बचपन में कहानी सुनने वाले बच्चे होते हैं बुद्धिमान!

एक शोध के अनुसार बच्चों को बचपन में कहानियां सुनाना जरूरी होता है। क्योंकि ऐसे बच्चे अपेक्षाकृत अधिक बुद्धिमान होते हैं।

Rashmi Upadhyay
Written by: Rashmi UpadhyayPublished at: Feb 28, 2017

कहानियां सुनाना है जरूरी

कहानियां सुनाना है जरूरी
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बचपन हमारे जीवन की पहली सीढ़ी होती है। बचपन में जितनी गहरी नींव बच्चे को दी जाती है उतना ही उज्जवल उसका भविष्य होता ​है। कई लोग बचपन में अपने बच्चों सिर्फ पढ़ाई में ही उलझा कर रखते हैं। लेकिन एक शोध के अनुसार बच्चों को बचपन में कहानियां सुनाना जरूरी होता है। क्योंकि ऐसे बच्चे अपेक्षाकृत अधिक बुद्धिमान होते हैं।

शालीनता

शालीनता
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क्या आपने कभी ये चीज नोटिस की है कि अाखिर दादी-नानी बच्चों को बचपन में कहानियां और पुरानी बातें क्यों बताती हैं? ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ऐसा करने से बच्चों में शुरू से ही शालीनता और गंभीरता आती है। कहानी सुनते वक्त जब बच्चा किसी को परेशानी में फंसता हुए सुनता है तो भावुक हो जाता है। फिर जब वैसी ही घटना उसकी असली की जिंदगी में बीतती है तो वह उसका डट कर सामना करता है।

मजबूत बनते हैं

मजबूत बनते हैं
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दरअसल, कहानियों के माध्यम से घर के बड़े छोटे-छोटे बच्चों को बचपन में ही भविष्य में आने वाले कठिन पड़ावों से रू-ब-रू करा देते हैं और उनसे कैसे निपटना है ये भी बता देते हैं। इससे बच्चा इतना मजबूत बन जाता है कि जब उसके सामने कोई परेशानी आती है तो वह घुटने नहीं टेकता बल्कि उसका डटकर सामना करता है।

गंभीरता

गंभीरता
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कहानियां सुनकर बच्चे का मानसिक विकास काफी तेजी से होता है। कहानियों में जिस तरह से एक छोटा बच्चा अपने माता-पिता का ध्यान रखता है, 2 वक्त की रोटी कमाने के लिए अपने परिजनों के साथ खुद भी मेहनत करता है। इन सब को सुनकर बच्चे में खुद ही गंभीरता आती है।

अनुशासनता

अनुशासनता
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बचपन की कहानियां कहीं ना कहीं बच्चे में अनुशासनता भी लाती है। स्कूल में बच्चों के लिए कई तरह के नियम बनाए जाते हैं लेकिन बच्चे ना तो उनका पालन करते हैं और ना ही उनसे कुछ सीखते हैं। क्योंकि बच्चे स्वभाव से चंचल होते हैं, लेकिन कोई भी बात सिर्फ प्यार से मानते हैं। इसलिए कहानियों की गहरी छाप उनके मस्तिष्क पर पड़ती है।

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