रोजमर्रा के प्रयोग की इन चीजों से हो सकता है कैंसर

ऐसे बहुत से अनजान कारण हैं, जो हमें धीरे-धीरे कैंसर की ओर ढकेल रहे हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए आज हम आपको कुछ ऐसी अनजान चीजों के बारे में बताएंगे जिनसे कैंसर का खतरा बना रहता हैं।

Pooja Sinha
Written by:Pooja SinhaPublished at: Dec 31, 2015

कहीं आप भी तो नहीं है कैंसर के शिकार

कहीं आप भी तो नहीं है कैंसर के शिकार
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कैंसर को सभी बीमारियों में सब से ज्यादा खतरनाक बीमारी माना जाता हैं। आज के समय में कैसर से मरने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है। दुनिया भर में लगभग 7.6 मिलियन लोग कैंसर से अपनी जान गवां चुके हैं। कैंसर का यदि पहली स्टेज में हो जाए तो बचने के चांस रहते हैं, वर्ना बहुत मुश्किलें पैदा हो जाती हैं। कैंसर होने की संभावना को खत्म करना, कैंसर से लड़ने का बेहतर इलाज है। लेकिन ऐसे बहुत से अनजान कारण हैं, जो हमें धीरे-धीरे कैंसर की ओर ढकेल रहे हैं। आइए ऐसी ही कुछ कारणों की जानकारी इस स्‍लाइड शो के माध्‍यम से लेते हैं।

खतरनाक डीजल का धुआं

खतरनाक डीजल का धुआं
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डीजल से चलने वाली गाड़ियां में कारसीनोजेन होता है, जो सांस के रास्ते हमारे शरीर में जाकर कैंसर का कारण बनता है। डीजल की कारें पेट्रोल की कारों के मुकाबले में 7.5 गुना ज्यादा पार्टिकुलेट मैटर छोड़ती हैं। इसके साथ ही डीजल की कारें ज्यादा जहरीली नाइट्रोजन ऑक्साइड गैस छोड़ती है, इसलिए डीजल की कारों से निकले वाले धुएं से कैंसर का खतरा ज्यादा होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की संस्था इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (आईएआरसी) के विशेषक्षों का भी यही कहना है कि डीजल के वाहनों से निकलने वाले धुएं से कैंसर होता है। इसके साथ ही चिमनियों से निकलने वाला धुंआ और अगर घर के अंदर कोयला जलाकर प्रयोग किया जा रहा है तो उससे निकलने वाला धुंआ भी खतरनाक हो सकता है।

पैसिव स्मोकिंग भी है दोषी

पैसिव स्मोकिंग भी है दोषी
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अगर आप सिगरेट नहीं भी पीते हैं तो भी आप इसके खतरे से बचे नहीं हैं। जीं हां पैसिव स्मोकिंग फेफड़ों के कैंसर का कारण बनता है। दुनिया में ऐसे कई लोग हैं जो बिना सिगरेट पिये ही उसके धुएं से शिकार हो रहे हैं। पैसिव स्मोकिंग को सेकेंड हैंड स्मोकिंग भी कहते हैं। अगर आपको लगता है कि आपके बगल में बैठा आपका दोस्त सिगरेट फूंक रहा है तो इससे आपके स्वास्थ्य पर कोई फर्क नहीं पडे़गा, तो आपका ऐसा सोचना बिल्‍कुल गलत है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि हर साल पैसिव स्मोकिंग से 6 लाख लोग मर रहे हैं जिसमें से लगभग साढ़े 21 हजार लोग फेफड़े के कैंसर से मरते हैं।

पानी में आर्सेनिक के लेवल से कैंसर

पानी में आर्सेनिक के लेवल से कैंसर
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पीने के पानी में आर्सेनिक के लेवल का बढ़ना भी कैंसर का कारण बन सकता है। जमीन के नीचे मौजूद पानी में आर्सेनिक का स्तर कई देशों में बढ़ा हुआ है। देश के कई भागों में आर्सेनिक युक्त जल पीने के कारण लोग कैंसर की चपेट में आ रहे हैं। पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश तथा बिहार के अनेक गांवों में भूजल में आर्सेनिक तत्व पाए जाने की पुष्टि वैज्ञानिकों ने की है। आर्सेनिक एक ऐसा विषैला तत्व है, जिसका अधिक मात्रा में सेवन किया जाए तो यह कैंसर उत्पन्न कर देता है।

फैशनेबल टैटू के रंग भी है खतरनाक

फैशनेबल टैटू के रंग भी है खतरनाक
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क्‍या आप जानते हैं कि फैशन के लिए बनवाये जाने वाले टैटू में इस्‍तेमाल होने वाली इंक कैंसर का भी कारण बन सकती है। हाल में अमेरिका में हुई एक रिसर्च के मुताबिक टैटू बनाने में शरीर पर इस्तेमाल हुई इंक का दो तिहाई हिस्सा ही त्वचा में रहता है बाकी शरीर में घुल जाता है। शरीर में घुल चुका यह रंग ब्‍लड, लसिका तंत्र और अन्य अंगों तक भी जाता है। जब टैटू सूरज की रोशनी में आता है तो ये रंग त्वचा के लिए जहरीले और कैंसर पैदा करने वाले साबित होता है। हरे और नीले रंग बनाने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल में अक्सर निकेल और कॉपर तत्व होते हैं। भूरे रंग के लिए आयरन ऑक्साइड का इस्तेमाल होता है, उसमें भी निकल होता है। निकल से त्वचा को भारी नुकसान पहुंच सकता है। काला रंग बनाने में कार्बन ब्लैक का इस्तेमाल होता है जो कि कच्चा तेल या रबर को जलाकर मिलता है। इससे कैंसर हो सकता है। Image Source : Getty

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