ये हैं आंतों को सेहतमंद रखने वाले 5 हर्ब्स (जड़ी-बूटियां), जानें कैसे करें इनका सेवन

आंत और पाचन तंत्र शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंग हैं, इनकी सेहत का असर शरीर पर पड़ता है। इन प्राकृतिक जड़ी बूटियों का उपयोग आंत के लिए फायदेमंद होता है।

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghPublished at: Jun 04, 2021

आंतों के लिए प्राकृतिक जड़ी बूटी

आंतों के लिए प्राकृतिक जड़ी बूटी
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आंत और पाचन तंत्र की सेहत का असर हमारे पूरे शरीर पर पड़ता है। शरीर में भोजन को अच्छी तरह से पचाने का काम आंत और पाचन तंत्र द्वारा किया जाता है। अगर हमारा शरीर भोजन को सही तरह से पचा नहीं पाता तो इसकी वजह से शरीर को दूसरी समस्याओं से जूझना पड़ता है। आंत को स्वस्थ रखने के लिए हमें पूरे पाचन तंत्र को मजबूत बनाना होता है। पाचन तंत्र और आंत की सेहत को लेकर हुई एक स्टडी के मुताबिक लगभग 25 प्रतिशत लोग पाचन और आंत से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे हैं। जब हम आंत की सेहत की बात करते हैं तो इसमें हमारे शरीर के पाचन तंत्र के बाकी हिस्से अग्न्याशय, यकृत, पित्ताशय, छोटी आंत, बड़ी आंत और मलाशय के साथ मुहं भी शामिल है।  आंत को स्वस्थ रखने के लिए आंतों में मौजूद स्वस्थ बैक्टीरिया का संतुलन होना बेहद जरूरी होता है। आंत के स्वास्थ्य को नजरअंदाज करने से आगे चलकर और दूसरी समस्याएं भी जन्म ले लेती है। ऐसे में स्वस्थ शरीर के लिए आंतों का स्वस्थ होना बेहद जरूरी होता है। आइये जानते हैं आंतों को स्वस्थ रखने में फायदेमंद 5 प्राकृतिक जड़ी बूटियों के बारे में और आंतों को स्वस्थ रखने के लिए इनका इस्तेमाल कैसे करें? 

1. ऑलस्पाइस प्लांट (Allspice)

1. ऑलस्पाइस प्लांट (Allspice)
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Allspice आंत के लिए बेहद फायदेमंद प्राकृतिक जड़ी बूटी होती है। ऑलस्पाइस एक ऐसा पौधा है जो गैस, पेट दर्द, डायरिया, बुखार और यहां तक कि सर्दी-जुकाम में भी बेहद उपयोगी माना जाता है। Allspice में यूजेनॉल नामक तत्व पाया जाता है जो शरीर में पाचक एंजाइम को बढ़ाने का काम करता है। इसके अलावा Allspice में एनाल्जेसिक और एंटीसेप्टिक गुण भी होते हैं। पेट और आंतों को स्वस्थ बनाये रखने के लिए इसका सेवन भोजन के बाद या उससे पहले चाय के रूप में किया जा सकता है। आंत और पेट के अलावा इसका इस्तेमाल गैस, पेट में दर्द, भारी मासिक धर्म, उल्टी, दस्त, बुखार, सर्दी, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और मोटापे जैसी गंभीर समस्या में भी किया जाता है। ऑलस्पाइस की चाय बनाने के लिए आप सबसे पहले इसे थोड़ी मात्रा में लेकर साफ पानी में डालें। अब इसे लगभग 10 से १५ मिनट  आंच पर चाय की तरह पकाएं। लगभग एक कप चाय का सेवन आप भोजन करने से पहले या बाद में कर सकते हैं। नियमित रूप से इसका सेवन करने से आंतों और पाचन तंत्र को फायदा मिलता है।

2. त्रिफला (Triphala)

2. त्रिफला (Triphala)
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त्रिफला जिसमें हरड़, बहेड़ और आंवला शामिल होता है, पेट और पाचन तंत्र के लिए रामबाण माना जाता है। कब्ज और पाचन तंत्र से जुड़ी तमाम समस्याओं में त्रिफला का सेवन किया जाता है। आंतों और पाचन तंत्र को मजबूत बनाने के लिए आप नियमित रूप से त्रिफला चूर्ण का उपयोग कर सकते हैं। सोने से पहले गर्म पानी से साथ इसका एक चम्मच चूर्ण नियमित रूप से लेने पर बेहद फायदा मिलता है। आयुर्वेद की चिकित्सा में त्रिफला का सेवन सदियों से किया जा रहा है। इसके नियमित सेवन से शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण में वृद्धि होती है और आंत को काम करने में फायदा मिलता है। त्रिफला में शरीर के लिए फायदेमंद पोषक तत्व और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं जैसे सूजन, कब्ज और पेट दर्द से राहत देने का काम करते हैं। आप घर पर आसानी से त्रिफला चूर्ण बना सकते हैं। इसके लिए आपको हरड़, बहेड़ और आंवला को समान रूप से लेने की जरूरत है। इसे साफ करने के बाद धूप में कुछ दिनों तक सुखाया जाता है। अच्छी तरह से सूख जाने के बाद आप इन्हें पीसकर बारीक चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में आप काला नमक भी मिला सकते हैं। इसके बाद नियमित रूप से सुबह या शाम में गर्म पानी के साथ इसका सेवन करें। कुछ ही दिनों में इसके सेवन का परिणाम दिखने लगता है।

3. स्लिपरी एल्म के पेड़ की छाल (Slippery elm)

3. स्लिपरी एल्म के पेड़ की छाल (Slippery elm)
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स्लिपरी एल्म के पेड़ की छाल का उपयोग आंत में श्लेष्मा झिल्ली को ठीक करने के लिए किया जाता है। स्लिपरी एल्म उन रोगियों में मल त्याग के लिए भी अच्छा साबित हुआ है, जिन्हें चिड़चिड़ा आंत्र सिंड्रोम है। इसके अलावा इसका उपयोग क्रोहन रोग जैसी स्थितियों में भी किया जाता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट आंत के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। स्लिपरी एल्म एक पेड़ है जो मूल रूप से पूर्वी कनाडा में पाया जाता है। इसके पेड़ की छाल का प्रयोग औषधि के रूप में किया जाता है। आप आंतों की अच्छी सेहत के लिए इसके छाल का उपयोग कर सकते हैं। इसका इस्तेमाल करने के कई तरीके हैं। आप स्लिपरी एल्म के पेड़ की छाल को चबा सकते हैं या इसे पानी में थोड़ी रखकर उसका सेवन कर सकते हैं। नियमित रूप से इसका सेवन करने पर आंत और पाचन तंत्र को फायदा मिलता है। इसके अलावा इसका इस्तेमाल गले में खराश, कब्ज, पेट के अल्सर, त्वचा संबंधी विकारों और अन्य स्थितियों के लिए भी किया जाता है।

4. मुलेठी की जड़ (Licorice Root)

4. मुलेठी की जड़ (Licorice Root)
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आयुर्वेद में मुलेठी का उपयोग एक बेहद फायदेमंद मानी जाने वाली औषधि के रूप में किया जाता है। यह आंत को स्वस्थ रखने के लिए इस्तेमाल में लायी जाने वाली सबसे महत्वपूर्ण जड़ी बूटियों में से एक है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मुलेठी की जड़ में पौधे के यौगिक होते हैं जो पेट की परेशानी और जलन को कम कर सकते हैं। मुलेठी की जड़ आंत में मौजूद अस्वस्थ बैक्टीरिया को भी मार सकती है, जो पेप्टिक अल्सर का कारण होते हैं। मुलेठी की जड़ का इस्तेमाल पीलिया, हेपेटाइटिस और फैटी लिवर जैसी समस्याओं में बेहद फायदेमंद माना जाता है। मुलेठी में प्राकृतिक एंटी-ऑक्सिडेंट गुण पाए जाते हैं जो विषाक्त पदार्थों को दूर करने में लाभदायक होते हैं। इसके अलावा मुलेठी में मौजूद लीकोरिस पेट की कई समस्याएं जैसे कब्ज, एसिडिटी और जलन आदि में फायदेमंद होता है। आप इसकी जड़ का उपयोग आंतों को बेहतर बनाने के लिए कर सकते हैं। आप इसे सीधे चबाकर या इसे पानी में उबाल कर उसके रस का सेवन कर सकते हैं।

5. रोजमैरी (Rosemary)

5. रोजमैरी (Rosemary)
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रेजमेरी का उपयोग पेट और लिवर के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। अपच और कब्ज के इलाज के लिए रोज़मेरी के अर्क का उपयोग किया जाता है। भारत में रोजमेरी को गुलमेहंदी के नाम से भी जाना जाता है। रोजमेरी का वैज्ञानिक नाम रोजमेरिन ऑफिसिनेलिस (Rosmarinus officinalis) है और यह पुदीना परिवार लैमियेसी (Lameaceae) का हिस्सा है। रोजमेरी पेट की कई समस्याओं में फायदेमंद माना जाता है। इसका उपयोग पेट की कब्ज, दस्त, सूजन आदि में भी किया जाता है। सप्ताह में एक बार िका इस्तेमाल करने से पेट से जुड़ी कई समस्याएं दूर होती हैं। पेट के लिए इसका इस्तेमाल आप चाय के रूप में भी कर सकते हैं। रोजमेरी या गुलमेहंदी में एंटीऑक्सीडेंट की अच्छी मात्रा होती है और इसमें एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो पेट की सूजन और दर्द में फायदेमंद माने जाते हैं। आप रोजाना एक कप रोजमेरी की चाय का सेवन चिकित्सक से परामर्श लेने के बाद कर सकते हैं।

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