टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज में क्‍या है अंतर, जानें लक्षण और बचाव

डायबिटीज (मधुमेह)या शुगर की बीमारी 2 प्रकार के होती हैं- टाइप 1 डायबिटीज और टाइप 2 डायबिटीज। जानें इन दोनों के बीच अंतर और लक्षण- कारण।

Anurag Anubhav
Written by: Anurag AnubhavPublished at: Oct 09, 2018

टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज में अंतर

टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज में अंतर
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टाइप-1 डायबिटीज एक तरह से शरीर के अपने इम्यून सिस्टम की गड़बड़ी के कारण होता है, जिसमें इम्यून सिस्टम पैंक्रियाज की उन सेल्स को नष्ट करने लगते हैं, जो इंसुलिन हार्मोन बनाती हैं। इंसुलिन ही वो हार्मोन है, जो शरीर में ब्लड शुगर को कंट्रोल रखता है। वहीं टाइप-2 डायबिटीज वो होता है, जिसमें पैंक्रियाज इंसुलिन तो बनाते हैं मगर शरीर उसका इस्तेमाल नहीं कर पाता है। इन दोनों के कारण भी व्यक्ति के शरीर में ब्लड शुगर बहुत अधिक बढ़ जाता है। टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज एक ही जैसा नहीं होता है, इन दोनों में बहुत अंतर होता है। आगे की स्‍लाइडशो में इन दोनों के बीच के अंतर को समझें।

टाइप 1 डायबिटीज क्या है?

टाइप 1 डायबिटीज क्या है?
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इस प्रकार के डायबिटीज में पैन्क्रियाज की बीटा कोशिकाएं पूरी तरह से नष्ट हो जाती हैं और इस तरह इंसु‍लिन का बनना सम्भव नहीं होता है। यह जनेटिक, ऑटो-इम्‍यून एवं कुछ वायरल संक्रमण के कारण होता है, इसके कारण ही बचपन में ही बीटा कोशिकाएं पूरी तरह से नष्ट हो जाती हैं। यह बीमारी सामान्‍यतया 12 से 25 साल से कम अवस्था में देखने को मिलती है। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय के अनुसार भारत में 1% से 2% मामलों में ही टाइप 1 डा‍यबिटीज की समस्‍या होती है।

टाइप 2 डायबिटीज क्या है?

टाइप 2 डायबिटीज क्या है?
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टाइप 2 मधुमेह से ग्रस्‍त लोगों का ब्लड शुगर का स्‍तर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है जिसको नियंत्रण करना बहुत मुश्किल होता है। इस स्थिति में पीडि़त व्यक्ति को अधिक प्यास लगती है, बार-बार मूत्र लगना और लगातार भूख लगना जैसी समस्‍यायें होती हैं। भारत में सबसे ज्यादा टाइप 2 डायबिटीज के रोगी हैं। आमतौर पर टाइप 2 डायबिटीज का खतरा गलत लाइफस्टाइल गलत खानपान के कारण बढ़ता है।

टाइप 1 डायबिटीज का खतरा किसे होता है?

टाइप 1 डायबिटीज का खतरा किसे होता है?
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डायबिटीज जेनेटिक बीमारी भी है यानी ये एक से दूसरी पीढ़ी में पहुंच सकती है। टाइप-1 डायबिटीज के ज्यादातर मामले छोटे बच्चों में देखे जाते हैं। टाइप 1 मधुमेह बीमारी आमतौर पर 6 से 18 साल की अवस्था में बच्चों में ही देखने को मिलती है। यानी यह ऐसी बीमारी है जो बच्‍चों में होती है। हालांकि मधुमेह के इस प्रकार से ग्रस्‍त लोगों की संख्‍या बहुत कम है। लेकिन अगर किसी बच्चे में जन्म से डायबिटीज के संकेत हैं तो और इसे सही तरीके से कंट्रोल किया जाए, तो इस बीमारी के साथ भी स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है।

टाइप 2 डायबिटीज का खतरा किसे होता है?

टाइप 2 डायबिटीज का खतरा किसे होता है?
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वर्तमान में व्यायाम के अभाव और फास्ट फूड के अधिक सेवन के कारण बच्चों में भी टाइप 2 डायबिटीज होने लगी है। 15 साल के नीचे के लोग, खासकर 12 या 13 साल के बच्चों में यह दिखाई दे रही है। पुरुषों के मुकाबले यह महिलाओं में अधिक हो रही है। यह बीमारी उन लोगों को अधिक होती है जिनका वजन अधिक होता है, सामान्‍यतया बीएमआई 30 से ज्यादा के लोगों में यह अधिक होती है। आनुवांशिक कारणों से भी यह हो सकता है।

टाइप 1 डायबिटीज के लक्षण

टाइप 1 डायबिटीज के लक्षण
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टाइप 1 डायबिटीज में शुगर की मात्रा बढ़ने से मरीज को बार-बार पेशाब आता है, शरीर से अधिक तरल पदार्थ निकलने के कारण रोगी को को बहुत प्यास लगती है। इसके कारण शरीर में पानी की कमी भी हो जाती है, रोगी कमजोरी महसूस करने लगता है, इसके अलावा दिल की धड़कन भी बहुत बढ़ जाती है। ऐसे लोगों को चोट लगने पर घाव भरने में ज्यादा समय लगता है और इन्हें हाथों में झुनझुनी, कंपकंपी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

टाइप 2 डायबिटीज के लक्षण

टाइप 2 डायबिटीज के लक्षण
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टाइप-2 डायबिटीज के कारण शरीर में ब्‍लड शुगर का स्‍तर बढ़ने से थकान, कम दिखना और सिर दर्द जैसी समस्‍या होती है। चूंकि शरीर से तरल पदार्थ अधिक मात्रा में निकलता है इसकी वजह से रोगी को अधिक प्‍यास लगती है। कोई चोट या घाव लगने पर वह जल्‍दी ठीक नहीं होता है। डायबिटिज के लगातार अधिक बने रहने का प्रभाव आंखों की रोशनी पर पड़ता है, इसके कारण डायबिटिक रेटिनोपैथी नामक बीमारी हो जाती है जिससे आंखों की रोशनी में कमी हो जाती है।

डायबिटीज से बचाव के उपाय

डायबिटीज से बचाव के उपाय
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आमतौर पर अगर शुरुआती अवस्था में डायबिटीज का पता चल जाए, तो इसे लाइफस्टाइल में थोड़े बहुत बदलाव करके कंट्रोल किया जा सकतता है। वहीं डायबटिटीज के कारण ज्यादा समस्या होने पर रोकथाम के लिए इंसुलिन दिया जाता है। इंसुलिन एक तरह का हॉर्मोन जो हमारे शरीर के लिए बहुत उपयोगी है। इंसुलिन के जरिए ही रक्त कोशिकाओं को शुगर मिलती है, यानी इंसुलिन शरीर के अन्य भागों में शुगर पहुंचाने का काम करता है। इंसुलिन द्वारा पहुंचाई गई शुगर से ही कोशिकाओं को ऊर्जा मिलती है।

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