गाय से मिले ऊतक से बची महिला की जान

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Dec 31, 2012

gaay se mile-utak se bachi mahila ki jaan

अगर दिल में जीने की दृढ़शक्ति हो, तो इनसान मौत को भी हरा सकता है। मिशेल इसकी जिंदा मिसाल हैं। ज‍ानिए कैसे मिशेल के जज्‍़बे ने मौत के पंजे से अपनी जिंदगी को आजाद करवाया।

 

लंदन। ब्रिटेन की मिशेल मॉर्गन लिवर कैंसर से पीडि़त थीं। उनका इलाज कर रहे डॉक्‍टरों हिम्‍मत हार चुके थे। लेकिन, मिशेल जीना चाहती थीं। उन्‍होंने मौत से हार मानने से इंकार कर दिया। मिशेल लंदन स्थित एंट्री यूनि‍वर्सिटी हॉस्पिटल के कैंसर विशेषज्ञों से मिलीं और इसके बाद जो हुआ वह चिकित्‍सीय इतिहास में एक अद्वितीय घटना के रूप में दर्ज है। यूनिवर्सिटी के डॉक्‍टरों ने गाय के हृदय से प्राप्‍त ऊतकों से उनके कैंसरग्रस्‍त लिवर को ठीक करने का करिश्‍मा कर दिखाया।

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ब्रिटिश अखबार 'डेली मेल' के मुताबिक मिशेल की दृढ इच्‍छाशक्ति के दम पर ही उन्‍होंने जीने की नयी राह तलाशी। अक्‍टूबर 2010 मिशेल के लिए यह बुरी खबर लेकर आया। उन्‍हें पता चला कि उन्‍हें कैंसर है। कैंसर भी अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका था। चिकित्‍सीय जगत में इस स्थिति को बेहद खतरनाक माना जाता है। आमतौर पर यही माना जाता है कि इन हालात में मरीज का बचना लगभग नामुमकिन होता है। ऐसी स्थिति में उसका इलाज नहीं किया जा सकता। लेकिन, मिशेल किसी और मिट्टी की बनी थी।

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दो महीने बाद मिशेल ने सर्जरी करवाई और लिवर में मौजूद ट्यूमर बाहर निकलवा दिया। उसके साथ इंफीरियर वेना कावा (आईवीसी) का भी एक बड़ा हिस्‍सा निकलवाना पड़ा, क्‍योंकि यह भी कैंसर की चपेट में आ गया था। आईवीसी लिवर के पिछले हिस्‍से में मौजूद प्रमुख नस होती है, जिसका काम शरीर के निचले हिस्‍से में दौड़ने वाले खून को हृदय तक पहुंचाना होता है। इस नस की भरपाई करने के लिए डॉक्‍टरों ने गाय के हृदय से बोवाइन पेरिकार्डियम नाम के ऊतक निकाले और मिशेल के लिवर में प्रत्‍यारोपित कर दिए। कुछ महीने बाद ये ऊतक आईवीसी में विकसित हो गए और मिशेल का लिवर पूरी तरह से ठीक हो गया।

 

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