
आजकल लोगों का अधिकतर समय कंप्यूटर, लैपटॉप या मोबाइल के कीबोर्ड पर उंगलियां चलाते हुए व्यतीत होता है। हालांकि ऐसे कार्य अब हमारी जीवनशैली का ज़रूरी हिस्सा बन चुके हैं, इसलिए इनसे दूर रहना भी मुश्किल है। इसी वजह से जब कभी लोगों की कलाई में दर्द होता है तो वे उसे मामूली थकान समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं पर शुरुआती दौर में ध्यान न देने पर यह समस्या गंभीर रूप धारण कर सकती है।
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गुरुग्राम स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डॉ. प्रवीण गुप्ता के अनुसार, 'लंबे समय तक गैजेट्स पर उंगलियां चलाने के कारण कलाई के खास हिस्से में सूजन आने लगती है। इससे हथेलियों की मिडियन नर्व पर अधिक दबाव पड़ता है। यही नर्व कलाई और उंगलियों को को जोडऩे का काम करती है। नर्वस सिस्टम को संचालित करने के लिए पूरे शरीर में करंट का संचार होता है। जब उसकी मात्रा बढ़ जाती है तो उंगलियों में झनझनाहट महसूस होती है। कई बार इस करंट का प्रवाह कम हो जाता है तो हाथ सुन्न पड़ जाता है।
इसके अलावा एक स्थिति ऐसी भी होती है, जब इस करंट के प्रवाह में अचानक बहुत उतार-चढ़ाव आने लगता है। कभी यह बहुत तेज़ तो कभी बिलकुल धीमा हो जाता है। इससे व्यक्ति के हाथों में कमज़ोरी आने लगती है और रोज़मर्रा के छोटे-छोटे कार्यो के दौरान भी उसे बहुत दर्द होता है।
प्रमुख कारण
- लंबे समय तक मोबाइल और कंप्यूटर जैसे गैजेट्स का इस्तेमाल और कोहनियों को टेबल पर टिका कर एक ही पोस्चर में माउस से काम करना।
- जिन लोगों को थायरॉयड होता है, सूजन के कारण उनमें कॉर्पल टनल सिंड्रोम की आशंका बढ़ जाती है।
- डायबिटीज़ होने की स्थिति में कुछ मेटाबॉलिक तत्व नसों की लाइनिंग में जमा होने लगते हैं, इससे भी व्यक्ति की हथेलियों में झनझनाहट होती है।
- मोटापे के कारण कलाई के खास हिस्से पर दबाव पड़ता है, जिससे व्यक्ति की हथेलियों में दर्द होता है।
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कैसे करें बचाव
- कंप्यूटर पर माउस चलाते समय कलाई को लंबे समय तक एक ही मुद्रा में न रखें।
- बीच-बीच में कोहनियों की पोजि़शन में भी बदलाव लाएं।
- की-बोर्ड पर काम करते समय हर आधे घंटे के अंतराल पर एक-दो मिनट के लिए अपनी उंगलियों को थोड़ा आराम दें।
- अगर लंबे समय तक मोबाइल पर बात करना ज़रूरी हो तो उसे हाथ से पकडऩे के बजाय हैंडफ्री प्लग का इस्तेमाल करें।
- कंप्यूटर पर काम करते हुए हर दो घंटे के अंतराल पर पांच मिनट के लिए अपने दोनों हाथों की कलाइयों को क्लॉक वाइज़ और एंटी क्लॉक वाइज़ घुमाएं।
- संतुलित खानपान और एक्सरसाइज़ अपनाएं और वज़न को नियंत्रित रखें। अगर आपको डायबिटीज़ हो तो अपने शुगर लेवल को नियंत्रित रखें।
- अगर पहले से थायरॉयड की समस्या हो तो नियमित रूप से दवाओं का सेवन करें और छह महीने के अंतराल पर जांच कराएं।
- एक्सरसाइज़ की कमी से शरीर के सभी हिस्सों में सही ढंग से रक्त संचार नहीं हो पाता, इससे भी कलाई सहित पूरे हाथ में दर्द हो सकता है। ऐसे मामलों में फिजि़योथेरेपी से भी थोड़ी राहत मिलती है।
- जब अधिक दर्द हो तो कोई भारी सामान न उठाएं और कलाई को बेवजह न दबाएं।
- दर्द से प्रभावित हिस्से पर आइसबैग रखें, इससे बहुत राहत मिलती है।
- घड़ी के स्ट्रैप को कस कर न बांधें।
- अपने मन से कोई दवा न लें।
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