हर बात पर शिकायत की आदत हो सकती है इन मानसिक समस्याओं का संकेत, डॉक्टर से जानें इससे बचने के 9 उपाय

हमेशा शिकायत करने से आपके मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है। शिकायती व्यवहार से निकलने के लिए आप कई तरीके अपना सकते हैं।

Meena Prajapati
Written by: Meena PrajapatiPublished at: Jul 23, 2021

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अक्सर ऑफिस, रिश्तेदार, सर्विस प्रोवाइडर की शिकायत रहना आपकी मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालता है। माइंडफुल टीएमएस जीके2 क्लीनिक्ल साइकलोजिस्ट डॉ. प्रज्ञा मलिक कहना है कि शिकायत करना तब तक नॉर्मल है जब तक उससे आपके मानसिक और स्वास्थ्य पर असर नहीं पड़ता, लेकिन वे लोग जो हमेशा शिकायत करते रहते हैं, उसे कंप्लेनिंग बिहेवियर कहा जाता है। ऐसे लोग शर्म, अपराधी, निराशा, हेल्पलेसनेस, हमेशा उदास रहने का भाव आदि परेशानियों के साथ सुमैटोसाइटिक डिसऑर्डर, अवसाद जैसी गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं। इस व्यवहार से निकलने के लिए मनोवैज्ञानिक ने 9 तरीके बताएं हैं, जिनकी मदद से आप बाहर निकल सकते हैं। 

परेशानी को पहचानें और सकारात्मक सोचें

परेशानी को पहचानें और सकारात्मक सोचें
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हमेशा शिकायत करने से आपकी अपनी ऊर्जा नकारात्मक विचारों में बदल जाती है। यह नेगेटिव ऊर्जा आपका शारीरिक और मानसिक परेशानियां होने लगती हैं। आपकी जो परेशानी है, उसे समझें और उस समस्या का हल निकालें। शिकायत करने से बेहतर है उस परेशानी का हल खुद से ढूढें। ताकि आप खुद को समझ पाएं।

जिम्मेदार बनें

जिम्मेदार बनें
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हमेशा शिकायत करने का व्यवहार दर्शाता है कि आप निर्णय लेने में कमजोर हैं। खुद की परेशानियों खुद नहीं समझ पाते हैं। यही वजह है कि आप अपनी परेशानियां दूसरों पर थोप देते हैं। अपनी गलतियों के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहराते हैं। इस तरह के एटिट्यूट से निकलने का एक ही तरीका है कि आप खुद को जिम्मेदार इंसान बनाएं। ताकि आप दूसरों की शिकायत करने के व्यवहार से ऊपर उठ सकें। 

मुखर बनें

मुखर बनें
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अपनी परेशानियों को हमेसा छुपा कर न रखें। अगर आपको किसी व्यक्ति से कोई परेशानी है तो सीधे उससे बात करें। ताकि आपके भीतर कोई बात घुलती न रहे। कोई परेशानी अगर आपके भीतर घुलेगी तो उससे तनाव, चिंता, बुखार जैसी परेशानियां बढ़ेंगी। इसलिए जिससे जो शिकायत है, उसे तुरंत बता दें। ताकि मिसकम्युनिकेशन भी न हो।

शिकायत की वजह जानें

शिकायत की वजह जानें
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बहुत बार हम दूसरों को करने के चक्कर में यह नहीं जान पाते कि हमारी अपनी कितनी गलती है। हमें सिर्फ दूसरे की परेशानी दिखती है। इस वजह से परिवार हो या समाज रिश्ते खराब होने लगते हैं। इस तरह की आदत कहीं भी व्यक्ति को विश्वासी नहीं बना पाती है। ऐसे में जरूरी है कि आप चिंता, तनाव में जाएं, उससे पहले यह जानने की कोशिश करें कि आपकी परेशानी की वजह क्या है। 

दूसरों के बारे में सोचें

दूसरों के बारे में सोचें
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आपके शिकायत करने से उसका दूसरे पर क्या असर पड़ेगा, यह भी सोचें। क्योंकि हो सकता है कि आपके साथ किसी ने कोई गलत व्यवहार किया तो उस समय की परिस्थितियों के अनुसार उसने ऐसा किया हो। इसलिए किसी को दोषी ठहराने से पहले उसे जान लें कि उसने ऐसा क्यों किया। ऐसा करने से आप खुद में संतोष की भावना ला पाएंगे और खुद को बाकियों से मैच्योर दिखा पाएंगे।   

मेडिटेशन करें

मेडिटेशन करें
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कहते हैं मेडिटेशन में इतनी ताकत है कि इंसान के मन को फूलों का गुलदस्ता बना सकता है। मेडिटेशन खुद से संवाद की प्रक्रिया है। जिसमें आप खुद से संवाद करते हैं। खुद को बेहतर समझते हैं। इन सभी कामों से आपको निर्णय लेने में कठिनाई नहीं होती है। इस तरह आप बेहतर इंसान बन पाते हैं। 

आगे बढ़ने की सोचें

आगे बढ़ने की सोचें
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वे लोग जो हमेशा शिकायत करते रहते हैं, वे ज्यादा आगे नहीं बढ़ पाते, क्योंकि ऐसे लोग हमेशा दूसरों की शिकायत में ही एनर्जी बेस्ट कर देते हैं। उससे बेहतर हमें यह सोचना चाहिए कि परेशानियां सभी की जिंदगी में आती हैं, पर उनकी शिकायत करके उन्हें मल्टीप्लाई न करें। बल्कि उन्हें वहीं, रोकें और आगे बढ़ें। यह आगे बढ़ना आपको करियर, रिश्तेदारी सभी में आगे ले जाएगा।

नई आदतें डालें

नई आदतें डालें
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जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, इन सिचुएशन से बचने के लिए खुद को परिस्थितियों के अनुसार ढालें। कभी दुख तो कभी खुशी होती है, ऐसे में खुद को उन परिस्थितियों के अनुसार ढालें। ताकि आप किसी भी परिस्थिति में अवसाद या चिंता में न चले जाएं। नई आदतों को डालें।    

रोजाना एक्सरसाइज करें

रोजाना एक्सरसाइज करें
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मनोवैज्ञानिक प्रज्ञा मलिक का कहना है कि रोजाना एक्सरसाइज करने से गुड हार्मोन रिलीज होते हैं, जिससे आप जिंदगी में फैसले ठीक से ले पाते हैं। प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स बेहतर होते हैं।  

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