अंजनहारी में फायदेमंद हैं ये घरेलू नुस्‍खे

स्टाई आंखों की ऊपरी या निचली परत पर दाने के रूप में हल्के लाल रंग में उभरता है। वैसे तो यह कोई रोग नही है किन्तु इस रोग के होने पर रोगी को बहुत परेशानी होती है। लेकिन परेशान न हो क्‍योंकि कुछ घरेलू उपायों द्वारा इसका इलाज किया जा सकता है।

Pooja Sinha
Written by:Pooja SinhaPublished at: Mar 18, 2016

गुहेरी का इलाज

गुहेरी का इलाज
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आंखों की दोनों पलकों के किनारों पर बालों (बरौनियों) की जड़ों में जो छोटी-छोटी फुंसियां निकलती हैं, उसे ही अंजनहारी या गुहेरी (Stye स्टाई) भी कहा जाता है। वैसे तो यह कोई रोग नही है किन्तु इस रोग के होने पर रोगी को बहुत परेशानी होती है। अंजनहारी संक्रमण के कारण फैलता है। इसमें संक्रमित होने वाले पलकों के बालों मे छोटी सी तेल स्रावक ग्रन्थियां होती है। अंजनहारी में आंख में खुजली व जलन होती है जो बाद में मवाद भरे दानों का रूप ले लेती है। चिकित्सकों के अनुसार वैसे तो गुहेरी विटामिन A और D की कमी से निकलती है। लेकिन कभी-कभी कब्ज से पीड़ित रहने कारण भी यह निकल सकती हैं। लेकिन परेशान न हो क्‍योंकि कुछ घरेलू उपायों द्वारा इसका इलाज किया जा सकता है।

दर्द निवारक औषधि लौंग

दर्द निवारक औषधि लौंग
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लौंग एक दर्द निवारक और त्वचा की जलन को दूर करने के रूप में काम करता हैं, इसलिए यह स्‍टाई लिए एक कारगर उपाय माना जाता है। लौंग अपने एंटी-बैक्‍टीरियल गुणों के कारण आंखों के संक्रमण के प्रसार को रोकने में मदद करता हैं। समस्‍या होने पर लौंग को पानी के साथ घिसकर लेप बना लें फिर इसे अंजनहारी पर लगा लें। थोड़ी सी जलन के बाद आराम आ जाएगा। इस उपाय को दिन में दो-तीन बार कुछ दिनों के लिए लगायें।

प्राकृतिक चिकित्‍सा शक्ति से भरपूर अमरूद के पत्‍ते

प्राकृतिक चिकित्‍सा शक्ति से भरपूर अमरूद के पत्‍ते
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अपनी प्राकृतिक चिकित्‍सा शक्ति के कारण, अमरूद के पत्‍ते स्‍टाई के लिए बहुत अच्‍छे घरेलू उपाय माने जाते हैं। पत्‍तों में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पलक की सूजन और लाली को कम करने में मदद करते हैं। समस्‍या होने पर गर्म पानी से दो या तीन अमरूद के पत्‍तों को धो लें। फिर साफ कपड़े को इस पानी में डूबोकर, अतिरिक्‍त पानी निचोड़ लें। फिर अमरूद के पत्‍तों को गर्म कपड़े में रखकर अच्‍छी तरह से लपेट लें। इसे हल्‍का ठंडा होने दें, और फिर उसमें से एक पत्‍ता बाहर निकाल लें और प्रभावित हिस्‍से पर लगा लें। और पांच मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें। अन्‍य पत्तियों के साथ भी ऐसे ही करें। तीन से चार दिन के लिए दिन में दो बार इस उपाय को करें।

एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों वाला कैस्‍टर ऑयल

एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों वाला कैस्‍टर ऑयल
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कैस्टर ऑयल में रिसिनोलेइक नामक एसिड पाया जाता है, जो एक एंटी-इंफ्लेमेटरी एजेंट के रूप में काम करता है। इन्‍हीं गुणों के कारण कैस्‍टर ऑयल बहुत प्रभावी ढंग से दर्द और सूजन को कम करने में मदद करता है। समस्‍या होने पर प्रभावित आंख के हिस्‍से को बेबी शैम्‍पू और गुनगुने पानी से धो लें। फिर पांच मिनट के लिए प्रभावित पलक पर गर्म सेक करें। अब पलक को उठाकर कैस्‍टर ऑयल को कॉटन की मदद से लगा लें। कुछ दिनो के लिए इस उपाय को नियमित रूप से दिन में दो बार दोहराये।

टैनिक वाली ग्रीन टी

टैनिक वाली ग्रीन टी
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ग्रीन टी में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण स्‍टाई को कम करने के साथ इसमें होने वाले दर्द और सूजन को कम करने में मदद करता है। साथ ही टैनिक एसिड से भरपूर होने के कारण ग्रीन टी इंफेक्‍शन को दूर रखने में कारगर होता है। इसके अलावा कई तरह के पोषक तत्‍वों और एंटीऑक्‍सीडेंट की मौजूदगी चिकित्‍सा और राहत में योगदान देती है। समस्‍या होने पर कुछ मिनट के लिए गर्म पानी में एक ग्रीन टी को डिप करें। फिर अतिरिक्‍त पानी को निचोड़ लें और अपनी आंखों को बंद करके, प्रभावित पलक के ऊपर भीगे टीबैग को रखें। पांच मिनट के लिए इसे ऐसे ही रखा रहने दें। इस उपाय को दिन में कई बार तब तक करें जब तक स्‍टाई का आकार और दर्द कम न हो जायें। Image Source : Getty

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