डायबिटीज के कारण हो सकती हैं ये स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍यायें

डायबिटीज की समस्‍या एक बार होने पर यह जीवनभर साथ रहती है, क्‍या आप जानते हैं कि डायबिटीज होने के बाद यह अपने साथ दूसरी स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍यायें भी लाती है, इसके बारे में विस्तार से जानने के लिए ये स्लाइड शो पढ़ें।

Aditi Singh
Written by: Aditi Singh Published at: Jul 09, 2015

मधुमेह के दुष्प्रभाव

मधुमेह के दुष्प्रभाव
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आज मधुमेह की समस्या से आम हो गयी है। हर चौथा व्यक्ति इसका शिकार है। मधुमेह खुद में एक बीमारी नहीं होती है। ये अन्य कई बिमारियों का कारण भी होती है। आइये हम आपको बताते हैं मधुमेह कैसे आपके शरीर के अन्य अंगों को प्रभावित करती है। इसके बारे में विस्‍तार से बात करते हैं।  Image courtesy: © Getty Images

हृदय स्वास्थ्य

हृदय स्वास्थ्य
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मधुमेह से ग्रस्त लोगों के दिल के दौरे एवं हार्ट फेल्योर के शिकार होने की आशंका सामान्य लोगों की तुलना में दोगुनी होती है। मधुमेह रोगियों को दिल के दौरों और स्‍ट्रोक की संभावना सामान्‍य से तीन से चार गुना अधिक होता है। मधुमेह के कारण कार्डियोवस्‍कुलर बीमारियां अधिक होती हैं क्‍योंकि इससे रक्‍त संचार में अवरोध होता है। Image courtesy: © Getty Images

किडनी फेल्यौर

किडनी फेल्यौर
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डायबिटीज़ (मधुमेह) के मरीज़ों को डायबिटिक नेफ्रोपैथी जैसी स्थिति से भी गुज़रना पड़ सकता है। डायबिटिक नेफ्रोपैथी में डायबिटीज़ होने के साथ-साथ गुर्दे की क्षति होने लगती है। हमारे गुर्दों में बहुत सी सूक्ष्म रक्त वाहिकाएं होती हैं, जो रक्त को साफ करने का काम करती है। डायबिटीज़ के कारण अधिक शुगर की मात्रा इन रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाती हैं और धीरे-धीरे गुर्दा काम करना बंद कर देता है। डायबिटिक नेफ्रोपैथी से बचने का एक ही रास्ता है, शुगर पर नियंत्रण। Image courtesy: © Getty Images

ब्रेन स्ट्रोक

ब्रेन स्ट्रोक
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टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों में ब्रेन स्ट्रोक का खतरा काफी बढ़ जाता है। मस्तिष्क की लाखों कोशिकाओं की जरूरत को पूरा करने के लिए कई रक्त कोशिकाएं हृदय से मस्तिष्क तक लगातार रक्त पहुंचाती रहती हैं। जब रक्त की आपूर्ति बाधित हो जाती है, तब मस्तिष्क की कोशिकाएं मृत होने लगती हैं। इसका परिणाम होता है दिमागी दौरा या ब्रेन स्ट्रोक। यह मस्तिष्क में ब्लड क्लॉट बनने या ब्लीडिंग होने से भी हो सकता है। Image courtesy: © Getty Images

दांतों का गिरना

दांतों का गिरना
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डायबिटीज का कनेक्शन हार्ट डिजीज, किडनी फेल्योर और स्ट्रोक से ही नहीं बल्कि दांतों से भी है। ब्लड में शुगर की उच्च मात्रा के कारण मसूड़ों तक पोषक तत्व नहीं पहुंच पाते व मसूड़ों के टीशूज से वेस्ट प्रॉडक्ट का उत्सर्जन बाधित हो जाता है। इससे मरीज पेरियोडोंटल डिजीज से पीडित हो जाता है और उसके दांत असमय टूटने लगते हैं। Image courtesy: © Getty Images

आंखों की रोशनी कम होना

आंखों की रोशनी कम होना
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मधुमेह से पीड़ित रोगियों में ‘डायबिटिक रेटीनोपेथी’ नामक बीमारी होने की संभावना बहुत ज्यादा होती है। इस बीमारी में रोगी व्यक्ति को न सिर्फ मोतिया बिंद की शिकायत हो सकती है बल्कि धीरे-धीरे उसकी आंखों की रोशनी भी कम होती जाती है और एक समय ऐसा भी आ सकता है जब उसकी आंखों की रोशनी पूरी तरह से समाप्त हो जाए यानी व्यक्ति नेत्रहीन हो जाए।मधुमेह के रोगियों को नेत्र संबंधी इस तरह खतरों के मद्देनजर विशेषज्ञ यही सलाह देते हैं कि मधुमेह के रोगियों को समय-समय पर किसी अच्छे नेत्र विशेषज्ञ से अपनी आंखों का चेकअप कराते रहना चाहिए।Image courtesy: © Getty Images

डायबिटीज और अवसाद

डायबिटीज और अवसाद
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अवसाद अर्थात डिप्रेशन एक गंभीर मानसिक अवस्था है, जो कि मधुमेह के निदान के दौरान हो सकती है। अवसाद के चलते दुख की भावना होती है और जीवन की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। लेकिन अवसाद भी अन्य बीमारियों की ही तरह होता है और इसे भी उपचारित किया जा सकता है। उपचार अवसाद को कम और मधुमेह नियंत्रण में सुधार कर सकता है। Image courtesy: © Getty Images

कीटोएसिडोसिस

कीटोएसिडोसिस
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कीटोएसिडोसिस में इंसुलिन के साथ रक्त शर्करा के उच्च स्तर व कार्बनिक अम्ल (जिसे किटोन्स भी कहते हैं) की कमी से मरीज़ में डिहाईड्रेशन हो जाता है। कीटोएसिडोसिस में दिमाग पर भी प्रभाव हो सकता है। इसमें मरीज़ बीमार हो जाता है और उसे सिर दर्द की समस्या होती है। आमतौर पर कीटोएसिडोसिस टाइप1 मधुमेह रोगियों में पाया जाता है, हालांकि यह किसी भी मधुमेह रोगी में विकसित हो सकता है। Image courtesy: © Getty Images

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