हर महिला को थायरॉइड के बारे में जरूर जाननी चाहिए ये 5 बातें

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 10, 2018
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Quick Bites

  • भारत में 32 फीसदी लोग थायरॉइड की समस्या से परेशान हैं।
  • थायरॉइड का मु्ख्य कारण शरीर में आयोडिन की कमी और मोटापा है।
  • थायरॉइड गर्दन के निचले हिस्से में पाई जाने वाली एक ग्रंथि है।

थायरॉइड दुनियाभर में तेजी से बढ़ रही एक समस्या है। एक शोध के मुताबिक भारत में 32 फीसदी लोग थायरॉइड की समस्या से परेशान हैं। थायरॉइड का मु्ख्य कारण शरीर में आयोडिन की कमी और मोटापा है। इसकी एक बड़ी वजह अस्वस्थ खान-पान और शारीरिक मेहनत में कमी है। गले में होने वाले इस रोग की वजह से कई अन्य रोगों का खतरा बढ़ जाता है। थायरायड ग्रंथि गले में सांस की नली के ऊपर और वोकल कॉर्ड के दोनों ओर दो भागों में बनी होती है। पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं को इस बीमारी का ज्यादा खतरा होता है। थायरॉइड के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातों की जानकारी हर महिला को होनी चाहिए। आइये आपको बताते हैं क्या हैं वे बातें।

थायरॉइड छोटा सा पावर हाउस है

दरअसल थायरॉइड गर्दन के निचले हिस्से में पाई जाने वाली एक ग्रंथि है। हमारे शरीर में ऊर्जा और सुस्ती इसी ग्रंथि से निकले द्रव के कारण आती है। थायरॉइड हार्मोन शरीर के लगभग सभी हिस्सों को प्रभावित करते हैं। ये ग्रंथि एडमस एप्पल के ठीक नीचे होती है। थायराइड ग्रंथि का नियंत्रण पिट्यूटरी ग्लैंड से होता है जबकि पिट्यूटरी ग्लैंड को हाइपोथेलमस कंट्रोल करता है। थायराइड ग्रंथि का काम थायरॉक्सिन हार्मोन बनाकर खून तक पहुंचाना है जिससे शरीर का मेटाबॉलिज्म नियंत्रित रहे। इसलिेए इसे छोटा पावर हाउस कहा जाता है।

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शुरू में दिखते हैं सामान्य लक्षण

थायरॉइड की समस्या होने पर शुरुआत में बहुत सामान्य लक्षण दिखाई देते हैं इसी कारण ज्यादातर महिलाएं इसे नजरअंदाज कर देती हैं। जबकि बढ़ने के बाद ये रोग खतरनाक हो जाता है। शुरूआत में गले में दर्द के साथ खाने-पीने की चीज निगलने में दिक्‍कत होती है। मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, जिसके कारण मरीज को थकान और कमजोरी का एहसास होता है। इसके अलावा रात को सोने में दिक्‍कत होती है, ऐसा थायराइड नोड्यूल के बढ़ने से होता है।

हार्मोनल बदलावों और थायरॉइड में अंतर है

उम्र बढ़ने के साथ-साथ थायरॉइड की समस्या बढ़ती जाती है। आमतौर पर 40 की उम्र के बाद महिलाओं में ये परेशानी सामने आती है। कई बार बड़ी उम्र की महिलाओं में ये समस्या होने पर समझना मुश्किल हो जाता है कि ये बदलाव हार्मोनल चेंज या मेनोपॉज की वजह से हैं या थायरॉइड के लक्षण हैं। इसलिए इसके लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

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कैसे होती है थायरॉइड की जांच

आमतौर पर चिकित्सक इसका पता लगाने के लिए खून में टी3, टी4 और टीएसएच हार्मोन की जांच करते हैं। इसके अलावा अल्ट्रासाउंड के द्वारा थायराइड और एंटी थायराइड टेस्ट होता है। असल में थायरायड ग्रंथि में कोई रोग या वायरस नहीं होता है। शरीर में जब पिट्युटरी ग्लैंड ठीक तरह से काम नहीं करता तो थायरायड स्टिमुलेटिंग हार्मोन (टीएसएच) यानि थायरायड ग्रंथि को उत्तेजित करने वाला हार्मोन ठीक तरह से नहीं बन पाता और इसकी वजह से थायराइड से बनने वाले टी3 और टी 4 हार्मोन्स में असंतुलन आ जाता है।

साइलेंट किलर होती है ये बीमारी

थॉयराइड को साइलेंट किलर माना जाता है क्योंकि इसके लक्षण शुरुआती दौर में नहीं समझ आते। गर्दन में थोड़ा बहुत दर्द या छोटी सी गांठ को लोग ऐसे ही इग्नोर कर देते हैं लेकिन जब इस रोग का पता चलता है तब तक ये खतरनाक रूप ले लेती है। थॉयराइड की शुरुआत इम्यून सिस्टम में गड़बड़ी से होती है। थॉयराइड ग्रंथि अगर सही से अपना काम नहीं करती है तो कई समस्याएं हो जाती हैं क्योंकि ये ऐसे जीन्स का निर्माण करती हैं जिसके कारण कोशिकाएं अपना काम ठीक से कर पाती हैं। ज्यादा तनाव का असर हमारी थॉयराइड ग्रंथियों पर पड़ता है इसलिए तनाव भी थॉयराइड की समस्या का एक कारण है। अगर परिवार में पहले से किसी को थॉयराइड हो तो भी इसके होने की संभावना बढ़ जाती है।

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