खतरनाक है ग्लूकोमा, रोग से इस तरह रखें अपनी आंखों को सुरक्षित

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 29, 2018
Comment

Subscribe for daily wellness inspiration

Like onlymyhealth on Facebook!

Quick Bites

  • अक्सर 'ग्लूकोमा' के लक्षणों का पता काफी देर में लगता है।
  • काले मोतिया के नाम से भी जाना जाता है 'ग्लूकोमा'।
  • आंखों में दर्द, भारीपन या सिर दर्द हो सकते हैं इसके लक्षण।

ग्लूकोमा आंखों से संबंधित एक ऐसा रोग है जिसे काला मोतिया के नाम से भी जाना जाता है। इस बिमारी में दृष्टि को दिमाग तक ले जाने वाली नस की कोशिकाएं धीरे-धीरे नष्ट होने लगती हैं। जिस तरह हमारा ब्लड प्रेशर होता है, उसी प्रकार से आंखों का भी प्रेशर होता है। इसे इंट्राओक्युलर प्रेशर कहा जाता है। जब इंट्राओक्युलर प्रेशर आंखों की नस की सहन की क्षमता से अधिक हो जाता है, तो उसके तंतुओं को नुकसान होने लगता है, इसे ग्लूकोमा कहा जाता है।

ग्लूकोमा के लक्षण

  • जब किसी व्यक्ति को ग्लूकोमा होता है तो आंखों में तरल पदार्थ का दबाव बहुत ज्यादा हो जाता है।
  • आंखों के नंबर में जल्दी-जल्दी उतार-चढ़ाव आता है।
  • आंखें अक्सर लाल रहती हैं।
  • रोशनी का धुंधला दिखाई देना और आंखों में तेज दर्द होना।
 
  • धुंधलापन और रात में दिखना बंद हो जाना।
  • बिना बात के मितली या उलटी होना।
  • सिरदर्द और हल्के चक्कर आना।
  • डायबिटीज, हाई बीपी और हार्ट की बीमारियों की वजह से भी ग्लूकोमा हो सकता है।
  • इन लक्षणों में से अगर 2 लक्षण भी किसी व्यक्ति को अपने आप में महसूस होते हैं तो उसे तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

ग्लूकोमा से बचाव

  • आई एक्सपर्ट बताते हैं कि ग्लूकोमा के साथ सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इसका कोई लक्षण पूरी तरह स्पष्ट नहीं होता। इसके ज्यादातर मामलों में आंखों की रोशनी अचानक कम होने लगती है। जांच कराने पर ही इसका पता लग पाता है।
  • ग्लूकोमा को शुरुआत में ही पहचानने का प्रयास करें। इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते, लेकिन नियमित जांच कराते रहने से प्रारंभिक स्थिति में ही इसकी पुष्‍िट की जा सकती है। इसके कुछ विशेष लक्षण भी होते हैं, जैसे आंखों में दर्द, भारीपन, सिर दर्द, लाइट देखने में दिक्कत महसूस होना, लगातार नंबर बदलना और नजर धुंधली होना आदि होने पर भी आपको तुरंत जांच करानी चाहिए।
 
  • ग्लूकोमा का पता लगाने के लिए नियमित आई चेकअप, रेटिना इवेल्‍यूएशन और विजुअल फील्ड टेस्टिंग कराते रहना चाहिए। प्रारंभिक स्थिति में ग्लूकोमा की पहचान कर इसे आई ड्रॉप्स और स्थिति बढ़ जाने पर लेंसर और सर्जरी से ठीक किया जा सकता है।
  • ग्लूकोमा के मरीजों को सर्जरी के बाद अपनी आंखों को धूल-मिट्टी से बचाना चाहिए। खासकर आंखों को मलना या रगड़ना नहीं चाहिए। आंखों पर किसी तरह का प्रेशर नहीं पड़ना चाहिए। इसके अलावा, मरीज अपने डेली रूटीन का सारा काम-काज बिना किसी प्रॉब्लम के कर सकता है।
  • ग्लूकोमा से बचने के लिए सभी जरूरी सावधानियां बरतें। जैसे कि आंखों में कोई भी ड्रॉप डालने से पहले अपने हाथों को अच्छी तरह से धो लें। दवाई को ठंडी और शुष्क स्थान पर रखें। एक बार में एक ही ड्रॉप डालें और दो दवाइयों के बीच में कम से कम आधा घंटे का अंतर रखें। आई स्पेशलिस्ट से लगातार मिलते रहने व समय से दवाइयां लेते रहने से आप ग्लूकोमा को समय रहते नियंत्रित कर एक सामान्य जीवन निर्वाह कर सकते हैं।
  • कई बार आंख में चोट लगने, एडवांस्ड कैटरेक्ट (बढ़ा हुआ मोतियाबिंद), डायबिटीज, आई इनफ्लेमेशन और कुछ मामलों में स्टेरॉयड्स से भी ग्लूकोमा हो सकता है। 40 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को जिनका कोई ग्लूकोमा का कोई पारिवारिक इतिहास रह चुका हो, को इसकी शिकायत होने की ज्यादा संभावना रहती है।

ऐसे अन्य स्टोरीज के लिए डाउनलोड करें: ओनलीमायहेल्थ ऐप

Read More Articles On Glaucoma In Hindi

Loading...
Write Comment Read ReviewDisclaimer
Is it Helpful Article?YES886 Views 0 Comment
संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर