वर्कआउट शुरू करने से पहले मन में आती हैं ऐसी भावनायें

फिट रहना है तो वर्कआउट करना पड़ेगा, लेकिन क्‍या आप जानते हैं वर्कआउट शुरू करने से पहले आपके मन में किस तरह की भावनायें आती हैं, आइए हम आपको बता रहे हैं।

Devendra Tiwari
Written by:Devendra Tiwari Published at: Oct 01, 2015

वर्कआउट और भावनायें

वर्कआउट और भावनायें
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अगर आप ये सोच रहे हैं कि वर्कआउट और भावनाओं का क्या लेना-देना तो हम आपको इसके बारे में कुछ दिलचस्प बातें बताने जा रहे हैं। दरअसल सभी एथलीट तो होते नहीं, इसलिए जाहिर सी बात है फिटनेस के लिए हजारों रुपये खर्च करना और कई घंटे व्यायाम के लिए देना सभी के बस की बात नहीं। लेकिन अपने पसंदीदा अभिनेता या फिर एथलीट की फिटनेस देखने के बाद मन में ये ख्याल आता है कि उनकी बॉडी भी ऐसी हो। इसी ख्याल के साथ वे निकल पड़ते हैं वर्कआउट के लिए, लेकिन जैसा कि मानव मन बहुत चंचल होता है उसके मन में कुछ भावनायें व्यायाम के पहले ही उमड़ने लगती हैं उनके बारे में हम आपको आज बताने जा रहे हैं।

फिट होना बहुत बड़ी बात नहीं

फिट होना बहुत बड़ी बात नहीं
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‘अब तो मैं भी स्टार बन जाउंगा’, ‘मेरी बॉडी भी फिट हो जायेगी’, ‘अब मुझे कोई अदरक नहीं बोलेगा’, आदि ख्याल मन में आते हैं और लगता है कि फिट होना बहुत बड़ी बात नहीं है यह छोटी बात है और जल्दी ही मेरा शरीर भी अभिनेताओं की तरह दिखने लगेगा। लेकिन सभी जानते हैं कि सच्चाई कुछ और है, फिट होना किसी खेत की मूली नहीं है। इसके लिए बहुत पसीना बहाना पड़ता है।

उपकरण पहले एब्स बाद में

उपकरण पहले एब्स बाद में
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‘ओह, ये क्या मैं वर्कआउट करने जा रहा हूं और मेरे पास वर्कआउट टूल्स नहीं है, ऐसा कैसे हो सकता है, पहले उपकरण होना चाहिए एब्स तो बाद में बन जायेंगे।‘ ऐसा ख्‍याल वर्कआउट से पहले आता है और लोग निकल पड़ते हैं अच्छे से अच्छा टूल्स लेने के लिए। इसके लिए एक अच्छा जूता, ट्रैक सूट, ग्लब्स’ आदि लेकर व्यायाम की तैयारी शुरू कर देते हैं। उपकरण लेने के बाद वे मन में ही आश्वस्त हो जाते हैं कि अब सिक्स एब्स पैक बनाना कोई बड़ी बात नहीं, वह तो बायें हाथ का काम है।

चल बेटा सेल्फी ले ले रे

चल बेटा सेल्फी ले ले रे
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यहां हम सलमान खान की फिल्म ‘बजरंगी भाईजान’ की चर्चा नहीं करने वाले बल्कि हमारे मन में उमड़ने वाली भावनाओं की बात कर रहे हैं और यह आज की युवा पीढ़ी में प्रचलित चलन है। आजकल के युवा किसी चीज की शुरूआत पूजा-अर्चना से नहीं बल्कि सेल्फी लेकर करते हैं। तो जाहिर सी बात है आप वर्कआउट शुरू कर रहे हैं तो एक सेल्फी तो बनती ही है ना।

असर महसूस होने लगा

असर महसूस होने लगा
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बचपन से ही हमें सिखाया जाता है कि आशावादी होना चाहिए, लेकिन ख्याली पुलाव नहीं पकाना चाहिए। लेकिन आजकल बात कुछ और ही है, लो ख्याली पुलाव पहले पकाते हैं और उसका एहसास भी करने लगते हैं। भले ही आपने जिम के अंदर पैर रखा हो, लेकिन आपको ऐसा एहसास होगा कि आप फिट हो गये और अब आपके जैसा फिट कोई नहीं। यानी वर्कआउट शुरू करने से पहले ही आपके अंदर इसका एहसास होने लगता है।

अब इसमें अधिक मजा नहीं रहा

अब इसमें अधिक मजा नहीं रहा
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ये ख्याल आपके मन में वर्कआउट शुरू करने के अगले ही दिन होने लगता है। क्यों कि व्यायाम शुरू करने के पहले ही दिन आप जोश में इतना अधिक व्यायाम करते हैं कि अगले दिन पूरे शरीर में दर्द होना स्वाभाविक है। जब अगले दिन आप उठते हैं तो आपका पूरा जोश खत्म हो चुका होता है और आपके मन में ये ख्याल आता है कि अब इसमें कोई मजा नहीं रहा। अगर आप फिटनेस चाहते हैं तो मन में एक्सरसाइज न करें, घर से बाहर निकलें थोड़ा वक्त दें और खानपान पर भी ध्यान दें। बिना मेहनत के फिटनेस नहीं मिल सकती है। All Images - Getty

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