पुरुषों को इस उम्र के बाद जरूर करा लेनी चाहिए ये 9 जाचें, जानें क्‍यों

By:Atul Modi, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jan 31, 2018
अच्छी सेहत के लिए जरूरी है कि बीमारी को समय रहते पकड़ लिया जाए। इसके लिए सही समय पर जांच करवानी जरूरी है। आइए जानते हैं कुछ ऐसी स्वास्थ्य जांच जिन्हें हर पुरुष को अवश्य करवाना चाहिये।
  • 1

    सही जांच रखे सेहत का खयाल

    सेहतमंद रहने के लिए जरूरी है कि आप समय पर अपनी सेहत की जांच करवाते रहें। सही समय पर की गई सही जांच अच्छे स्वास्थ्य की कुंजी है। जांच से बीमारी का समय रहते पता चल सकता है। लक्षण नजर आने से पहले ही आपको अंदाजा हो जाता है कि अमुक बीमारी से बचने के लिए आपको अमुक प्रयास करने की जरूरत होती है। इससे बीमारी का ईलाज करना भी आसान हो जाता है। डायबिटीज, कोलोन कैंसर और अन्य बीमारियों का समय रहते अगर पता चल जाए, तो पुरुष स्वयं को कई संभावित बीमारियों के खतरे से बचा सकते हैं।

    सही जांच रखे सेहत का खयाल
    Loading...
  • 2

    प्रोस्टेट कैंसर

    अमेरिकी पुरुषों में स्किन कैंसर के बाद सबसे ज्यादा कैंसर का यही रूप देखा जाता है। यह कैंसर आमतौर पर धीरे-धीरे फैलता है। लेकिन, इस कैंसर के तेजी से आक्रामक रूप में फैलने वाले रूप भी मौजूद होते हैं। स्क्रीनिंग से इस बीमारी के बारे में समय रहते पता लगाया जा सकता है। कई बार तो लक्षण सामने आने से पहले ही बीमारी का पता लग जाता है। इससे इसका अध‍िक प्रभावी तरीके से ईलाज किया जा सकता है।

    प्रोस्टेट कैंसर
  • 3

    टेस्ट‍िकुलर कैंसर

    यह असामान्य कैंसर पुरुषों के अंडकोषों में होता है। अंडकोष पुरुषों में वीर्य का निर्माण करने वाली ग्रंथ‍ि होती है। आमतौर पर यह 20 से 54 वर्ष की उम्र के पुरुषों में होता है। अमेरिकन कैंसर सोसायटी के अनुसार जब भी कोई पुरुष सामान्य जांच के लिए डॉक्टर के पास जाए तो उसे टेस्टिकुलर कैंसर की जांच करवा लेनी चाहिये। जिन पुरुषों के परिवार में इस बीमारी का इतिहास हो, उन्हें यह होने का खतरा अध‍िक होता है। ऐसे पुरुषों को अधिक गहन जांच की आवश्यकता होती है। कुछ डॉक्टर नियमित रूप से स्वत: जांच की भी सलाह देते हैं। इसके लिए अंडकोषों को छूकर यह पता लगाने का प्रयास किया जाता है कि कहीं इसमें गांठ तो नहीं। या फिर इसके आकार और स्वरूप में किसी प्रकार का बदलाव तो नहीं।

    टेस्ट‍िकुलर कैंसर
  • 4

    कोलोरेक्टल कैंसर

    कोलोरेक्टल कैंसर, कैंसर से होने वाली मौतों की दूसरी सबसे बड़ी वजह होता है। पुरुषों में यह कैंसर होने का खतरा महिलाओं की अपेक्षा थोड़ा ज्यादा होता है। यह कैंसर धीरे-धीरे पेट के अंदर ही फैलता रहता है। कैंसर विकसित होने के बाद शरीर के अन्य अंगों को भी अपनी चपेट में ले लेता है। कोलन कैंसर से बचने का तरीका यही है कि पॉलिप्स को कैंसर कोशिकाओं के प्रभाव में आने से पहले ही हटा दिया जाए।

    कोलोरेक्टल कैंसर
  • 5

    स्किन कैंसर

    त्वचा कैंसर का सबसे खतरनाक रूप है मेलानोमा। यह मेलानोसिटस नाम की खास कोश‍िका से शुरू होता है। यह कोश‍िका त्वचा को रंगत प्रदान करने के लिए उत्तरदायी होती है। बुजुर्ग पुरुषों में समान आयु की महिलाओं की अपेक्षा मेलानोमा होने का खतरा दोगुना होता है। पुरुषों में महिलाओं की अपेक्षा नॉन-मेलानोमा बेसल सेल और स्कूमॉस सेल स्किन कैंसर होने का खतरा दो से तीन गुना अध‍िक होता है। सनबर्न और सूरज की रोशनी में अध‍िक समय बिताने से यह बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। अगर आपकी त्वचा में किसी भी प्रकार का बदलाव, भले ही वह आकार, स्वरूप या रंगत में हो, नजर आए तो फौरन इसकी जांच करवायें। नियमित शारीरिक जांच प्रक्रिया में भी इसे शामिल करें। अगर इस बीमारी का समय रहते पता चल जाए, तो ईलाज अध‍िक प्रभावी साबित होता है।

    स्किन कैंसर
  • 6

    उच्च रक्तचाप

    उम्र के साथ-साथ उच्च रक्तचाप का खतरा बढ़ता जाता है। रक्तचाप वजन और जीवनशैली पर भी निर्भर करता है। उच्च रक्तचाप बिना किसी पूर्व लक्षण के लिए कई बीमारियों का कारण हो सकता है। इनमें एनूरिज्म भी शामिल है। इसमें हृदय को रक्त पहुंचाने वाली मुख्य धमनी खतरनाक रूप से फूल जाती है। लेकिन, इसका ईलाज संभव है। उच्च रक्तचाप का ईलाज हृदय रोग, स्ट्रोक और किडनी रोग का खतरा भी कम करता है। सामान्य रक्तचाप 120/80 होता है। उच्च रक्तचाप 140/90 या उससे ऊपर होता है। और इन दोनों के बीच के अंक को प्रीहायपरटेंशन कहा जाता है, जो रक्तचाप का एक मुख्य कारण है। रक्तचाप की जांच, रक्तचाप और अन्य जोख‍िम कारकों पर निर्भर करते हैं।

    उच्च रक्तचाप
  • 7

    कोलेस्ट्रॉल का स्तर

    फास्ट‍िंग लिपिड पैनल के जरिये रक्त में गुड और बैड कोलेस्ट्रॉल के स्तर की जांच करता है। गुड कोलेस्ट्रॉल को एचडीएल और बुरे कोलेस्ट्रॉल को एचडीएल कहा जाता है। कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में रक्त में वसा की मात्रा सबसे अध‍िक उत्तरदायी होती है। कोलेस्ट्रॉल का स्तर ही हृदय रोग, स्ट्रोक और डायबिटीज के संभावित खतरे के बारे में बताता है। अगर किसी पुरुष को हृदय रोग होने का अध‍िक खतरा हो, तो उसे 20 वर्ष की आयु  में ही कोलेस्ट्रॉल की जांच आरंभ कर देनी चाहिये। और 35 वर्ष की आयु के बाद सभी पुरुषों को कोलेस्ट्रॉल की जांच अवश्य करवानी चाहिये।

    कोलेस्ट्रॉल का स्तर
  • 8

    टाइप 2 डायबिटीज

    अनियंत्रित डायबिटीज से हृदय रोग, स्ट्रोक और किडनी की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। डायबिटीज से रेटिना की नसों को नुकसान होता है, जिससे व्‍यक्ति अंधा भी हो सकता है। डायबिटीज नसों को नुकसान पहुंचाकर नपुसंकता का भी कारण हो सकती है। यह सब रुक सकता है, अगर इस बीमारी का समय रहते पता लगा लिया जाए। आहार, व्यायाम, वजन कम करके और दवाओं के जरिये डायबिटीज को नियंत्रित किया जा सकता है। डायबिटीज में खाली पेट और भोजन के बाद दोनों समय रक्त में शर्करा की जांच की जाती है। स्वस्थ पुरुषों को 45 वर्ष की आयु के बाद हर वर्ष इसकी जांच करवानी चाहिये। अगर आपको कोलेस्ट्रॉल या रक्तचाप जैसी अन्य बीमारियां हैं, तो आपको और जल्दी व नियमित इसकी जांच अवश्य करवानी चाहिये।

    टाइप 2 डायबिटीज
  • 9

    ह्यूमन इम्यूनोडिफिशयंसी (HIV)

    एचआईवी वायरस के कारण ही एड्स की समस्या होती है। हालांकि इस बीमारी के लक्षण कई बार नजर नहीं भी आते, फिर भी यह रक्त और शरीर के अन्य अंगों को प्रभावित करती रहती है। यह एक व्यक्त‍ि से दूसरे में असुरक्षित यौन संबंध, संक्रिमत रक्त चढ़ाने और दूषित सुई के इस्तेमाल से फैलता है। यह रोग यौनिक, गुदा, मुख, आंखों और यहां तक कि त्वचा के क्षरण से होने वाले स्राव से भी हो सकता है। इस रोग का कोई इलाज अथवा दवा नहीं है। मौजूदा चिकित्सा पद्धतियां एचआईवी को एड्स के चरण तक पहुंचने से रोक सकती हैं, लेकिन इनके बेहद गंभीर दुष्प्रभाव भी होते हैं।

    ह्यूमन इम्यूनोडिफिशयंसी  (HIV)
  • 10

    ग्लूकोमा

    आंखों की श्रृंखलागत बीमारी ऑप्टिव नसों को नुकसान पहुंचाती हैं और धीरे-धीरे अंधेपन का कारण बनती है। इस बीमारी से नजरों को काफी नुकसान होता है। जब तक व्यक्ति को इस बीमारी के बारे में पता चलता है, तब तक उसकी आंखों की रोशनी खत्म हो चुकी होती है। जांच में आंखों में तेज प्रेशर डाला जाता है। इसके जरिये कोश‍िश की जाती है कि ऑप्टिव नसों के डैमेज होने से पहले ही इस बीमारी को रोक लिया जाए। चालीस वर्ष से कम आयु के पुरुषों को हर दो वर्ष में इसकी जांच करवानी चाहिये। चालीस से 54 के बीच में एक से तीन वर्ष के बीच में। 55-64 के बीच में एक से दो वर्ष में और 65 की आयु के बाद साल में एक दो बार इसकी जांच जरूर करवानी चाहिये। खतरा बढ़ने से पहले ही बीमारी को पकड़ लेना इसके दुष्प्रभावों को कम कर देता है।

    ग्लूकोमा
Load More
X
संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK