हिंदु मान्‍यता के अनुसार चोटी रखने के फायदों के बारे में जानें

पुराने समय से ऋषि-मुनी को सिर पर चोटी रखने की परंपरा है, यह मान्‍यता से दिमाग स्थिर रहता है। क्रोध नहीं आता है और सोचने-समझने की क्षमता बढ़ती है। मानसिक मजबूती मिलती है और एकाग्रता बढ़ती है। आइए जानें चोटी रखने से आपको और कौन-कौन से फायदे मिल सकते हैं

Devendra Tiwari
Written by: Devendra Tiwari Published at: Feb 29, 2016

चोटी रखने के फायदे

चोटी रखने के फायदे
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पुराने समय से ऋषि-मुनी के साथ महिलाओं और पुरुषों को भी सिर पर चोटी रखने की परंपरा चली आ रही है। आज भी कई लोग रखते हैं। इस संबंध में मान्यता है कि जिस जगह पर चोटी रखी जाती है, उस जगह दिमाग की सारी नसों का केंद्र होता है। यहां चोटी रहती है तो दिमाग स्थिर रहता है। क्रोध नहीं आता है और सोचने-समझने की क्षमता बढ़ती है। मानसिक मजबूती मिलती है और एकाग्रता बढ़ती है। आइए जानें चोटी रखने से आपको और कौन-कौन से फायदे मिल सकते हैं। Image Source : Getty

मस्तिष्‍क का केंद्र

मस्तिष्‍क का केंद्र
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सिर में जिस स्‍थान पर चोटी रखी जाती है अर्थात् सिर के सभी बालों को काटकर बीचोबीच के स्‍‍थान के बाल को छोड़ दिया जाता है। इस स्‍थान के ठीक 2 से 3 इंच के नीचे आत्‍मा का स्‍थान होता है। भौतिक विज्ञान के अनुसार, य‍ह मस्तिष्‍क का केंद्र है और विज्ञान के अनुसार यह शरीर के अंगों, बुद्धि और मन को नियंत्रित का स्‍थान भी है। इसलिए हमारे ऋषियों-मुनियों ने सोच-समझकर चोटी रखने की प्रथा की शुरूआत की थी।  Image Source : Getty

सकारात्‍मक और आध्‍यात्मिक विचारों का ग्रहण

सकारात्‍मक और आध्‍यात्मिक विचारों का ग्रहण
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इस स्थान पर चोटी रखने से मस्तिष्क का संतुलन बना रहता है। चोटी सुषुम्ना नाड़ी को हानिकारक प्रभावों से तो बचाती ही है, साथ में ब्रह्मांड से आने वाले सकारात्मक तथा आध्यात्मिक विचारों को ग्रहण भी करती है।Image Source : Getty

नकरात्‍मक वातावरण से रक्षा

नकरात्‍मक वातावरण से रक्षा
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पुरुषों की तुलना में महिलाओं का मस्तिष्क अधिक संवेदनशील होता है। इसी कारण वातावरण की नकारात्मक एनर्जी का सीधा असर महिलाओं पर तुरंत होता है। सिर पर चोटी होने से नकारात्मक वातावरण से मस्तिष्क की रक्षा होती है। हमारे मस्तिष्क के दो भाग होते हैं। दोनों भागों के जुड़ने की जगह वाला हिस्सा बहुत संवेदनशील होता है। अधिक ठंड या गर्मी से इस भाग को सुरक्षित रखने के लिए भी चोटी बनाई जाती है।Image Source : Getty

आत्‍मशक्ति बढ़ती है

आत्‍मशक्ति बढ़ती है
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योग शास्त्र में इडा, पिंगला और सुषुम्ना नाड़ियों की चर्चा होती है। इनमें सुषुम्ना ज्ञान और क्रियाशीलता की नाड़ी है। यह स्पाईनल कॉड से होकर मस्तिष्क तक पहुंचती है। जिस स्थान पर ये नाड़ी मस्तिष्क से मिलती है, उसी स्थान पर चोटी बांधी जाती है। चोटी बांधने से मस्तिष्क की एनर्जी की रक्षा होती है और आत्मशक्ति बढ़ती है।Image Source : Getty

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