कहीं, आप तो नहीं कर रहे अपने बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार?

By:Rashmi Upadhyay, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Feb 15, 2017
आजकल समय पर खाना और फल खाने के बावजूद बच्चे शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से कमजोर महसूस करते हैं। इसलिए अभिभावकों को बच्चों के साथ प्यार से पेश आना चाहिए।
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    डराए धमकाए ना

    कहते हैं बच्चे भगवान का रूप होते है। जिस तरह हम भगवान को प्यार और श्रद्धा से प्रसन्न करते हैं, ठीक वैसा ही व्यवहार हमें अपने बच्चों के साथ भी करना चाहिए। कई लोग जोर जबरदस्ती या फिर मारपीट कर बच्चों को धमकाते हैं जो कभी नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से बच्चे मानसिक रूप से कमजोर होने लगते हैं।

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    डराए धमकाए ना
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    दूसरों से तुलना ना करें

    आजकल बच्चों में बहुत कॉम्पिटीशन है। पढ़ाई से लेकर अन्य गतिविधियों में बच्चे खूब बढ़—चढ़कर भाग ले रहे हैं। ऐसे में अगर आपका बच्चा किसी चीज में कमजोर है तो उसकी दूसरों से तुलना कर उसे दबाएं ना। बल्कि अपने बच्चे का हौंसला बढ़ाएं और उसका खानपान अच्छा कर उसे मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाएं।

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    दूसरों से तुलना ना करें
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    चिड़चिड़ा ना करें

    जबरदस्ती किसी बात को लेकर अपने बच्चे पर दबाव ना डालें। कई बार ऐसा होता है कि माता—पिता अपने बच्चे पर इतना प्रेशर डाल देते हैं कि बच्चा उसे पूरा नहीं कर पाता है और चिड़चिड़ा हो जाता है। अगर माता पिता ज्यादा प्रेशर डालते हैं तो ऐसी स्थिति में बच्चा या तो हमेशा चिड़चिड़ा रहने लगता है और या फिर मायूस होकर अपने आप में ही खोया रहता है।

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    चिड़चिड़ा ना करें
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    हमेशा पढ़ने को ना कहे

    ऐसा नही हैं कि जो बच्चा दिन में 5 या 6 घंटे पढ़ाई करेगा वहीं होशियार है। कोशिश करें कि आपका बच्चा भले ही 2 घंटे पढ़ें लेकिन मन लगाकर पढ़ें। बच्चों को बीच-बीच में खेलने कूदने और खाने-पीने का समय भी दें। सिर्फ पढ़ाई कर के ही बच्चों का सम्पूर्ण विकास सम्भव नहीं है।

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    हमेशा पढ़ने को ना कहे
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    खुद से तुलना ना करें

    आप चाहे मानें या ना मानें आज का वक्त पहले से बहुत बदल गया है। इसलिए अपने बच्चों की खुद से तुलना ना करें। कई परिजन ऐसे होते हैं तो ज्यादा खेलते या शरारत करते बच्चोें को डांटने के साथ अपने वक्त की बात बताते हैं। ऐसे परिजन चाहते हैं कि जैसे अपने समय में वो रहते थे वैसे ही उनके बच्चे भी करें। लेकिन ऐसा होना संभव नहीं है। आज का समाज टैक्नालॉजी से लैस है। ऐसे में बच्चों का अन्य गतिविधियों में शामिल होना लाजमी है।

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