क्‍या आपको है COPD तो आज ही छोड़ें धूम्रपान

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 14, 2015
Quick Bites

  • सीओपीडी फेफड़ों की गंभीर बीमारी है।
  • इसमें सांस की नलियां सिकुड़ जाती हैं।
  • धूम्रपान इस बीमारी की प्रमुख वजह है।
  • लगातार होने वाली खांसी इसका लक्षण है।

सर्दियों में खांसी होना आम बात है। लेकिन लंबे समय तक खांसी अगर आपका पीछा नहीं छोड़ती, तो आपको डॉक्‍टर से संपर्क करना चाहिए। यह सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्‍मोनरी डिजीज) भी हो सकती है। सीओपीडी फेफड़ों की गंभीर बीमारी है। इसमें सांस की नलियां सिकुड़ जाती हैं और उनमें सूजन आ जाती है। यह सूजन निरंतर बढ़ती रहती है।  

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क्‍या है सीओपीडी

क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पलमोनरी डिजीज को सामान्य भाषा में क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस या फेफड़े की बीमारी भी कहते हैं। यह पुरुषों के लिए जानलेवा है। एंफीसीमा और क्रोनिक ब्रोंकाइटिस इसके दो प्रकार हैं और धूम्रपान इस बीमारी की प्रमुख वजह है। धूम्रपान के जरिये विषाक्‍त पदार्थ पुरुषों के फेफड़ों को प्रभावित करते हैं, इसके कारण फेफड़े की कोशिकायें सही तरीके से काम नहीं कर पाती हैं और रक्‍त में ऑक्‍सीजन की कमी हो जाती है। शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने वाले छोटे-छोटे वायुतंत्रों में गड़बड़ी आने से सांस लेना तक दूभर होने लगता है। यह फेफड़ों में संक्रमण भी फैलाता है।

क्या सीओपीडी एक खतरनाक बीमारी है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन 2000 के अनुसार भारत में सीओपीडी से मरने वालों की संख्या कैंसर, मधुमेह, हार्ट अटैक और लकवे से मरने वालों की कुल संख्या से भी अधिक है। विश्व में सीओपीडी मौत का छठा सबसे बड़ा कारण है लेकिन 2020 तक आशंका है कि मौत के कारणों में इसका स्थान तीसरा होगा। सीओपीडी न केवल मौत का ही कारण है बल्कि मानव पीड़ा का भी यह एक बहुत बड़ा कारण है। सीओपीडी रोग के अधिक प्रभाव से ग्रस्‍त व्यक्ति कुछ कदम चलने के लिए भी तरस जाता है। थोड़ा चलते ही सांस बेकाबू हो जाती है।

कैसे पहचानें?

सीओपीडी के प्राथमिक लक्षणों की पहचान करना बहुत ही आसान है। अगर बलगम वाली खांसी लगातार दो महीने से अधिक बनी रहती है और मौसम बदलने पर पिछले दो साल से ऐसा हो रहा हो तो आपको डॉक्टर से तुरंत संपर्क करने की जरूरत है। खांसी के सामान्य सिरप और दवाएं इसमें कारगर नहीं होती। हालांकि ज्‍यादातर मामलों में सीओपीडी के लक्षण 35 साल की उम्र के बाद ही नजर आते हैं।  

सीओपीडी के कारण

धूम्रपान के धुएं की मिलावट फेफड़ों के लिए बहुत घातक होती है। सीओपीडी का सबसे बड़ा कारण धूम्रपान है। सीओपीडी के लगभग 80 प्रतिशत रोगी ऐसे होते हैं जो धूम्रपान करते हैं। सीओपीडी के 20 प्रतिशत रोगी हालांकि वह धूम्रपान नहीं करते फिर भी धुएं वाले वातावरण में रहने के कारण रोग से ग्रस्‍त होते हैं।

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सीओपीडी रोग के लक्षण

  • लगातार होने वाली खांसी
  • लम्बे समय तक कफ बलगम और कफ बनना
  • सर्दियों में खांसी होना
  • कार्य करते समय सांस फूलना।
  • धूम्रपान करते व्यक्ति में यह लक्षण बार-बार होने से सीओपीडी रोग की शुरूआत होती है।


सीओपीडी का उपचार

धूम्रपान छोडना एंव धूएंदार हवा से सांस को बचाना, सीओपीडी की किसी भी अवस्था में रोग की गंभीरता में कमी लाने का सबसे महत्वपूर्ण कदम है। धूम्रपान छोडने के बाद फेफड़ों की अवस्था में सुधार आता है। इसके अलावा, वजन कम करना, नियमित व्यायाम और पौष्टिक आहार जैसे फल, प्रोटीन और हरी सब्जिया रोग को दूर करने में आपकी मदद करता हैं।



Image Courtesy : Getty Images

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