सही जानकारी और देखभाल से गर्भावस्था में डायबिटीज से बचना है मुमकिन

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 12, 2012
Quick Bites

  • कई शारीरिक बदलावों से होकर गुजरती है गर्भवती महिला। 
  • गर्भावस्था में टाइप 1 डायबिटीज की सभांवना होती है अधिक।
  • प्रोटीन व ओमेगा 3 युक्त भोजन बचाता है डायबिटीज से।
  • डायबिटीज से बचने के लिए रोज 30 मिनट करें व्यायाम।

यदि गर्भावस्था के दौरान किसी महिला को डायबिटीज हो जाए तो यह उस गर्भवती महिला और उसके होने वाले बच्चे दोनो के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। डायबिटीज एक गंभीर बीमारी है, जो गर्भावस्था में और भी खतरनाक साबित हो सकती है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान इसके खतरे को कम करना और इससे बचाव करना बेहद जरूरी है।

Prevention Of Diabetes In Pregnancy

गर्भवति होना का तजुर्बा और फिर मां बनने का अहसास किसी महिला के जीवन का सबसे सुखद अनुभव होता है। हालांकि गर्भावस्था से लेकर बच्चे को जन्म देने तक का अंतराल में महिला को कई शारीरिक बदलाव और समस्याओं से होकर गुजरना पड़ता है। गर्भावस्था के दौरान किसी गर्भवती को आमतौर पर कई बीमारियां होने का खतरा बना रहता है। ऐसा गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिलाओं का इम्यून सिस्टम पहले की अपेक्षा कमजोर हो जाने के कारण होता है। इम्यून सिस्टम कमजोर होने से कई बार गर्भवती महिला के रक्त में ग्लूकोज बनना कम हो जाता है, जो कि डायबिटीज के खतरे की निशानी है। गर्भावस्था के दौरान होने वाली डायबिटीज को जेस्टेशनल डायबिटीज कहा जाता है। आइये जाने की क्या है जेस्टेशनल डायबिटीज और इससे कैसे बचा जा सकता है।

 

गर्भवस्था के दौरान जेस्टेशनल डायबिटीज

गर्भवस्था के दौरान हार्मोन में बदलाव और वजन बढ़ना स्वस्थ गर्भावस्था के लक्षण हैं, पर ये बदलाव कभी-कभी शरीर पर बुरा असर डालते हैं। जेस्टेशनल डायबिटीज वह है, जो गर्भावस्था के दौरान होता है। आमतौर पर गर्भावस्था के 13 से 28 सप्ताह के दौरान यह बीमारी होती है, और प्रसव के साथ दूर हो जाती है। 20 में से 1 गर्भवती महिला को यह डायबिटीज होता है।

 

गर्भावस्था में जेस्टेशनल डायबिटीज के लक्षण

जेस्टेशनल डायबिटीज में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है। जब हार्मोन में बदलाव की वजह से गर्भवती महिला के शरीर में इंसुलिन के उपयोग की क्षमता प्रभावित हो जाती है तो वह डायबिटीज की शिकार हो जाती है।

 

गर्भवस्था में टाइप 1 डायबिटीज

गर्भावस्था में टाइप 1 डायबिटीज होने की सभांवना ज्यादा होती है। गर्भावस्था के दौरान इंसुलिन की कमी के कारण डायबिटीज का खतरा बढ़ भी हो सकता है। टाइप 1 डायबिटीज में प्रतिरक्षा प्रणाली पाचन ग्रंथियां में इन्सुलिन पैदा कर बीटा कोशिकाओं को प्रभावित कर उन्हें नष्ट कर देती है। इस स्थिति में पाचन ग्रंथिया कम मात्रा में या ना के बराबर इन्सुलिन पैदा करती हैं।

गर्भावस्था में टाइप 1 डायबिटीज वाली महिलाओं को स्वस्थं रहने के लिए प्रतिदिन इंसुलिन की आवश्यकता होती है।

 

गर्भावस्था में टाइप 1 डायबिटीज के लक्षण

गर्भावस्था में आमतौर पर टाइप 1 डायबिटीज के कारण बार-बार प्यास लगना और पेशाब का आना शामिल है। ऐसे में लगातार भूख लगती है। लेकिन वजन कम हो जाता है। आंखों में धुंधलापन होता है। मोटापे की समस्या आती है।

 

गर्भवती महिला के लिए डायबिटीज खतरनाक है

गर्भवती महिला के लिए डायबिटीज अधिक खतरनाक है। इससे सामान्य डिलीवरी में मुश्किल आ सकती है। इसके कारण बच्चे का आकार और वजन दोनों सामान्य से ज्यादा हो सकता है। डायबिटीज पर काबू न रहे तो डिलीवरी के बाद बच्चे को सांस की तकलीफ भी हो सकती है,उसका शुगर लेवेल बढ़ सकता है। कई बार बच्चा पीलिया का शिकार भी हो सकता है। गर्भावस्था में डायबिटीज न हो इसके लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही दवाईयां ले एवं खान-पान भी अच्छा रखें।


जेस्टेशनल डायबिटीज से बचने के तरीके

 

डाइट का खास खयाल रखें-

जेस्टेशनल डायबिटीज से बचने के लिए सुबह के नाश्ते से लेकर रात के खाने तक का निर्धारण और पालन करना बहुत जरूरी होता है। इसके लिए नाश्ते में अंकुरित चना, प्याज, सलाद, शक्कर रहित चाय या दूध लें। बिस्कुट, नमकीन या पकौड़ियां या अन्य कोई तला-भुना नाश्ता न लें क्योंकि इनसे शुगर बढ़ती है। यदि कोई गर्भवती गेस्टेशनल डायबिटीज से प्रभावित है तो महिलाओं उसे रोज अपने प्रति किलो वजन के हिसाब से 25 किलो कैलोरी डाइट लेनी चाहिए। आप यदि गेहूं की जगह चने की रोटियां खाएं और उसमें बाजरा, जौ भी मिला लें तो अच्छा होता है। गेंहू और चावल का सेवन करने से बचें। चावल से ब्लड शुगर बढ़ती है।

 

प्रोटीन युक्त भोजन जैसे, दालें, सब्जियां, पनीर, अंडा, मछली खाएं। साथ ही बैगन, गोभी और भिंडी शुगर को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं, अतः इनका सेवन भी करें। बीन्स जैसे राजमा, सोयाबीन, लोबिया आदि लें। भोजन में सरसों का तेल या कोकोनट आयल का ही इस्तेमाल करें। इन तेलों में सबसे ज्यादा मोनो सेचुरेटेड फैटी एसिड होते हैं, जो शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं। गर्भावस्था में ड्राई फ्रूट्स जैसे बादाम, अखरोट और काजू खाएं। इन्हें खाने से डायबिटीज, हार्ट, स्ट्रोक आदि बीमारियों से ब चाव होता है। ओमेगा थ्री फैटी एसिड युक्त चीजें भी खाएं, जैसे सालमन, टूना, मैकरल मछलियां।

 

व्यायाम है लाभदायक

गर्भवती महिलाओं को डायबिटीज से बचने के लिए रोज कम से कम 30 मिनट तक हल्का-फुल्का व्यायाम करना चाहिए। लेकिन व्यायाम कौन सा किया जाए इसके लिए डॉक्टर से परामर्श जरूर ले लें।

 

 

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