इन 8 विशेष बातों को लिए आभार करना न भूलें

By:Bharat Malhotra, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Dec 04, 2014
जिंदगी से कुछ होता है तो बस गिला, शिकवा और शिकायतें। लेकिन, जिंदगी हालात की मोहताज नहीं होती। आपका नजरिया बनाता है आपकी जिंदगी, इसलिए जीवन सभी पड़ावों को स्‍वीकार कर आभार करना न भूलें।
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    हालात नहीं नजरिया बनाता है जिंदगी

    कितनी 'शरारतें' करता है न वक्‍त। पता नहीं कब करवट बदल ले। एक पल लबों पर तब्‍बसुम तो अगले ही पल आंखों में अश्‍कों के दरिया ला देता है यह वक्‍त। जब यह माकूल होता है, तो हर ओर खुशियां ही नजर आती हैं। लेकिन जब बाद-ए-सबा लू में बदल जाती है, तो धूल के गुबार के सिवा कुछ नजर नहीं आता। हर ओर मायूसी और मातम के बादल दिखाई पड़ते हैं। हमें जिंदगी से कुछ होता है तो बस गिला, शिकवा और शिकायतें। लेकिन, जिंदगी हालात की मोहताज नहीं होती। आपका नजरिया बनाता है आपकी जिंदगी। आप जैसा सोचते हैं, जैसा देखना चाहते हैं, जिंदगी वैसी ही शक्‍ल अख्‍तियार कर आ जाती है आपके सामने। मुश्किल से मुश्किल हालात में भी अगर नजरिया सही हो, तो हर चीज सही नजर आती है। ऊपर वाले ने आपको कई ऐसी नियामतें बक्‍शी हैं जिनके लिए आप उसका शुक्रिया अदा कर सकते हैं। image source - getty images

    हालात नहीं नजरिया बनाता है जिंदगी
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    आप जिंदा हैं

    यह क्‍या कम बड़ी बात है कि आज आप सांस ले रहे हैं। जान है तो जहां है का मतलब, जान बचाने से नहीं है। सही मायनों में वह यह कहना चाहता है कि जब तक आपकी जान है, तब तक जहां आपका है। जान है तो हवा का रुख बदल सकते हैं। जान है तो आप पूरी शिद्दत से जिंदगी की तस्‍वीर में अपनी पसंद के रंग भर सकते हैं। जान है तो अपने जुनून का पीछा कर सकते हैं। जान है तो आप मुश्किलों से दो-दो हाथ करने की तैयारी कर सकते हैं। यानी जान है तो, सारा जहां है।

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    आप जिंदा हैं
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    रात को आप खाकर सोये

    रोटी- यह इनसान की बुनियादी जरूरतों में यह सबसे पहली है। कहते हैं कि पेट की भूख से ही गुनाह पैदा होते हैं। जब पेट की भट्टी धधकती है तो इनसान का विवेक और सब्र सब खोने लगता है। उस वक्‍त कौन देखना चाहता है कि क्‍या सही है और क्‍या गलत। उस वक्‍त जायज-नाजायज का फर्क भी किसे समझ में आता है। पेट की भूख धर्म-अधर्म की रेखा को मिटाकर रख देती है। आप शुक्र मनाइये कि आपको भूख का सामना नहीं करना पड़ा। आप तसल्‍ली से भरपेट खाकर सोये। शुक्र मनाइये कि आपको इस रोटी के लिए किसी का मोहताज नहीं होना पड़ा। और अगर आपको अब भी न समझ आए तो किसी भूखे की आंखों के दर्द को महससू कीजियेगा। उसके उन फैले हाथों की ओर देखियेगा आपको समझ में आ जाएगा कि भूख क्‍या है और पेट भरा होना कुदरत का कितना बड़ा करम।

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    रात को आप खाकर सोये
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    अपनी पसंद के कपड़े

    कपड़ा- यह इनसान की दूसरी अहम जरूतर है कपड़े तन को ही नहीं आत्‍मा को भी ढंककर रखते हैं। अगर आप अपनी किसी ड्रेस को लेकर गुस्‍से में हैं, तो एक बार उन लोगों के बारे में सोचियेगा जिनके पास चुनने के लिए भी नहीं है। जब दिल उदास हो और यह अहसास हो कि आपकी जिंदगी में सिर्फ और सिर्फ खामियां हैं, तो एक बार उन लोगों के बारे में सोचियेगा जिनके चीथड़ों से बाहर झांकता शरीर न जाने कितनी गिद्ध दृष्टियों से छननी हो चुका होता है। अपनी पसंद के कपड़े पहनना यानी अपनी मर्जी के मुताबिक चलना- एक बार इस तरह सोचकर देखिये। और अगर आप अपनी मर्जी के मुताबिक फैसले ले सकते हैं यानी हालात आपकी सोच जितने खराब नहीं हैं।

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    अपनी पसंद के कपड़े
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    आपको बाहर नहीं सोना पड़ा

    मकान- तीसरी बुनियादी जरूरत। सिर पर छत होना कुदरत की बड़ी इनायत है। घर सिर्फ कंक्रीट की बनी चाहरदीवारी नहीं होता। सुरक्षा का दूसरा नाम है घर। सुकून, तसल्‍ली, अपनेपन, बेफिक्री को ही तो घर कहते हैं। एक ऐसा ठिकाना जहां आप रात को थके-मांदे लौट सकें। वो जगह जिसके आगोश में खुद को सौंपकर आप सब कुछ भूल सकें। वही तो होता है न घर। जो सर्दी, गर्मी और बारिशों में सब कुछ सहता है। जो अपनी पूरी ताकत लगा देता है हवाओं के खिलाफ, ताकि आप महफूज रह सकें। कभी शहरों की सड़कों पर देखियेगा, फुटपाथों पर जिंदगी कैसे रात काटने की तैयारी करती है। बारिशों में पुल के नीचे होने को मजबूर जिंदगी को देखेंगे तो आपको अपनी छत की अहमियत पता चलेगी। देखियेगा कैसे सर्द रातें आग के पास बैठकर गुजारी जाती हैं। तब महसूस होगा कि ईश्‍वर ने आपके सिर पर छत देकर कितना बड़ा अहसान किया है।

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    आपको बाहर नहीं सोना पड़ा
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    कोई है अपना

    वक्‍त चाहे कितना ही मुश्किल क्‍यों न हो, किसी अपने का साथ उसकी तकलीफ कम कर देता है। जब कोई प्‍यार से आपके कंधे पर हाथ रखकर कहता है कि यार सब ठीक हो जाएगा, तो यूं लगता है जैसे दिल पर पड़ा बोझ किसी ने हल्‍का कर दिया। कोई कंधा जिस पर सिर रखकर आप रो सकें। कोई अपना जो अच्‍छे बुरे वक्‍त में आपके साथ खड़ा हो। कहते हैं इनसान न रोते अच्‍छा लगता है और हंसते। और अगर कोई है जो आपको प्‍यार करता है, तो वह आपकी खुशी में हंसेगा और आपके दुख में आंसू बहायेगा। वह प्‍यार करने वाला आपके मां-बाप हो सकते हैं और कोई प्‍यारा सा दोस्‍त भी। प्‍यार का मरहम हर जख्‍म भरने के लिए काफी होता है।

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    कोई है अपना
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    पीने का साफ पानी

    क्‍या आप जानते हैं कि दूषित पानी से होने वाले डायरिया से हर साल 22 लाख लोग अपनी जान गंवाते हैं। तो अगर आपके हलक के नीचे उतरने वाला पानी का घूंठ साफ है, तो आप इसके लिए भी शुक्रगुजार हो सकते हैं। दुनिया में लाखों-करोड़ों लोगों को पीने का साफ पानी हासिल नहीं है। कितनी बुनियादी सी चीज है, लेकिन अब भी करोड़ों लोग इससे महरूम है। तो उन चीजों, जो आपको हासिल नहीं हैं, का गम मनाने के बजाय उन चीजों का शुक्र अदा करें जो आपको नसीब है।

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    पीने का साफ पानी
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    इलाज है आपकी पहुंच में

    नौ महीने की गर्भवती महिला येल्लावा को अपने बच्चे के सुरक्षित जन्म के लिए उफनती नदी में छलांग लगानी पड़ी। हालांकि 22 वर्षीय येल्‍लवा को तैरना नहीं आता था, फिर भी वह करीब डेढ़ घंटे तैरकर किनारे सही सलामत पहुंची। कर्नाटक के एक गांव में कृष्णा नदी का जल स्तर बढ़ता जा रहा था। आसपास कोई ठीक-ठाक हॉस्पिटल भी नहीं था और महिला को चार किलोमीटर दूर के हॉस्पिटल ले जाने के लिए कोई नाविक तैयार नहीं था। हैरतअंगेज कारनामे को अंजाम देने वाली येल्लावा ने अकेले ही नदी पार करके ऐसी बहादुरी का परिचय दिया कि हर साल बाढ़ का दंश झेलने वाले लोग हैरान हैं। और अगर आपकी कहानी इस जैसी नहीं है, तो आप इस बात का तो शुक्रिया अदा कर ही सकते हैं कि आपकी पहुंच में इलाज है। किसी बीमारी के संकेत नजर आते ही डॉक्‍टर तक आप फौरन पहुंच जाते हैं। कितने ही लोग हैं जो जरा सी खरोंच लगने पर मौत का ग्रास बन जाते हैं क्‍योंकि उन्‍हें डॉक्‍टरी सुविधा नहीं मिल पाती।

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