बच्‍चों को बनाना है बुद्धिमान, तो रोजाना कराएं ये 5 योगासन

By:Atul Modi, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Apr 12, 2017
हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्‍चा होनहार और बुद्धिमान बने, उनका बेटा या बेटी हर प्रतिस्‍पर्धा में अव्‍वल रहे। मगर ऐसा बहुत कम हो पाता है, क्‍यों कि जिस प्रकार की परवरिश बच्‍चों को मिलनी चाहिए वह उन्‍हें नहीं मिल पाती है। ऐसे में बच्‍चे सेहत और जीवन के हर मोड़ पर पीछे रह जाते हैं। आज हम आपको 5 ऐसे योगासन के बारे में बता रहे हैं जिन्‍हें रोजाना करने से आपके बच्‍चे बुद्धिमान बनेंगे साथ ही वह शारीरिक रूप से स्‍वस्‍थ और क्रियाशील रहेंगे।
  • 1

    ॐ का उच्चारण

    ॐ का उच्‍चारण करने से मस्तिष्क में रक्तसंचार बढ़ जाता है। उनमें ध्यान लगाने की शक्ति का विकास होता है। इसे करने के लिए सुखासन में बैठ जाएं। हाथों को ज्ञानमुद्रा में रखें या फिर दोनों हथेलियों को प्रार्थना की मुद्रा में जोड़ें। लंबी सांस लेकर ॐ का उच्चारण करते हुए सांस छोड़ें। 3-5 बार दोहराएं।

    ॐ का उच्चारण
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  • 2

    ब्राह्मरी

    ब्राह्मरी आसन ग़ुस्से और थकान के कारण होने वाले तनाव को कम करता है, वोकल कॉर्ड्स को मज़बूत बनाता है, नींद की कमी को दूर भगाता है और बॉडी टिश्यूज़ को हील करने की प्रक्रिया को तेज़ करता है। इसे करने के लिए सुखासन में बैठें। आंखें बंद करके सांस लें और कानों में उंगली डालकर हम्मम की आवाज़ से सांस छोड़ें।

    ब्राह्मरी
  • 3

    भुजंगासन

    इस आसन से हाथ की मांसपेशियां मज़बूत होती हैं, जिससे बच्चों को लेखन में काफ़ी मदद मिलती है। बच्चों की रीढ़ की हड्डी और पीठ भी मज़बूत बनती है। साथ ही यह आसन पाचनक्रिया को बेहतर बनाकर फेफड़ों को मज़बूत बनाता है। इसे करने के लिए पेट के बल सीधे लेट जाएं। दोनों हथेलियों को सीने के पास रखें। सांस लेकर सिर, कंधे और सीने ऊपर की ओर उठाएं। सांस छोड़ते हुए सिर को नीचे लाएं और थोड़ी देर रिलैक्स करें।

    भुजंगासन
  • 4

    त्रिकोणासन

    यह बॉडी स्ट्रेचिंग के लिए बहुत अच्छा आसन है। इससे हाथ, पैर, कूल्हे, रीढ़ की हड्डी, सीना आदि मज़बूत होते हैं। यह नर्वस सिस्टम को बेहतर बनाता है। सीधे खड़े होकर सांस अंदर लें। दोनों पैरों के बीच दूरी बनाते हुए सांस छोड़ें। दोनों हाथों को ऊपर उठाकर बाईं ओर झुकें। दाएं हाथ से बाएं पैर को छुएं और बाईं हथेली की ओर देखें। थोड़ी देर इसी अवस्था में रहें, फिर पहलेवाली स्थिति में आ जाएं। यही क्रिया दाईं ओर भी दोहराएं।

    त्रिकोणासन
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