सरवाइकल कैंसर की दवाओं के साइड-इफेक्ट

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Feb 26, 2013

cervical cancer ki dawao ke side effect

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा किए एक अध्ययन के अनुसार भारत में प्रति एक लाख में से करीब 31 महिलाओं को सरवाइकल कैंसर हैं। इसके बाद पहली बार केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर सरवाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग शुरू की गई।

 

 

क्या है सरवाइकल कैंसर
 
सरवाइकल कैंसर को बच्चादानी, गर्भाशय या फिर यूट्राइन सर्विक्स कैंसर भी कहा जाता है। सरवाइकल कैंसर में गर्भाशय ग्रीवा में असामान्य कैंसर कोशिकाओं का विकास होता है। सरविक्स महिला के गर्भाशय का मध्य भाग है, जो योनि के रूप में नीचे जारी रहता है। गर्भाशय में एक बार एचपीवी का संक्रमण होने के बाद यह पांच से दस साल तक सुप्तावस्ता में रहता है, इसे कार्सिनोमा इनसीटू कहा जाता है।


महिलाओं द्वारा अपने जननांग की साफ़-सफाई नहीं रखने, अधिक प्रसव और बार-बार गर्भधारण करने की वजह से ये बीमारी होती है, साथ ही अत्याधिक सेक्स सक्रियता, कम उम्र में सेक्स संबंध और अधिक पुरुषों के साथ शारीरिक संबंध बनाने वाली महिलाओं में इस बीमारी के होने की संभावना ज्यादा रहती है। केवल 10 फीसदी मामले आनुवांशिक होते है।

 

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सरवाइकल कैंसर की दवाएं-

एचपीवी दवा

सरवाइकल कैंसर के कारक हृयुमन पैपीलोमा वायरस से बचाव के लिए ह्यूमन पैपीलोमा वैक्सीन लेने की सलाह दी जाती है। वायरस के 13 और 18 स्ट्रेन से बचने लिए एचपीवी टीकाकरण करवाना चाहिए, जबकि वैक्सीनेशन के साथ ही बीमारी की स्क्रीनिंग भी करानी चाहिए। लेकिन ज्यादातर महिलाएं सामाजिक लोकलाज की वजह से सरवाइकल कैंसर की जांच नहीं कराती हैं। पैप स्मीयर जांच विधि सरवाइकल कैंसर की जांच का बेहतर तरीका है, जबकि पैप स्मीयर से पहले विजुअल इंफेक्शन बेस्ड स्क्रीनिंग से भी की जा सकती है, जिसमें सैंपल में वीआईए स्क्रीनिंग एक्सेटिक एसिड या फिर मेगनिफिशेंट लेंस के साथ की जाती है।

टीकाकरण

सरवाइकल कैंसर के संक्रमण से बचने के लिए हर महिला को एचपीवी टीकाकरण जरूर करवाना चाहिए। 10 साल की लड़कियों से लेकर 40 साल तक की महिलाएं यह टीकाकरण करवा सकती है।

किस उम्र में वैक्सीनेशन जरूरी?

एचपीवी के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए इसे 10 से 15 साल की लड़कियों में एचपीवी वैक्सीन करवाना चाहिए। पैप-स्मीयर जांच से पहले वीएसआई स्क्रीनिंग भी जरूरी है। एचपीवी तीन चरणों में होने वाला टीकाकरण है, जिसे पहली एक महीने, फिर दूसरी और तीसरी डोज छठे महीने में दी जाती है।

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सरवाइकल कैंसर होने पर जो दवाइयां ली जाती है उनका कोई साइड-इफेक्ट नहीं होता। सरवाइकल कैंसर से बचाव के लिए लगवाए लाने वाले एचपीवी वैक्सीन से भी कोई साइड-इफेक्ट नहीं होता।

 

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