'घुटनों में 7 दिनों से ज्‍यादा समय तक दर्द को न करें नजरअंदाज', जानिए डॉक्‍टर ने क्‍यों कही ये बात

जोड़ों में दर्द होने पर उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। एक्‍सपर्ट मुताबिक, 7 दिनों से ज्‍यादा समय तक दर्द होनेे पर तुरंत डॉक्‍टर की सलाह लेनी चाहिए।

Atul Modi
Written by: Atul ModiPublished at: Aug 13, 2020
'घुटनों में 7 दिनों से ज्‍यादा समय तक दर्द को न करें नजरअंदाज', जानिए डॉक्‍टर ने क्‍यों कही ये बात

दर्द से पीड़ित, अस्थिर, असहज और चल पाने में असमर्थ। पिछले चार माह से 38 वर्षीय आदर्श साहनी ऐसा ही जीवन जी रहे हैं। मार्च 21 को दोस्तों के साथ एक फुटबॉल मैच के दौरान खेलते हुए आदर्श को घुटने में चोट लग गई थी जिसके कारण काफी दर्द हो रहा था। लिगामेंट फटने के कारण एक सप्ताह बाद उनकी एसीएल रिपेयर सर्जरी (Anterior Cruciate Ligament (ACL) Reconstruction Surgery in Hindi) तय की गई। लेकिन 3 दिनों के बाद पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा कर दी गई जिसके कारण सभी प्रकार की सर्जरी रद्द कर देनी पड़ी या उन्हें आगे के लिए टाल दिया गया।

एक अध्ययन के अनुसार इंटीरियर क्रूशियल लिगामेंट (Anterior Cruciate Ligament-ACL) चोट सबसे सामान्य तौर पर होनेवाली घुटनों की चोटों में से एक है। साल भर में इस तरह के 200,000 से अधिक मामले सामने आते हैं और इनमें से 100,000 घुटनों को साल भर में रिकन्स्ट्रक्ट किया जाता है।

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जब घुटना घूम जाता है तो ACL इसे स्थिर करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह जांघों की हड्डी (थाय बोन) को पिंडली की हड्डी (शिन बोन) से जोड़ता है। इसलिए इस लिगामेंट को जब भी नुकसान होता है और यदि उसकी उचित देखभाल न की जाए तो घुटनों में एक असामान्य सी स्थिति बन जाती है।    

ACL में फटना एक गंभीर स्थिति है जिसके कारण उपास्थि यानी कार्टिलेज को चोट पहुंच सकती है, जो घुटने की हड्डी वाले सतह के लिए गद्दे का काम करती है। इससे लंबे समय तक दर्द, जकड़न, जोड़ों के ईर्द-गिर्द सूजन और चोटिल पैर पर दबाव देने में परेशानी के साथ अस्थिर घुटने की समस्या आती है।  

क्‍या है एक्‍सपर्ट की राय? 

इस स्थिति के बारे में विस्तार से समझाते हुए बीएलके सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली के अर्थोस्कोपी एंड स्पोर्ट्स मेडिसिन सेंटर के सीनियर डायरेक्टर डॉ. दीपक चौधरी ने कहा, "घुटनों के दर्द को कभी भी नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि 7 दिनों से ज्‍यादा समय तक दर्द रहता है तो जोड़ों (जॉईंट) में ज़्यादा नुकसान और समस्या से बचने के लिए डॉक्टर द्वारा इसकी जांच कराने की सलाह दी जाती है। एक फटा हुआ लिगामेंट अपने आप ठीक नहीं हो सकता, इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि और ज़्यादा नुकसान से बचाने के लिए सर्जरी से इसे रिकन्स्ट्रक्ट किया जाए।" 

आमतौर पर चोट की तीव्रता का पता लगाने के लिए जोड़ों के एक एक्सरे या एमआरआई का इस्तेमाल किया जाता है। मामूली चोटों के मामले में उपचार में पेनकिलर (वेदनाशामक दवाईयां) और उसके बाद RICE पद्धति (रेस्ट, आइस, कॉम्प्रेशन और एलिवेशन) अपनाई जाती है। हालांकि, गंभीर स्थितियों में जहां लिगामेंट पूरी तरह फट जाता है घुटनों के जोड़ों को सुरक्षित करने के लिए एक मिनिमली इन्वेसिव रिकन्स्ट्रक्शन सर्जरी कराए जाने की सलाह दी जाती है।

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हाल ही में किया गया अध्ययन यह बताता है एक फटा हुआ ACL अन्य प्रकार की चोटों से भी बहुत ही समान रूप से जुड़ा हुआ है जैसे मैनिस्कस (अर्धचंद्राकार) फटना, हड्डी और जोड़ संबंधी उपास्थि की चोटें- इन सभी पर प्रभावी उपचार किया जाना ज़रूरी है अन्यथा ऐसे 50% मरीज़ों को अर्थराइटिस की समस्या आ सकती है। 

श्रीरामचंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च सेंटर, चेन्नई के स्पोर्ट्स साइन्स सेंटर के डायरेक्टर प्रोफेसर अरुमुगम शिवरामन ने बताया, "पिछले तीन महिनों में बाहर निकलने पर प्रतिबंध के चलते घुटनों में चोट होने की घटनाओं में कमी देखी गई है। हम मरीज़ों के साथ ई-परामर्श कर रहे हैं खास तौर पर उन लोगों के साथ जिनकी लॉकडाउन से पहले सर्जरी की जानी थी, ताकि उन्हें दवाइयों, नी ब्रेस (घुटनों के लिए पट्टी या टेक लगाना) और फीज़ियोथेरेपी व्यायाम के माध्‍यम से घर में ही दर्द से निपटने में मदद की जा सके।" 

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एक लिगामेंट रिकन्स्ट्रक्शन सर्जरी के दौरान डॉक्टर जोड़ के भीतर तक पहुंच प्राप्त करने के लिए घुटने के आसपास 2-3 छोटा चीरा लगाते हैं। विशेष उपकरणों का इस्तेमाल करते हुए इसके बाद डॉक्टर घुटने के फटे हुए लिगामेंट को एक स्वस्थ टिशू (ऊतक) से बदल देते हैं ताकि उसकी जगह एक नया लिगामेंट विकसित होने में मदद मिल सके 

इसलिए, यदि आप दर्द से पीड़ित आपके घुटनों के कारण एक खराब गुणवत्ता वाली ज़िंदगी जी रहे हैं तो अपनी समस्या का निदान पाने और स्थिति के बेहतर प्रबंधन के लिए डॉक्टर के साथ ई-परामर्श करना उचित होगा। समस्या का सही निदान और समय पर इलाज जोड़ों को लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखने में मददगार साबित हो सकता है। वहीं यदि आपने चिकित्सा प्राप्त करने में देरी की तो यह घुटनों को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है और इससे आपकी चलने फिरने और घूमने की क्षमता सीमित हो सकती है।

जहां तक आदर्श की बात है तो दो सप्ताह पहले उनकी सर्जरी की गई और अब घर में उनकी सेहत में अच्छी तरह सुधार हो रहा है। 

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