ओवुलेशन के बाद प्रेग्नेंसी के लक्षण: जानें शरीर में कौन से बदलाव देते हैं प्रेग्नेंट होने का संकेत

ओवुलेशन के बाद प्रेग्नेंसी के लक्षण नजर आने लगते हैं, बस इन्हें हम जल्दी पहचान नहीं पाते। ऐसे में ये बदलाव प्रग्नेंसी की पहचान में मदद करते हैं।

Pallavi Kumari
Written by: Pallavi KumariPublished at: Oct 19, 2013Updated at: Jul 22, 2021
ओवुलेशन के बाद प्रेग्नेंसी के लक्षण: जानें शरीर में कौन से बदलाव देते हैं प्रेग्नेंट होने का संकेत

मां बनना  महिलाओं के जीवन का सबसे बड़ा बदलाव है। पर इस बदलाव में महिलाओं को कई स्वास्थ्य से जुड़े स्थितियों से गुजरना पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानी गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में होती है, जब शरीर में छोटे-बड़े बदलाव हो रहे होते हैं और हम इन्हें समझ नहीं पाते हैं। ये बदलाव काफी असमंजस की स्थिति पैदा करते हैं जहां समझना मुश्किन हो जाता है, कि आप प्रेग्नेंट हैं या नहीं। इसलिए महिलाओं के लिए वो पहला संकेत काफी महत्वपूर्ण होता है, जो उन्हें गर्भ ठहरने का पता देता है। आमतौर पर पीरियड्स रुकने और उल्टी-मतली जैसे लक्षणों को मां बनने का पहला संकेत माना जाता है। लेकिन इसके अलावा शरीर में होने वाले कुछ बदलाव भी हैं, जो कि प्रेग्नेंसी के शुरुआती संकेत (early signs of pregnancy) होते हैं। ये संकेत ओवुलेशन के बाद प्रेग्नेंसी के लक्षणों के रूप में शामिल होते हैं, जिससे शरीर में शरीर में कई बदलाव आते हैं। तो, आइए जानते हैं ओवुलेशन के बाद प्रेग्नेंसी के लक्षण (pregnancy symptoms after ovulation) और फिर जानेंगे प्रेग्नेंट होने के अन्य लक्षण।

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ओवुलेशन के बाद प्रेग्नेंसी के लक्षण- Ovulation ke baad pregnancy ke symptoms

1. पेशाब के रंग में बदलाव

ओवुलेशन के बाद कंसीव करने यानी कि गर्भधारण करने के लिए लगभग 12 घंटे का समय होता है। ऐसे में अगर स्पर्म एग को फर्टिलाइज कर लेता है, तो  गर्भधारण के बाद शरीर में प्रग्नेंसी के लिए बदलाव आने लगते हैं। जब भी महिलाओं में गर्भ ठहरता है तो सबसे पहले उनके उनके यूरिन में परिवर्तन होने लगता है। दरअसल जब महिलाएं गर्भवती होती हैं तो उनकी किडनी यूरिन को सही ढंग से फिल्टर नहीं कर पाती और इस कारण उनके यूरिन के रंग में परिवर्तन हो जाता है और उसका रंग पीला होने लगता है। पेशाब का रंग पीला पड़ना गर्भ ठहरने का पहला संकेत होता है।

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2. चक्कर आना

महिलाओं में गर्भ ठहरने का दूसरा संकेत होता है प्रेगनेंसी हार्मोन का प्रोडक्शन और इसके चलते शरीर में हार्मोनल बदलाव होना। इन हार्मोन का स्राव महिलाओं में मितली और चक्कर की समस्या का कारण बन सकता है। लगातार चक्कर और मितली होने पर महिलाओं को यह समझ लेना चाहिए कि अब वो मां बनने वाली हैं। इसलिए कभी भी ऐसा हो तो इस प्रकार के संकेत को नजरअंदाज न करें और डॉक्टर से तुरंत सलाह लें।

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3. लगातार कब्ज और गैस की समस्या

गर्भ ठहरने से पहले अक्सर महिलाओं को कब्ज और गैस की समस्या रहने लगती है। इसलिए इस प्रकार की समस्या होने पर महिलाओं को तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए क्योंकि बाजार में बिकने वाली गोलियां आपको और आपके बच्चे को नुकसान पहुंचा सकती है। गैस और कब्ज की समस्या होने पर महिलाओं को समझ जाना चाहिए कि वो गर्भवती हो गई हैं। दरअसल गर्भवती होने पर महिलाओं के शरीर में भ्रूण का विकास शुरू हो जाता है, जिस कारण कब्ज और गैस की समस्या हो जाती है।

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एक स्वस्थ महिला को हर महीने माहवारी होती है। गर्भ ठहरने का सबसे पहला लक्षण यह होता है कि गर्भ ठहरने के बाद किसी भी महिला की माहवारी होना बंद हो जाता है। इसके साथ ही जी मचलाना, उल्टी होना, बार-बार पेशाब लगना और स्तनों में हल्का दर्द बना रहना आदि साधारण लक्षण होते है। इन शिकायतों को लेकर महिलाएं स्त्री रोग विशेषज्ञ के पास जाती है। डॉक्टर महिला के पेट और योनि की जांच करती है और बच्चेदानी की ऊंचाई देखती है। गर्भधारण करने के बाद बच्चेदानी का बाहरी भाग मुलायम हो जाता है। इन सभी बातों को देखकर डॉक्टर महिला मां बनने का संकेत देती है।

 प्रेग्नेंसी के अन्य लक्षण-Pregnancy symptoms

-पीरियड्स न आने का कारण

-स्तनों में कठोरता।

-चक्कर आना या सुबह-सुबह उल्टी आना

-बार-बार पेशाब का लगना।

-कमजोरी या थकावट सा महसूस होना।

गर्भवती होने के लक्षणों के परीक्षणों के प्रकार

  • यदि आपको गर्भ ठहरने का शक हो, तो आपको इसकी पुष्टि करनी चाहिए। इसके लिए आप घर पर ही गर्भ परीक्षण कर सकती है, ऐसा आप प्रेगनेंसी परिक्षण किट इस्तेमाल करके कर सकती हैं या फिर डॉक्टर से अपने खून की जांच करवा सकती हैं।
  • गर्भवती महिलाओं के खून और मूत्र में एच.सी.जी. होता है जो कौरिऔन से बनता है। ये कौरिऔन औवल बनाती है। औवल का एक भाग बच्चेदानी की दीवार से तथा दूसरा नाभि से जुड़ा होता है। इसके शरीर में पैदा होते ही खून और मूत्र में एच.सी.जी. आ जाता है। इस कारण महिला को अगले महीने के बाद से माहवारी होना रुक जाता है। एच.सी.जी. की जांच खून या मूत्र से की जाती है। इन परीक्षणों से आपके मूत्र में गर्भावस्था के हॉर्मोन की उपस्थिति का संकेत मिलता है। जिससे आपके रक्त में गर्भावस्था के हॉर्मोन की उपस्थिति का पता लगाया जा सकेगा। ये परीक्षण गर्भ ठहरने के 5 दिन बाद से ही सही होते हैं, किन्तु परिणाम आने में 12-24 घंटे लग जाते हैं। 

अगर आपका गर्भ 13 सप्ताह से ज्यादा का हो, तो सही-सही गर्भ की सही जानकारी पाने के लिए अल्ट्रासाउंड स्कैन की जरूरत होती है। आपकी आखिरी माहवारी के पहले दिन से कितने सप्ताह बीत चुके हैं, इस पर गर्भावस्था का समय निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, यदि आपका मासिक चक्र सामान्यत: 28 दिनों का है और आप एक सप्ताह से महावारी नहीं हुई हैं, तो इसका अर्थ यह होगा कि आपको 5 सप्ताह का गर्भ है। और गर्भ 3 सप्ताह पहले ठहरा होगा।

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