अंतर्मन के आलोचक को शांत करने के 7 तरीके

व्यक्ति दूसरों की आलोचना तो सह जाता है लेकिन जब वह अपनी ही नजर में गिर जाता है तो वह तकलीफ बहुत असहनीय होती है। इससे बचने के लिये अपने अंतरमन के आलोचक को शांत करें।

Rahul Sharma
Written by: Rahul SharmaPublished at: Jul 27, 2015

अंतर्मन के आलोचक को मारें

अंतर्मन के आलोचक को मारें
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आलोचना नकारात्मकता की ओर ले जाती है, फिर चाहे कोई ओर आपकी आलोचना करे या फिर आप खुद की आलोचना करें। व्यक्ति दूसरों की आलोचना तो सह जाता है लेकिन जब वह अपनी ही नजर में गिर जाता है तो वह तकलीफ बहुत असहनीय होती है। अपनी आलोचना से या समूह में विचारों की अभिव्यक्ति पर झेंप जाना कमजोर आत्म सम्मान की निशानी है। खुद को दूसरों से कमतर आंकना आपके उत्कर्ष के मार्ग की सबसे बड़ी बाधा होता है और इससे मुक्ति बहुत जरूरी है। तो इसके लिये अपने अंतरमन के आलोचक को शांत करें। चलिये जानें अंतर्मन के आलोचक को शांत करने के 7 तरीके - Images source : © Getty Images

अपने अंतरमन के डर को मारें

अपने अंतरमन के डर को मारें
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अगर आप लोगों के बीच या किसी मीटिंग में हिस्सा लेने से पहले कुछ भयभीत हो जाते हैं या ऐसे मौकों  पर आपका आत्मविश्वास डगमगाया हुआ होता है तो य कीनन आप अपनी ही नजरों में स्वयं को कम आंकते हैं। तो इस सेल्फ जजमेंट की भावना से बाहर निकलें। Images source : © Getty Images

अपनी खूबियों की कदर करें

अपनी खूबियों की कदर करें
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अपनी खूबियों के प्रति आत्मविश्वास नहीं होने पर हीन भावना पनपने लगती है जो आपके व्यक्तित्व को नुकसान पहुंचाती है। जब आप कसौटी या प्रतिस्पर्धा के मौकों से बचने व भागने लगते हैं तो इसका मतलब भी यही होता है कि आपका अपने पर विश्वास पक्का नहीं होता या यूं कहें कि आप स्वयं को हीन भावना के साथ देखते हैं। तो अपनी खूबियों की कदर करें। Images source : © Getty Images

मेरा कहना जरूरी नहीं है

मेरा कहना जरूरी नहीं है
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चुप्पी आपके द्वंद्व को और जटिल बना देती है। इससे पहले कि आपके विचार आपको नुकसान पहुंचाएं, उन्हें बाहर निकाल दें। दुनिया के अधिकतर लोगों से जुड़ी यह कड़वी सच्चाई है कि उनके सबसे जरूरी विचार व एहसास अकसर अनकहे और अनसुने रह जाते हैं। Images source : © Getty Images

स्वयं को दोष न दें

स्वयं को दोष न दें
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बहुत सी ऐसी चीजें होती हैं जो हम सही नहीं कर पाते हैं और ऐसे में खुद को दोषी मानने लगते हैं। लेकिन आपको ये समझना होगा कि कोई भी परफेक्ट नहीं होता है। लोग अक्सर अपने प्रति बहुत निष्ठुर होते हैं लेकिन हर मौके पर खुद के प्रति इतना निर्मम होने की जरूरत नहीं है। असफलता के लिए स्वयं को दोष देने वाले विचारों को खुद से दूर करना जरूरी है। Images source : © Getty Images

अपने प्रति सकारात्मक सोच बनाएं

अपने प्रति सकारात्मक सोच बनाएं
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अगर आप अपना आकलन कर पाते हैं तो अपनी खामियों की बजाये खूबियों पर ध्यान केंद्रित करें। किसी प्रतिस्पर्धा में असफल हो जाते हैं, तो आप खुद को एक हारे हुए व्यक्ति की तरह देखने लगते हैं। लेकिन इसकी जगह पर यह मानने की जरूरत है कि ऐसा सभी के साथ होता है। हर व्यक्ति हर मौके पर सफल नहीं हो सकता है। अपनी खूबियों को देखें कि आपने क्या हासिल किया और उन्हें आगे बढ़ाने का सोचें।Images source : © Getty Images

अपना सम्मान करें

अपना सम्मान करें
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  सबसे पहले खुद से प्यार करना जरूरी है, क्योंकि यदि आप खुद से ही प्यार नहीं करते तो आप यह कैसे मान सकते हैं कि दूसरे आपसे प्यार करेंगे। हर व्यक्ति में कुछ न कुछ खूबी तो होती ही है और वही उसकी शक्ति होती है। अपनी खूबियों को पहचानें और उन्हें आगे बढ़ाएं। अपने प्रति सम्मान का भाव हीन भावना से उबरने में काफी मददगार होता है। Images source : © Getty Images

तुलना या भेद-भाव से बचें

तुलना या भेद-भाव से बचें
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रंग व जाती से खुद को या किसी और को न आंकें। क्योंकि वास्तव में चमड़ी तो केवल हमारे शरीर का नाजुक आवरण मात्र होती है। इसकी मोटाई दो मिलीमीटर से अधिक नहीं होती है और इसका मुख्य काम शरीर के अंगों की सुरक्षा करना है। यह शारीरिक संवेदनाओं को पैदा करने में भी मदद करता है, लेकिन इन कामों में इसके रंग की कोई भूमिका नहीं है। तो इंसान की सुंदरता का आकलन केवल उसके बाहरी आवरण से नहीं किया जा सकता। Images source : © Getty Images

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