बुरे समय के लिए बेहतरीन उपाय

बुरे समय की एक खासियत होती है कि वह कभी भी स्थायी नहीं होती। साथ ही जाते जाते हमें बहुत कुछ सिखा जाती है। बुरे समय में हम कुछ बेहतरीन उपायों को अपनाकर उससे पार पा सकते हैं। जानते हैं कैसे? आइये जानें।

Meera Roy
Written by: Meera RoyPublished at: Feb 29, 2016

सच का सामना करें

सच का सामना करें
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अकसर जब हम बुरे दौर से गुजरते हैं तो उसकी अनदेखी करने की भरसक कोशिश करते हैं। चाहते हैं कि बिन कुछ किये ही वह अपने आप सुलझ जाए। जबकि आप भी इस बात को जानते हैं कि ऐसा कभी नहीं होता। अतः सच का सामना करें, उसकी तह तक जाएं और फिर समझदारी से विकल्प का चयन करें। हां, इस बात का ख्याल रखें कि कई बार हमें दिल से नहीं दिमाग का इस्तेमाल करना होता। कुछ फैसले घर के विरुद्ध में भी लेने होते हैं। ऐसा करने में हिचके नहीं अपितु सही का साथ दें।Image Source-Getty

रचनात्मक सोच रखें

रचनात्मक सोच रखें
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जो समस्या गहरे तक आपके दिलो दिमाग में छा गयी है, उससे निजात पाने के लिए जरूरी है कि आप रचनात्मक रवैया अपनाएं। दरअसल जो समस्या आसानी से न सुलझे, उसके लिए हमें कुछ अलग रुख इतिख्यार करना पड़ता है। रचनात्मक सोच आपको ऐसा करने में मदद कर सकती है। बाक्स के परे होकर सोचें। मतलब यह कि कुछ रचनात्मक करते हुए समस्या का समाधान खोजने में सहजता होती है। आप चाहें तो पेंटिंग कर सकते हैं, कुकिंग क्लासेज शुरु कर सकते हैं, घर सजा सकते हैं। ये तमाम विकल्प न सिर्फ आपका मन हल्का करते हैं बल्कि सही दिशा भी दिखाते हैं।Image Source-Getty

दर्द को दवा बनाएं

दर्द को दवा बनाएं
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हार-जीत एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। यदि आप जीतते हैं तो हार से भी आपका सामना होगा। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हार के कारण आप उसे किसी जख्म की तरह अपने साथ चिपका लें। उस दर्द को दवा के रूप में इस्तेमाल करें। उससे प्रोत्साहित हों। आगे बढ़ने के लिए नए दिशा निर्देश बनाएं। यकीन मानिए जब आप अपनी हार को आगे बढ़ने की ढाल बनाएंगे तो जीतना तय होगा।Image Source-Getty

ग्लानिबोध से बाहर आएं

ग्लानिबोध से बाहर आएं
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हर व्यक्ति हार जाने के बाद किसी से मुखातिब नहीं होना चाहता। वह अकेलेपन का साथी हो जाता है। जबकि ऐसा करना निरानिर खुद से बेमानी करना है। यदि आप हार भी गए हैं तो इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है। हर कोई कभी न कभी हर का सामना करता है। हार के कारण किसी भी तरह के ग्लानिबोध में नहीं आना चाहिए। इसके उलट जरूरी यह है कि अपनी हार को दूसरों से साझा करें और खुद उसका निष्कर्ष निकालने की कोशिश करें। हार न तो शर्म का विषय है और न ही ग्लानिबोध का।Image Source-Getty

गिलास आधा भरा देखें

गिलास आधा भरा देखें
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जिंदगी के हर मोड़ पर सकारात्मक सोच का होना अति आवश्यक है। यदि आप आधे भरे गिलास को आधा खाली देखेंगे तो आपको अपने जीवन में चीजों की मौजूदगी का एहसास कभी नहीं होगा। इसके उलट आप हमेशा अपने जीवन में कमी को ही फोकस करेंगे। इससे न तो आप जीत का मजा ले सकेंगे और न ही हार से कुछ सीख सकेंगे।Image Source-Getty

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