हेपेटाइटिस के बारे में अब तक लोगों को नहीं है पूरी जानकारी

हेपेटाइटिस की गंभीरता के समझते हुए और लोगों को इसके प्रति जागरूक करने के लक्ष्य के साथ एशिया पेसिफ़िक एसोसिएशन फॉर स्टडी ऑफ़ लिवर ने तीन दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें हेपेटाइटिस के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की गईं।

Rahul Sharma
विविधWritten by: Rahul SharmaPublished at: Dec 23, 2015
हेपेटाइटिस के बारे में अब तक लोगों को नहीं है पूरी जानकारी

हेपेटाइटिस पूरी दुनिया में तेजी से फैलती बीमारियों में से एक है। भारत में भी इसके मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। एड्स की तरह ही फैलने वाले हेपेटाइटिस को लेकर लोगों में एड्स जैसी जागरूकता अभी तक नहीं आई है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक, पूरी दुनिया में करीब दो अरब लोग हेपेटाइटिस-बी के शिकार हैं, जबकि इनमें से 36 करोड़ लोग में इंफेक्शन खतरनाक स्तर पर है। जबकि हर साल लगभग छह लाख लोग हेपेटाइटिस-बी की वजह से मौत के मुंह में पहुंच जाते हैं। वहीं हेपेटाइटिस - सी और ई भी बेहद खतरनाक स्थिति बनाए हुए है। हेपेटाइटिस की गंभीरता के समझते हुए और लोगों को इसके प्रति जागरूक करने के लक्ष्य के साथ एशिया पेसिफ़िक एसोसिएशन फॉर स्टडी ऑफ़ लिवर द्वारा दिल्ली में एक तीन दिवसीय सम्मेलन (18 - 20 दिसम्बर) आयोजित किया गया, लिवर और पित्त विज्ञान संस्थान के प्रमुख डॉ. एस के सरीन के अनुसार इस सम्मेलन में 32 देशों के एक्पर्ट्स ने हिस्सा लिया और देश-विदेश में हेपेटाइटिस के इलाज और रोकथाम में हो रही प्रगति व अपने तजुर्बे के विषय में जानकारियां साझा की। यह तीन दिवसीय सम्मेलन 'एचसीवी (हेपेटाइटिस सी वायसर) इन्फेक्शन एंड रीसेंट एडवांसेज इन लिवर डिसेंसेस' विषय पर केंद्रित था। इस सम्मेलन में हेपेटाइटिस के विशेषज्ञों व डॉक्टरों ने हेपेटाइटिस के इलाज के संबंध में विश्व स्तर पर हो रही प्रगति व शोधों के विषय में जरूरी जानकारियां साझा की। साथ ही लोगों को हेपेटाइटिस के संबंध में कुछ बेहद महत्वपूर्ण जानकारियां भी साझा कीं। उन्होंने कहा कि यदि लोग हेपेटाइटिस के बारे में पूरी जानकारी रखें तो इससे काफी बचाव हो सकता है। चलिये जानें हेपेटाइटिस के बारे में यह महत्वपूर्ण बातें - 

 

हेपेटाइटिस क्या है

हेपेटाइटिस दरअसल लिवर में संक्रमण होना है, जो हेपेटाइटिस के पांच वायरस के जरिए होती है। इस वायरस को हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई के नाम से जाना जाता है। चलिये विस्तार से जानें हेपेटाइटिस के यह सभी प्रकार क्या हैं -

 

Hepatitis Facts in Hindi

 

हेपेटाइटिस ए

हालांकि दवाओं की मदद से इस हेपेटाइटिस का इलाज आसानी से किया जा सकता है, डॉ. शांतनु दुबे बताते हैं कि दूषित भोजन और पानी इस बीमारी के प्रसार के सबसे प्रमुख कारण हैं। तो इस बीमारी से बचने का सबसे आसान तरीका यही है कि अपने भोजन में जरूरी सावधानी बरती जाए लीवर में सूजन, भूख कम लगना, नौजिया, उल्टी और बुखार हेपेटाइटिस ए के प्रमुख लक्षण होते हैं।

 

हेपेटाइटिस बी

विश्व स्‍वास्य ससंगठन के मुताबिक दुनिया के हर तीसरे इनसान को हेपेटाइटिस बी ने प्रभावित किया है। डॉ दुबे इस वायरस के खतरनाक प्रभावों की ओर इशारा करते हुए बताते हैं कि यह वायरस सालों तक पकड़ में नहीं आता और बीना किसी साफ संकेत के अपना काम करता रहता है। आमतौर पर यह वायरस जब तक पकड़ में आता है, तब तक कि 75 प्रतिशत लीवर को गंभीर हानी नहीं पहुंच जाती है और तब तक यह वायरस लिवर को काफी हद तक क्षतिग्रस्त कर चुका होता है। यह वायरस संक्रमित खून, सेल्विया, असुरक्षित यौन संबंध और संक्रमित मां से शिशु को हो सकता है। अपनी शेविंगकिट (खासतौर पर रेज़र) किसी के साथ साझा न करें। क्योंकि इससे संक्रमण फैल सकता है।


हेपेटाइटिस सी

हेपेटाइटिस सी जानलेवा वायरस कई सालों तक पकड़ में नहीं आता है, और इसकी वजह से फिबरोसिस (तंतुमयता), क्रॉनिक सिरोसिस जैसी बीमारियां हो सकती हैं। इस बीमारी से लीवर बुरी तरह प्रभावित होता है। यह बीमारी मुख्य तौर पर संक्रमित रक्त के माध्यम से ही फैलती है। असु‍रक्षित सुइयों और अन्य संचारित माध्यमों से भी यह बीमारी फैल सकती है। तो इसके प्रति सचेत रहें।

 

हेपेटाइटिस डी

डॉक्टार दुबे के अनुसार हेपेटाइटिस डी का फिलहाल कोई पुख़्ता इलाज मौजूद नहीं है। हेपेटाइटिस डी से बचने का सबसे आसान तरीका यही है कि आप हेपेटाइटिस बी का टीका लगवाएं। क्योंकि जिन लोगों को हेपेटाइटिस बी होता है उनमें हेपेटाइटिस डी होने की आशंका ज्यादा रहती है।

 

हेपेटाइटिस ई

हेपेटाइटिस ई का वायरस मुंह के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर सकता है। हेपेटाइटिस ई से संक्रमित पानी पीने से यह वायरस किसी व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर सकता है।

 

हेपेटाइटिस कैसे फैलता है 

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हेपेटाइटिस बी और एचआईवी के बैक्टीरिया के फैलने का तरीका लगभग एक ही होता है, लेकिन हेपेटाइटिस-बी एचआईवी के मुकाबले कई गुणा ज्यादा खतरनाक है। ऐसा इसलिए, क्योंकि हेपेटाइटिस-बी का बैक्टीरिया शरीर के बाहर भी कम से कम सात दिन तक जिंदा रह सकता है और किसी स्वस्थ इंसान को संक्रमित कर सकता है। इस रोग के विशेषज्ञ बताते हैं कि लगभग सभी रोगों के बैक्टीरिया के फैलने का तरीका लगभग एक जैसा होता है। लेकिन ये जरूरी नहीं कि दो लोगों में ये बैक्टिरिया एक तरह से फैला हो।

 

हेपेटाइटिस के फैलने के कारण

शोध हबताते हैं कि हेपेटाइटिस ए और ई दूषित भोजन और दूषित पानी के सेवन से फैलते हैं। जबकि हेपेटाइटिस बी, सी और डी इन रोगों से ग्रस्त रोगियों की इस्तेमाल की हुई संक्रमण फैला सकने वाली वस्तुओं व दूषित खून से फैलता है। इसके अलावा असुरक्षित यौन संबंध बनाने से भी ये रोग फैलता है। कुछ मामलों में ये गर्भवति मां से होने वाले बच्चे में हो सकता है, लेकिन ऐसा जरूरी नहीं कि सभी बच्चों को ये रोग अपनी मां से हो जाए। अगर मां इस रोग से ग्रस्त है तो उचित इलाज कर बच्चे में यह रोग होने से रोका जा सकता है।


हेपेटाइटिस से बचाव

बरसात या प्राकृतिक आपदा (बाढ़) आदि में इस बीमारी के फैलने का खतरा ज्यादा होता है। इसलिए शौच के बाद या खाना खाने से पहले हाथ अच्छी तरह धोएं। हमेशा ताजा और साफ तरीकों से बना खाना ही खाएं। साफ पानी ही पिएं। इस बीमारी से बचने के लिये अब टीका भी मौजूद है, इससे बचनें के लिए टिकाकरण अवश्य करवाएं। यौंन संबंध बनाते समय सावधानी बरतें और संक्रमण फैला सकने वाली वस्तुओं (सुंई, रेज़र आदि) का उपयोग ना करें। अगर खून चढ़ाने की जरूरत पड़े तो प्रमाणित ब्लड बैंक से ही खून लें। सही मायनों में देखा जाए तो इस रोग से बचाव ही इसकी रोकथाम का सबसे अच्छा तरीका है।

 

इसके लिये दवाएं

हेपेटाइटिस वायरस से बचने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि बीमारी से बचाव के लिये वैक्सीन ले ली जाए। लेकिन, दुर्भाग्यवश हेपेटाइटिस सी और ई के लिए कोई दवा उपलब्धन नहीं है। हेपेटाइटिस ए की दवा एक साल से बड़ी आयु का कोई भी इंसान ले सकता है। हेपेटाइटिस ए में दो वैक्सीन दी जाती हैं, दूसरी वैक्सीन पहली वैक्सीन के छह महीने बाद दी जाती है। बच्चों को यह दवा देने से वे 14 से 20 साल तक इस बीमारी से बचे रह सकते हैं, वहीं वयस्कों पर इस वैक्सीन का असर 25 सालों तक रहता है।



डॉ दुबे बताते हैं, '' हेपेटाइटिस बी के लिए नवजात शिशुओं और वयस्कों दोनों को वैक्सीपन दी जाती है। इस कोर्स में तीन इंजेक्शिन लगाए जाते हैं, नवजात शिशुओं को पैदा होने के 72 घंटे के भीतर यह इंजेक्शन जरूर लगवाना चाहिए। और इसके बाद तीन इंजेक्शन क्रमशः पैदा होने पर, एक वर्ष की उम्र में और फिर छह वर्ष की उम्र में लगाये जा सकते हैं। यह वैक्सीन किसी भी व्यक्ति को 25 वर्षों तक इस बीमारी से बचाकर रख सकती है।''


आमतौर पर देखा जाता है कि लोग सही समय पर इंजेक्शेन लगवाना भूल जाते हैं। लेकिन, ऐसा करना सेहत के साथ जोखिम भरा होता है। तो, वैक्सीन लगवाने का सही समय याद रखें और खुद को वैक्सिनेट कराएं।

 

Image Source - Getty Images

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हेपेटाइटिस पूरी दुनिया में तेजी से फैलती बीमारियों में से एक है। भारत में भी इसके मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। एड्स की तरह ही फैलने वाले

हेपेटाइटिस को लेकर लोगों में एड्स जैसी जागरूकता अभी तक नहीं आई है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक, पूरी दुनिया में करीब दो अरब लोग

हेपेटाइटिस-बी के शिकार हैं, जबकि इनमें से 36 करोड़ लोग में इंफेक्शन खतरनाक स्तर पर है। जबकि हर साल लगभग छह लाख लोग हेपेटाइटिस-बी की

वजह से मौत के मुंह में पहुंच जाते हैं। वहीं हेपेटाइटिस - सी और ई भी बेहद खतरनाक स्थिति बनाए हुए है। हेपेटाइटिस की गंभीरता के समझते हुए और

लोगों को इसके प्रति जागरूक करने के लक्ष्य के साथ एशिया पेसिफ़िक एसोसिएशन फॉर स्टडी ऑफ़ लिवर द्वारा दिल्ली में एक तीन दिवसीय सम्मेलन

(18 - 20 दिसम्बर) आयोजित किया गया, लिवर और पित्त विज्ञान संस्थान के प्रमुख डॉ. एस के सरीन के अनुसार इस सम्मेलन में 32 देशों के एक्पर्ट्स

ने हिस्सा लिया और देश-विदेश में हेपेटाइटिस के इलाज और रोकथाम में हो रही प्रगति व अपने तजुर्बे के विषय में जानकारियां साझा की। यह तीन

दिवसीय सम्मेलन 'एचसीवी (हेपेटाइटिस सी वायसर) इन्फेक्शन एंड रीसेंट एडवांसेज इन लिवर डिसेंसेस' विषय पर केंद्रित था। इस सम्मेलन में हेपेटाइटिस

के विशेषज्ञों व डॉक्टरों ने हेपेटाइटिस के इलाज के संबंध में विश्व स्तर पर हो रही प्रगति व शोधों के विषय में जरूरी जानकारियां साझा की। साथ ही लोगों

को हेपेटाइटिस के संबंध में कुछ बेहद महत्वपूर्ण जानकारियां भी साझा कीं। उन्होंने कहा कि यदि लोग हेपेटाइटिस के बारे में पूरी जानकारी रखें तो इससे

काफी बचाव हो सकता है। चलिये जानें हेपेटाइटिस के बारे में यह महत्वपूर्ण बातें -  



हेपेटाइटिस क्या है
हेपेटाइटिस दरअसल लिवर में संक्रमण होना है, जो हेपेटाइटिस के पांच वायरस के जरिए होती है। इस वायरस को हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई के

नाम से जाना जाता है। चलिये विस्तार से जानें हेपेटाइटिस के यह सभी प्रकार क्या हैं -


हेपेटाइटिस ए
हालांकि दवाओं की मदद से इस हेपेटाइटिस का इलाज आसानी से किया जा सकता है, डॉ. शांतनु दुबे बताते हैं कि दूषित भोजन और पानी इस बीमारी के

प्रसार के सबसे प्रमुख कारण हैं। तो इस बीमारी से बचने का सबसे आसान तरीका यही है कि अपने भोजन में जरूरी सावधानी बरती जाए लीवर में सूजन,

भूख कम लगना, नौजिया, उल्टी और बुखार हेपेटाइटिस ए के प्रमुख लक्षण होते हैं।


हेपेटाइटिस बी
विश्व स्‍वास्य ससंगठन के मुताबिक दुनिया के हर तीसरे इनसान को हेपेटाइटिस बी ने प्रभावित किया है। डॉ दुबे इस वायरस के खतरनाक प्रभावों की ओर

इशारा करते हुए बताते हैं कि यह वायरस सालों तक पकड़ में नहीं आता और बीना किसी साफ संकेत के अपना काम करता रहता है। आमतौर पर यह

वायरस जब तक पकड़ में आता है, तब तक कि 75 प्रतिशत लीवर को गंभीर हानी नहीं पहुंच जाती है और तब तक यह वायरस लिवर को काफी हद तक

क्षतिग्रस्त कर चुका होता है। यह वायरस संक्रमित खून, सेल्विया, असुरक्षित यौन संबंध और संक्रमित मां से शिशु को हो सकता है। अपनी शेविंगकिट

(खासतौर पर रेज़र) किसी के साथ साझा न करें। क्योंकि इससे संक्रमण फैल सकता है।


हेपेटाइटिस सी
हेपेटाइटिस सी जानलेवा वायरस कई सालों तक पकड़ में नहीं आता है, और इसकी वजह से फिबरोसिस (तंतुमयता), क्रॉनिक सिरोसिस जैसी बीमारियां हो

सकती हैं। इस बीमारी से लीवर बुरी तरह प्रभावित होता है। यह बीमारी मुख्य तौर पर संक्रमित रक्त के माध्यम से ही फैलती है। असु‍रक्षित सुइयों और

अन्य संचारित माध्यमों से भी यह बीमारी फैल सकती है। तो इसके प्रति सचेत रहें।


हेपेटाइटिस डी
डॉक्टार दुबे के अनुसार हेपेटाइटिस डी का फिलहाल कोई पुख़्ता इलाज मौजूद नहीं है। हेपेटाइटिस डी से बचने का सबसे आसान तरीका यही है कि आप

हेपेटाइटिस बी का टीका लगवाएं। क्योंकि जिन लोगों को हेपेटाइटिस बी होता है उनमें हेपेटाइटिस डी होने की आशंका ज्यादा रहती है।


हेपेटाइटिस ई
हेपेटाइटिस ई का वायरस मुंह के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर सकता है। हेपेटाइटिस ई से संक्रमित पानी पीने से यह वायरस किसी व्यक्ति के शरीर में

प्रवेश कर सकता है।


हेपेटाइटिस कैसे फैलता है  
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हेपेटाइटिस बी और एचआईवी के बैक्टीरिया के फैलने का तरीका लगभग एक ही होता है, लेकिन हेपेटाइटिस-बी एचआईवी के

मुकाबले कई गुणा ज्यादा खतरनाक है। ऐसा इसलिए, क्योंकि हेपेटाइटिस-बी का बैक्टीरिया शरीर के बाहर भी कम से कम सात दिन तक जिंदा रह सकता

है और किसी स्वस्थ इंसान को संक्रमित कर सकता है। इस रोग के विशेषज्ञ बताते हैं कि लगभग सभी रोगों के बैक्टीरिया के फैलने का तरीका लगभग एक

जैसा होता है। लेकिन ये जरूरी नहीं कि दो लोगों में ये बैक्टिरिया एक तरह से फैला हो।


हेपेटाइटिस के फैलने के कारण
शोध हबताते हैं कि हेपेटाइटिस ए और ई दूषित भोजन और दूषित पानी के सेवन से फैलते हैं। जबकि हेपेटाइटिस बी, सी और डी इन रोगों से ग्रस्त

रोगियों की इस्तेमाल की हुई संक्रमण फैला सकने वाली वस्तुओं व दूषित खून से फैलता है। इसके अलावा असुरक्षित यौन संबंध बनाने से भी ये रोग फैलता

है। कुछ मामलों में ये गर्भवति मां से होने वाले बच्चे में हो सकता है, लेकिन ऐसा जरूरी नहीं कि सभी बच्चों को ये रोग अपनी मां से हो जाए। अगर मां

इस रोग से ग्रस्त है तो उचित इलाज कर बच्चे में यह रोग होने से रोका जा सकता है।


हेपेटाइटिस से बचाव
बरसात या प्राकृतिक आपदा (बाढ़) आदि में इस बीमारी के फैलने का खतरा ज्यादा होता है। इसलिए शौच के बाद या खाना खाने से पहले हाथ अच्छी तरह

धोएं। हमेशा ताजा और साफ तरीकों से बना खाना ही खाएं। साफ पानी ही पिएं। इस बीमारी से बचने के लिये अब टीका भी मौजूद है, इससे बचनें के लिए

टिकाकरण अवश्य करवाएं। यौंन संबंध बनाते समय सावधानी बरतें और संक्रमण फैला सकने वाली वस्तुओं (सुंई, रेज़र आदि) का उपयोग ना करें। अगर

खून चढ़ाने की जरूरत पड़े तो प्रमाणित ब्लड बैंक से ही खून लें। सही मायनों में देखा जाए तो इस रोग से बचाव ही इसकी रोकथाम का सबसे अच्छा

तरीका है।


दवाएं
हेपेटाइटिस वायरस से बचने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि बीमारी से बचाव के लिये वैक्सीन ले ली जाए। लेकिन, दुर्भाग्यवश हेपेटाइटिस सी और ई के

लिए कोई दवा उपलब्धन नहीं है। हेपेटाइटिस ए की दवा एक साल से बड़ी आयु का कोई भी इंसान ले सकता है। हेपेटाइटिस ए में दो वैक्सीन दी जाती हैं,

दूसरी वैक्सीन पहली वैक्सीन के छह महीने बाद दी जाती है। बच्चों को यह दवा देने से वे 14 से 20 साल तक इस बीमारी से बचे रह सकते हैं, वहीं

वयस्कों पर इस वैक्सीन का असर 25 सालों तक रहता है।

डॉ दुबे बताते हैं, '' हेपेटाइटिस बी के लिए नवजात शिशुओं और वयस्कों दोनों को वैक्सीपन दी जाती है। इस कोर्स में तीन इंजेक्शिन लगाए जाते हैं,

नवजात शिशुओं को पैदा होने के 72 घंटे के भीतर यह इंजेक्शन जरूर लगवाना चाहिए। और इसके बाद तीन इंजेक्शन क्रमशः पैदा होने पर, एक वर्ष की

उम्र में और फिर छह वर्ष की उम्र में लगाये जा सकते हैं। यह वैक्सीन किसी भी व्यक्ति को 25 वर्षों तक इस बीमारी से बचाकर रख सकती है।''


आमतौर पर देखा जाता है कि लोग सही समय पर इंजेक्शेन लगवाना भूल जाते हैं। लेकिन, ऐसा करना सेहत के साथ जोखिम भरा होता है। तो, वैक्सीन

लगवाने का सही समय याद रखें और खुद को वैक्सिनेट कराएं।


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