बीमारियां जिन्‍हें समझने में गलती कर देते हैं डॉक्‍टर

कई बीमारियां ऐसी होती हैं जिनके कोई विशिष्ट लक्षण नहीं होते हैं। ऐसे में डॉक्टर भी इन बीमारियों को समझने में धोखा खा जाता है। आइए जानें ऐसी ही बीमारियों के बारें में।

Anubha Tripathi
Written by: Anubha TripathiPublished at: Aug 02, 2014

बीमारियों को पहचानना क्यों मुश्किल

बीमारियों को पहचानना क्यों मुश्किल
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जब आपको अचानक ही दर्द, पाचन संबंधी समस्या या कोई ऐसी समस्या जिनके लक्षणों को पहचानना मुश्किल होता है तो आप तुरंत डॉक्टर के पास जाते हैं। लेकिन कभी-कभी डॉक्टर भी रोगी की बीमारी के लक्षणों को नहीं पहचान पाता है। कई बीमारियों के लक्षण ऐसे होते हैं जिनकी कोई विशिष्ट पहचान नहीं होती है। आइ जानें कुछ ऐसी समस्याओं के बारे में जिनकी पहचान डॉक्टरों के लिए मुश्किल हो जाती है।

अनियमित बाउल सिंड्रोम

अनियमित बाउल सिंड्रोम
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कुछ स्थितियों की पहचान करना मुश्किल हो जाता है क्योंकि उनके लिए कोई निश्चित जांच नहीं होती हैं जो उनकी पुष्टि कर सके। यह एक पुरानी स्थिति है जो आपकी बड़ी आंत को प्रभावित करती है जिससे पेट में दर्द, सूजन, ऐंठन, कब्ज और डायरिया जैसी समस्याएं होती हैं।

ल्यूपस

ल्यूपस
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ल्यूपस के लक्षण और संकेत अलग होते हैं। इसके लक्षण अचानक से सामने आते हैं। गालों और नाक पर तितली के आकार के रेशेज आना होना ल्यूपस का बड़ा लक्षण है। जोड़ों में दर्द, बुखार, सूजन भी इसके लक्षणों में से एक हैं। इसका पता लगाने का कोई एक टेस्ट नहीं बल्कि ब्लड टेस्ट, यूरीन टेस्ट आदि होते हैं।

रेमयूटाइड अर्थराइटिस

रेमयूटाइड अर्थराइटिस
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रेमयूटाइड अर्थराइटिस से असहनीय दर्द की समस्या हो सकती है। यह एक ऑटोइम्यून डिस्आर्डर है। इसकी वजह से किसी भी उम्र में जोड़ों में सूजन और  दर्द की समस्या हो सकती है। इसके शुरुआती अवस्था में इससे पहचानना मुश्किल होता है क्योंकि इसमें जोड़ों में हल्का दर्द और अकड़न रहती है जो कि कई कारणों से हो सकता है।    

मल्टीपल स्क्लेरोसिस

मल्टीपल स्क्लेरोसिस
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यह भी ऑटोइम्यून से जुड़ी एक बीमारी है। जब प्रतिरोधक क्षमता शरीर के किसी अपने नर्व सेल्स पर अटैक करती है जिससे दिमाग और शरीर के बीच होने वाले संवाद में बाधा आती है तो उसे मल्टीपल स्क्लेरोसिस कहते हैं। इसके शुरुआती लक्षणों में कमजोरी और एक या एक से अधिक अंगों में झुनझुनी सी महसूस होती है लेकिन यह हर किसी के साथ नहीं होता है। यह हर इंसान में अलग-अलग लक्षणों के साथ भी दिखायी देता है।

हाइपोथायराइडिज्म

हाइपोथायराइडिज्म
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जब थायराइड ग्रंथि हार्मोन का निर्माण करना कम कर देता है तो इससे रोगी का वजन, ऊर्जा और मूड भी प्रभावित होता है। शुरुआती अवस्था में रोगी में वजन बढ़ना, चक्कर आना, रूखी त्वचा, मांसपेशियों में दर्द आदि शामिल है। ये समस्या पुरुषों से ज्यादा महिलाओं में पायी जाती है।

डायबिटीज

डायबिटीज
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टाइप टू डायबिटीज कभी नहीं छिप सकता है। अगर आप इसे लाइलाज छोड़ दें तो यह आपके लिए जानलेवा हो सकती है। कई साल बीत जाते हैं लोगों को  पता ही नहीं चल पाता है कि उन्हें डायबिटीज है। कई लोग ऐसे हैं जिनमें ब्लड शुगर सामान्य नहीं है लेकिन वो डॉक्टर के पास नहीं जाते हैं। जब तक लोगों में इसके साइड इफेक्ट नहीं दिखते जैसे आंखों से कम दिखना या हाथ-पैरों का सुन्न होना तब तक उन्हें एहसास नहीं होता। इस समस्या से बचने के लिए बढ़ती प्यास, भूख, बार-बार यूरीन की समस्या, वजन घटना आदि पर नजर रखें।

माइग्रेन

माइग्रेन
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माइग्रेन में दिमाग में नर्व की सूजन से पैदा होती है। माइग्रेन के दर्द की पहचान कर पाना मुश्किल होता है। शुरू-शुरु में यह किसी आम सिर दर्द की तरह ही लगता है। लेकिन जब रोगी को मतली और उल्टी की समस्या महसूस होती है तो इसकी पहचान हो पाती है। कई बार माइग्रेन के कारण लोगों को लकवा भी मार सकता है।

पीसीओएस

पीसीओएस
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अनचाहे बाल, लगातार बढ़ता वजन और अनियमित पीरियड्स जैसे लक्षणों को अनदेखा न करें। यह पीसीओएस नाम की बीमारी के शुरुआती लक्षण भी हो सकते हैं। पीसीओएस तब होता है जब सेक्स हार्मोन में असंतुलन पैदा होता है। हार्मोन में जरा सा भी बदलाव मासिक धर्म चक्र पर तुरंत असर डालता है। इस स्थिति की वजह से ओवरी में छोटा अल्‍सर(सिस्‍ट) बन जाता है। अगर यह समस्या लगातार बनी रहती है तो न केवल ओवरी और प्रजनन क्षमता पर असर पड़ता है बल्कि यह आगे चल कर कैंसर का रुप भी ले लेती है।

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