मां और शिशु पर विपरीत असर डालती है किशोर गर्भावस्‍था

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 18, 2012
Quick Bites

  • जच्‍चा-बच्‍चा की मृत्यु दर बढ़ने का कारण है किशोर गर्भावस्‍था।
  • टीएज प्रेग्‍नेंसी से प्रभावित होता है महिला का शारीरिक विकास।
  • किशोर गर्भावस्‍था से हो सकती है डिलीवरी के दौरान परेशानी।
  • कम उम्र में गर्भधारण से गर्भपात की आशंका भी बनी रहती है।

यदि कोई युवती या महिला 19 साल या इससे भी कम उम्र में शिशु को जन्‍म देती है तो इसे किशोर गर्भावस्‍था माना जाता है। कम उम्र में गर्भधारण करने के कई नुकसान हैं।

effects of teenage pregnancy

इस उम्र में युवती को अपनी शारीरिक जरूरतों को पूरा करने के लिए पोषण की आवश्‍यकता होती है। ऐसे में यदि आप गर्भवती हो जाती हैं तो भ्रूण के विकास के लिए भी पोषक तत्‍वों की जरूरत होती है। जिससे न तो युवती को और न ही भ्रूण को पनपने के लिए जरूरी मात्रा में पोषक तत्‍व मिल पाते।


यदि लड़की को पूरी तरह से यौन शिक्षा नहीं मिली होती तो वह अपनी देखभाल करने में असमर्थ होती है। किशोर गर्भावस्था के कारण नवजात शिशु में को भी स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी समस्याएं होने की आशंका बढ़ जाती है। इससे महिला के स्‍वास्थ्‍य को भी कई तरह के नुकसान हो सकते हैं। इस लेख के जरिए हम जानते हैं किशोर गर्भावस्था के नतीजों के बारे में।

 

  • उन्‍नीस साल से कम उम्र में गर्भधारण करना महिला और नवजात शिशु दोनों के लिए ही खतरनाक हो सकता है।
  • कम उम्र में गर्भधारण करने से जच्‍चा-बच्‍चा दोनों की मृत्यु दर में लगातार बढोतरी हो रही है।
  • किशोरावस्था में गर्भधारण से न सिर्फ मां और बच्चे को स्‍थायी तौर पर परेशानी बनी रहती है, बल्कि महिला के शारीरिक विकास में भी बाधा आती है।
  • कोई लड़की यदि कम उम्र में ही मां बन जाती है तो उस पर समय से पहले जिम्मेदारियों का बोझ पड़ जाता है, जिससे उन्हें आगे चलकर जीवन यापन में परेशानी हो सकती है।
  • यदि कोई लड़की विवाह से पहले गर्भवती हो जाती है तो उसे समाज में गिरी हुई नजरों से देखा जाता है।
  • नवजात शिशु या किशोरी मां दोनों को ही भंयकर बीमारियों, यहां तक कि मौत तक का सामना करना पड़ सकता है।
  • कम उम्र में गर्भधारण करने से डिलीवरी के दौरान परेशानी होती है।
  • युवावस्‍था में शरीर को पोषण की जरूरत होती है। इस उम्र में गर्भधारण से गर्भस्थ शिशु और मां दोनों को पोषण देना कठिन हो जाता है।
  • आंकड़ों के मुताबिक, गर्भावस्था संबंधी समस्याओं के कारण होने वाले मृत्यु में सामान्य महिलाओं की अपेक्षा 15 से 19 साल की किशोरियों की संख्या दोगुनी तथा 10 से 14 साल के किशोरियों की संख्या पांच गुना अधिक होती है।
  • किशोरावस्था में गर्भधारण करने से नवजात शिशु का भार सामान्य महिलाओं के नवजात शिशुओं की अपेक्षा कम होता है, जो कि बच्चे के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए हानिकारक है।
  • किशोर गर्भवती महिलाओं द्वारा अपरिपक्व और कम भार वाले शिशु को जन्म देने की संभावना ज्यादा होती है। इससे नवजात शिशु और मातृ मृत्यु जैसे गंभीर खतरे जुडे हुए हैं।
  • कम उम्र में गर्भधारण करने से इस दौरान होने वाली समस्याएं महिला को लंबे समय तक प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में महिला के प्रजनन तंत्र को नुकसान पहुंच सकता है।
  • प्रसव के दौरान होने वाली पीड़ा स्थायी रूप से रह सकती है। किसी प्रकार का संक्रमण हो या फिर गर्भाश्‍य के फटने की आशंका भी बनी रहती है।
  • किशोरावस्था में गर्भपात की आशंका भी बनी रहती है। जो कि महिला के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए हानिकारक हो सकती है।
  • गर्भावस्था संबंधी समस्याओं के कारण किशोरियों को टेटनस और बैक्टीरिया जनित संक्रमण का खतरा बढ़ जाता हैं।

 

किशोर गर्भावस्था शिशु के साथ ही मां के लिए भी नुकसानदेह साबित हो सकती है, इसलिए किशारियों को कम उम्र में गर्भधारण करने से बचना चाहिए।

 

 

 

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