बच्‍चों की देखभाल से संबंधित 4 मिथ को जानें

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Nov 10, 2015
कई बार हम बच्‍चों की देखभाल से जुड़े मिथ के अनुसार उनकी देखभाल करने लगते हैं लेकिन यह मिथ बच्‍चों के लिए नुकसानदेह हो सकते है, आइए जानें बच्‍चों की देखभाल से जुडें कुछ मिथ के बारे में।
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    बच्‍चे की देखभाल से जुड़े मिथ

    नन्‍हें मुन्‍ने का जन्‍म परिवार की सबसे बड़ी खुशी होती है और परिवार का लगभग हर सदस्‍य उसकी देखभाल में जुट जाता है। और तो और दोस्‍त और अन्‍य रिश्‍तेदार की तरफ से भी बच्‍चे की देखभाल से जुड़े उपायों की झड़ी सी लग जाती है। लेकिन कई बार जानकारी के अभाव में पेरेंट्स बच्‍चों की देखभाल ठीक से नहीं कर पाते और लोगों के सुनें मिथ के अनुसार बच्‍चों की देखभाल करने लगते हैं, जो बच्‍चों के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं। जी हां बच्‍चों की देखभाल से जुड़े कई मिथ है, आइए ऐसे ही कुछ मिथ के बारे में जानकारी लेते हैं।

    बच्‍चे की देखभाल से जुड़े मिथ
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    दांत निकलने पर बुखार होना

    ये बात आपने सुनी होगी कि जब छोटे बच्चों के दांत निकलने शुरू होते हैं तो अक्‍सर उन्हें बुखार आ जाता है। ये सच है कि दांत निकलने के समय बच्चों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होती है, लेकिन बरसों पुरानी धारणाओं को आम बात मानकर तसल्ली कर लेना ठीक नहीं है। बच्‍चे को बुखार होने पर तुरंत उसे डॉक्‍टर को दिखाना चाहिए।

    दांत निकलने पर बुखार होना
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    बच्‍चे की सुरक्षा के लिए वॉकर

    जब बच्‍चा चलना सीखता है तो उसकी सुरक्षा के लिए पैरेंट्स उसे वॉकर लाकर देते हैं। लेकिन वॉकर में बच्‍च पूरी तरह से सुरक्षित नहीं होता, इसलिए अपने बच्‍चे को वॉकर में कभी भी अकेला न छोड़ें, इससे उसे चोट लग सकती है।

    बच्‍चे की सुरक्षा के लिए वॉकर
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    कान में इंफेक्‍शन की दवा है ब्रेस्‍ट मिल्‍क

    कई लोग बच्‍चे के कान के इंफेक्‍शन के लिए ब्रेस्‍ट मिल्‍क को बेस्‍ट मानते हैं। लेकिन यह बच्‍चों की देखभाल से जुड़ा सबसे बड़ा मिथ है। इंफेक्‍शन होने पर ब्रेस्‍ट मिल्‍क डालने से आराम नहीं मिलता, बल्कि कान में और भयानक इंफेक्‍शन हो सकता है।

    कान में इंफेक्‍शन की दवा है ब्रेस्‍ट मिल्‍क
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    दवाई का आधा हिस्‍सा दें

    बच्‍चों के बीमार होने पर आराम पाने के लिए अक्‍सर लोग बड़ों की आधी दवा देने की सलाह देते है। लेकिन यह सही नहीं है, क्‍योंकि बच्‍चों और बड़ों की दवाई में बहुत अंतर होता है और बड़ों की दवा देने से बच्‍चों को सांस की तकलीफ, पेट में दर्द जैसी समस्‍या हो सकती है।

    Image Source : Getty

    दवाई का आधा हिस्‍सा दें
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