ये 5 औषधीय तेल साइनस से दिलाएंगे छुटकारा, दर्द को तुरंत करते हैं कंट्रोल

By:Atul Modi, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Oct 07, 2018
साइनस संक्रमण से बचने के लिए वैकल्पिक तरीके बहुत ही कारगर होते हैं, इस संक्रमण से बचने के लिए अरोमाथेरेपी बेहतर विकल्‍प है, लेकिन अरोमाथेरेपी के दौरान किन तेलों का प्रयोग करना चाहिए इसके बारे में भी जानना जरूरी है।
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    आवश्‍यक तेलों से दूर करें साइनस संक्रमण

    हमारी नाक के आसपास कुछ छिद्र होते हैं, जिन्हें साइनस कहा जाता है। इनमें होने वाले संक्रमण को साइनोसाइटिस या साइनस कहा जाता है। जब साइनस का संक्रमण होता है तो इसके लक्षण आंखों और माथे पर महसूस होते हैं। आगे झुकने और लेटने से सिरदर्द की समस्‍या बढ़ जाती है। सर्दी के मौसम में नाक बंद होना, सिर में दर्द होना, अधकपारी, नाक से पानी गिरना आदि, इसके प्रमुख लक्षण हैं। इसमें रोगी को हल्का बुखार, आंखों में पलकों के ऊपर या दोनों किनारों पर दर्द रहता है। लेकिन साइनस से बचने के लिए अगर आप वैकल्पिक उपायों की खोज कर रहे हैं तो अरोमाथेरेपी को अपना सकते हैं। अरोमाथेरेपी में कुछ आवश्‍यक तेलों का इस्‍तेमाल करके साइनस संक्रमण के लक्षणों को कम किया जा सकता है।

    आवश्‍यक तेलों से दूर करें साइनस संक्रमण
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    एंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर यूकेलिप्टस तेल

    यूकेलिप्टस का तेल एक प्रकार का हर्ब है जिसमें एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल तत्व पाए जाते हैं। इस तेल को गर्म पानी में डाल कर स्टीम लें। आधा कप पानी में कुछ बूंदे यूकेलिप्‍टस तेल की डालें। इस पानी को ढककर उबालें। फिर इस पानी से स्टीम लें। यह साइनस के कारण होने वाले सिरदर्द से तुरंत राहत देने वाला नुस्खा है।

    एंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर यूकेलिप्टस तेल
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    संकुचन कम करने में मददगार अणु तेल

    अणु तेल साइनसाइटिस के उपचार के लिए एक आयुर्वेद औषधी है। यह तेल संकुचन को कम करने के लिए जाना जाता है। नाक बंद हो जाने पर यह तेल काफी असरदार होता है। हालांकि शुरू में कुछ समय आप लगातार छींकेंगे और नाक भी बहेगी, पर कुछ दिन बाद सब कुछ ठीक हो जाएगा। अणु तेल एक-एक बूंद सुबह नहाने के बाद नाक में डालकर अंदर खींचने से नाक में कफ खत्म हो जाता है, नाक साफ हो जाती है।

    संकुचन कम करने में मददगार अणु तेल
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    औषधीय गुणों से भरपूर लौंग का तेल

    लौंग का तेल एंटी-इंफ्लेमेंटरी और एंटीमाइक्रोबियल गुणों के कारण यह साइनस संक्रमण के लक्षणों को कम करने में मदद करता है। लौंग के तेल का अरोमा इतना सशक्त होता है कि इसे सूंघने से जुकाम, कफ, दमा, ब्रोंकाइटिस, साइनसाइटिस आदि समस्याओं में तुरंत आराम मिल जाता है। इसलिए साइनस से संक्रमण से परेशान लोगों को लौंग के तेल का इस्‍तेमाल करना चाहिए।  

    औषधीय गुणों से भरपूर लौंग का तेल
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    एंटीसेप्टिक गुणों से भरपूर टी-ट्री ऑयल

    ज्‍यादातर आवश्‍यक तेलों में कुछ एंटीसेप्टिक गुण पाये जाते हैं लेकिन टी-ट्री ऑयल विशेष रूप से शक्तिशाली होता है। टी-ट्री ऑयल में संक्रमण को रोकने की क्षमता के कारण यह इसे संक्रमण को रोकने का सबसे अच्‍छा विकल्‍प बनाती है। टी-ट्री ऑयल के एंटीसेप्टिक गुणों को बढ़ाने के लिए इसका इस्‍तेमाल स्‍टीम के रूप में करना चाहिए। साइनस की अटैक होने पर पानी में इसकी कुछ बूंदों को डालकर स्‍टीम लेने से फायदा होता है।

    एंटीसेप्टिक गुणों से भरपूर टी-ट्री ऑयल
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    लेवेंडर ऑय के साथ खुशबू और आराम

    लैवेंडर में मौजूद एंटीहिस्टामिन, एंटी इंफ्लेमेंटरी और बहुत ही काल्मिंग गुण जलन को कम करने और श्‍वास को आराम देने में मदद करते हैं। लैवेंडर ऑयल में एक ऐसी शांत खुशबू (अरोमा) होती है जोकि इसे एक उत्कृष्ट तंत्रिका टॉनिक बनाता है। इसे इस्‍तेमाल करने के लिए लैवेंडर तेल को उबलते पानी में मिलाकर इससे भाप लें। ऐसा करने से साइनस का संक्रमण खत्म होगा और नाक की रुकावट से राहत मिल जाएगी।

    लेवेंडर ऑय के साथ खुशबू और आराम
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    पुदीने के तेल का भी करें इस्‍तेमाल

    पुदीने के तेल में विटामिन ए और सी के साथ मैंगनीज, मैग्नीशियम, कैल्शियम, फोलेट, पोटेशियम और तांबा जैसे मिनरल पाए जाते हैं। इस में ओमेगा 3 फैटी एसिड भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। सर्दियों में छाती पर जमे बलगम से राहत पाने के लिए पुदीने के तेल का उपयोग करें। पुदीने का तेल सांस संबंधित बीमारियां जैसे साइनसाइटिस, अस्थमा और ब्रोंकाइटिस में भी लाभदायक होता है। अगर साइनस के कारण आपका नाक बंद हो गया है, तो पुदीन के तेल को अपनी छाती पर मलें या पानी में डालकर इसकी भाप लें। इससे आपकी नाक तुरंत खुल जाएगी।

    पुदीने के तेल का भी करें इस्‍तेमाल
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    सबसे आम जड़ी बूटी है कैमोमाइल

    कैमोमाइल यानी बबूने का तेल एक बहुत ही आम जड़ी बूटी है। इसके इस्‍तेमाल सूजन का नेतृत्व करने वाली विभिन्न स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं का इलाज किया जाता है। ऐसा इसमें मौजूद मजबूत एंटी-इफ्लेमेंटरी गुणों के कारण होता है। कैमोमाइल में बीसाबोलल भी शामिल होता है। बीसाबोलल साइनस के कारण होने वाले संक्रमण और सूजन से तुरंत राहत प्रदान करता है। बीसाबोलल में मजबूत एंटी-इफ्लेमेंटरी तत्‍व के कारण, कैमोमाइल साइटिका के इलाज के लिए सबसे अच्‍छी जड़ी बूटी माना जांता है। इसके अलावा इससे अनिद्रा और व्याकुलता से भी राहत मिलती है।

    सबसे आम जड़ी बूटी है कैमोमाइल
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