे को ही प्रभावित नहीं करती। इसके अलावा जो लोग कृत्रिम मीठे के शौकीन हैं, उन्हें नींद भी कम आती है। दरअसल कृत्रिम मीठा हमारी नींद को प्रभावित करता है। नींद न सिर्फ कम आती है बल्कि उसकी गुणवत्ता में भी कमी आ जाती है। कहने का मतलब यह है कि एक व्यक्ति को प्रत्येक दिन 8 घंटे की सामान्य और 4 घंटे की गहरी नींद की आवश्यकता होती है। यदि हम 4 घंटे की गहरी नींद ले लें तो इसके बाद हमें और सोने की जरूरत नहीं रह जाती। लेकिन जो लोग कृत्रिम मीठे के शौकीन हैं उन्हें गहरी नींद नहीं आ पाती। वे अकसर रात भर जगे रहते हैं। इससे उनकी जीवनशैली भी प्रभावित होती है।

मोटापा बढ़ना

मोटापा बढ़ना
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पहले ही इस बात का जिक्र किया गया है कि कृत्रिम मीठा खाने से मोटापा बढ़ता है। खासकर उन लोगों में मोटापा ज्यादा बढ़ता है जो लोग खाद्य पदार्थ के साथ साथ ड्रिंक लिक्विड कृत्रिम मीठे सहित लेते हैं। इनमें कैलोरी बढ़ती है, किसी भी समय कुछ भी खाने के आदी होते हैं। यही नहीं आपको जानकर हैरानी होगी कि जो लोग कृत्रिम मीठा खाने के शौकीन होते हैं, वे मीठा देखकर सामान्य लोगों से भिन्न प्रतिक्रिया करते हैं। उन्हें देख ऐसा लगता है कि वे सिर्फ मीठे के लिए ही जीवित हैं।

पानी पीना

पानी पीना
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यदि आप कृत्रिम मीठा खाने के कारण काफी ज्यादा मोटे हो चुके हैं और इस समस्या का निदान नहीं मिल रहा। ऐसे में बेहतर है कि जितना हो सके पानी पीयें। इतना ही नहीं जब भी मीठा खाने का मन हो, उसके बजाय पानी को तरजीह दें। Image Source : Getty

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